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तत्कालीन CO सुचिता कुमारी की 2 वेतन वृद्धि रोकी:किशनगंज में फर्जी दाखिल-खारिज मामले में राजस्व विभाग ने की कार्रवाई


किशनगंज जिले के ठाकुरगंज की तत्कालीन अंचल अधिकारी (सीओ) सुचिता कुमारी को दाखिल-खारिज में गड़बड़ी के आरोप में विभागीय दंड दिया गया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की है। उन्हें संचयी प्रभाव के बिना दो वेतन वृद्धि पर रोक लगाने का दंड मिला है। सुचिता कुमारी, जो वर्तमान में औरंगाबाद के भू-अर्जन कार्यालय में राजस्व अधिकारी-सह-कानूनगो के पद पर तैनात हैं, पर फर्जी केवाला के आधार पर गलत दाखिल-खारिज करने का आरोप था। शिकायत में कहा गया था कि आपत्ति और साक्ष्य उपलब्ध कराने के बावजूद उन्होंने यह गड़बड़ी की। किशनगंज के जिला पदाधिकारी को सौंपी गई थी मामले की जांच इस मामले की जांच किशनगंज के जिला पदाधिकारी को सौंपी गई थी। किशनगंज समाहर्ता ने 29 अप्रैल 2025 को अपनी जांच रिपोर्ट विभाग को सौंपी। रिपोर्ट की समीक्षा के बाद, 19 जून 2025 को सुचिता कुमारी को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था। निलंबन के बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू की गई। “संचयी प्रभाव के बिना दो वेतन वृद्धि पर रोक” का दंड लगाया आरोप पत्र और किशनगंज समाहर्ता के मंतव्य की समीक्षा के बाद, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सुचिता कुमारी पर “संचयी प्रभाव के बिना दो वेतन वृद्धि पर रोक” का दंड लगाया है। यह मामला ठाकुरगंज प्रखंड की भातगांव पंचायत के मौजा भातगांव (तौजी संख्या 322, थाना संख्या 01) से संबंधित है। पीड़ित मोहम्मद कासमुद्दीन ने आरोप लगाया था कि उनके सौतेले भाई मो. जमील अख्तर ने फर्जी निबंधित केवाला बनाकर अंचल कार्यालय को गुमराह किया और जमीन का अवैध दाखिल-खारिज करवा लिया। अंचल कार्यालय में आवेदन दिया था कासमुद्दीन ने 29 नवंबर 2024 को दाखिल-खारिज रद्द करने के लिए अंचल कार्यालय में आवेदन दिया था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बजाय, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नामांतरण कर दिया गया। यह मामला तत्कालीन राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री संजय सरावगी तक पहुंचा, जिसके बाद उनके निर्देश पर उच्चस्तरीय जांच कराई गई। जांच में तत्कालीन सीओ सुचिता कुमारी दोषी पाई गईं। उन्हें पहले निलंबित किया गया था और अब विभागीय कार्रवाई पूरी होने के बाद दंडित किया गया है।

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