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सारंडा में मुठभेड़, फोर्स ने 10 किमी क्षेत्र घेरा:नक्सलियों से मुठभेड़ में इंस्पेक्टर समेत 5 जवान जख्मी, एक करोड़ का इनामी नक्सली घिरा


सारंडा के चड़राडेरा जंगल में बुधवार सुबह करीब 8 बजे से सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ चल रही है। मुठभेड़ में कोबरा बटालियन-205 के इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश और 4 जवान घायल हो गए। घायलों में इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश, जवान जितेंद्र राय, उत्तम कुमार सेनापति, शैलेश कुमार दुबे और प्रेम शामिल हैं। इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश आईईडी ब्लास्ट में घायल हुए हैं। वहीं, शैलेश कुमार दुबे को गर्दन, उत्तम कुमार सेनापति को हाथ और जितेंद्र राय को पैर में गोली लगी है। प्रेम को पैर में भी चोट आई है। जितेंद्र को छोड़कर अन्य घायलों को एयरलिफ्ट कर रांची इलाज के लिए भेजा गया। सभी का इलाज रांची के एक निजी अस्पताल में चल रहा है। पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा को सुरक्षाबलों ने घेरा
सूत्रों के अनुसार, फोर्स ने करीब 10 किमी के दायरे में नक्सलियों की घेराबंदी कर रखी है। इस ऑपरेशन में एक करोड़ के इनामी नक्सली और पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा के फंसे होने की सूचना है। मिसिर बेसरा को झारखंड-ओडिशा क्षेत्र में सक्रिय बड़े नक्सली नेताओं में गिना जाता है। एसपी बोले-नक्सलियों को भी लगी है गोली
चाईबासा के एसपी अमित रेनु ने बताया कि मिसिर बेसरा के दस्ते के साथ मुठभेड़ हो रही है। देर रात तक दोनों ओर से रुक-रुक कर फायरिंग होती रही। मुठभेड़ के दौरान नक्सलियों को भी गोली लगने की सूचना मिली है। हालांकि, ऑपरेशन समाप्त होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नक्सलियों को कितना नुकसान हुआ है। बालिबा में 29 पुलिसकर्मियों को मारा था
मिसिर बेसरा ने सारंडा के बालीबा में अप्रैल 2004 को सबसे बड़े ‎नक्सली कांड को अंजाम दिया था। यह हमला बेसरा के करियर का‎ सबसे हिंसक अध्याय माना जाता है। इस हमले में 29 से 32 पुलिस‎कर्मी शहीद हुए थे। एक बार पकड़ाया था लेकिन बिहार के लखीसराय ‎पुलिस पिकेट हमला में पेशी के दौरान कोर्ट से भाग गया था।‎ कटहल तुड़ाई में विवाद के बाद बना नक्सली‎
मिसिर बेसरा का जीवन एक‎ कट्टरपंथी आदिवासी छात्र से‎ लेकर एक रणनीतिक कमांडर की‎ कहानी है । झारखंड के गिरीडीह जिले के पीरटांड निवासी मिसिर ‎बेसरा पीके राय‎ धनबाद से हिंदी में बीए ऑर्नस ‎की है। 1980 के दशक की‎ शुरुआत में, जब बेसरा कॉलेज ‎की पढ़ाई कर रहा था, तब उसके ‎गांव भगनाडीह में एक विशाल‎ कटहल के पेड़ को गांव के दबंग लोगों ने काट दिया था। उसकी ‎लकड़ी ले जाने की लड़ाई के बाद ‎वह नक्सली बन गया। अक्टूबर ‎1985 में, उसने एक नक्सली‎ सांस्कृतिक समूह ‘अखिल‎ भारतीय क्रांतिकारी सम्मेलन’ के ‎कार्यक्रम में हिस्सा लिया। 1987 ‎में उसने औपचारिक रूप से‎ सशस्त्र विंग पहली बार बंदूक‎ पकड़ी। मिसिर बेसरा को ‎भास्कर, सुनील, सुनिर्मल, सागर, ‎विवेक के नाम पर भी जाना जाता है।‎

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