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बांग्ला भाषा को “बांग्लादेशी भाषा” बताने पर भड़की तृणमूल कांग्रेस, बताया बंगाल और बंगाली समाज का अपमान

बांग्ला भाषा को “बांग्लादेशी भाषा” बताने पर भड़की तृणमूल कांग्रेस, बताया बंगाल और बंगाली समाज का अपमान

Bengal Election: आसनसोल: भाजपा की ओर से बांग्ला भाषा को “बांग्लादेशी भाषा” बताने पर तृणमूल कांग्रेस भड़क गयी है. गुरुवार देर रात आसनसोल के राहा लेन स्थित तृणमूल जिला कार्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए जिलाध्यक्ष नरेंद्र नाथ चक्रवर्ती ने भाजपा के आईटी सेल पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि बांग्ला भाषा को “बांग्लादेशी भाषा” बताना बंगाल और बंगाली समाज का अपमान है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं के मन में बंगाल और यहां की संस्कृति के प्रति सम्मान नहीं है. इसके साथ ही चक्रवर्ती ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं पर ईश्वर चंद्र विद्यासागर की प्रतिमा तोड़ने और रविंद्र नाथ टैगोर तथा बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जैसे महान व्यक्तित्वों के नाम तक गलत तरीके से प्रस्तुत करने के आरोप भी लगे हैं, जो उनकी मानसिकता को दर्शाता है.

जनता देगी पीएम मोदी के आरोपों का जवाब

इस मौके आसनसोल उत्तर से पार्टी प्रत्याशी मलय घटक ने कहा कि प्रधानमंत्री पद से किसी को समस्या नहीं है, लेकिन प्रधानमंत्री रहते हुए यदि बंगाल के लोगों के साथ “वंचना और भेदभाव” होता है, तो जनता इसका जवाब जरूर देगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान को लेकर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा बंगाल और यहां की जनता के खिलाफ कही गई बातों की जितनी निंदा की जाए, वह कम है. जिलाध्यक्ष नरेंद्र नाथ चक्रवर्ती ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपनी जनसभा में पिछले 15 वर्षों में टीएमसी पर बंगाल को “लूटने” का आरोप लगाया, जो पूरी तरह निराधार और राजनीतिक बयानबाजी है.

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नए वादों पर जनता कैसे करे विश्वास

नरेंद्र नाथ चक्रवर्ती ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ केंद्र बंगाल के हिस्से का 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का फंड रोक कर रखता है, वहीं दूसरी तरफ बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं. इससे साफ है कि केंद्र सरकार राज्य के विकास को बाधित करना चाहती है और लोगों को परेशान कर रही है. उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य के बकाया फंड को क्यों रोका गया और इसका जवाब प्रधानमंत्री को देना चाहिए. वहीं, तृणमूल प्रत्याशी मलय घटक ने भी प्रधानमंत्री पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि हर साल 2 करोड़ नौकरियां देने और हर व्यक्ति के खाते में 15 लाख रुपये देने जैसे वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं. ऐसे में नए वादों पर जनता कैसे विश्वास करे.

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