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चाईबासा पुलिस विभाग में सामने आए ट्रेजरी घोटाले के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में एक सिपाही सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। जांच में सामने आया है कि सिपाही देवनारायण मुर्मू ने वर्ष 2017 से 2025 के बीच लगभग 60 अलग-अलग लेनदेन के माध्यम से 27 लाख 21 हजार 717 रुपए की फर्जी निकासी की। यह राशि उसने अपने करीबी रिश्तेदारों और परिचितों के खातों में ट्रांसफर की थी। इस खुलासे के बाद पुलिस विभाग और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। मृत कर्मियों के नाम पर निकाली गई राशि आरोपी सिपाही ने कंप्यूटर डेटा में हेरफेर कर मृत पुलिसकर्मियों के वेतन, भत्ते और अन्य मदों से संबंधित राशि को अवैध तरीके से निकाला। इस प्रक्रिया में उसने छोटी-छोटी रकम निकालकर संदेह से बचने की कोशिश की। निकाली गई राशि को उसने अपने जीजा अरुण कुमार मार्डी, साला सरकार हेंब्रम और ओडिशा के मयूरभंज निवासी अपने मित्र गोराचांद मार्डी के बैंक खातों में स्थानांतरित किया। मामले में सभी आरोपियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। विभागीय जांच अभी जारी है। पिछले 10 वर्षों के रिकॉर्ड की होगी जांच घोटाले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त ने तत्काल प्रभाव से वेतन निकासी की प्रक्रिया को और सख्त कर दिया है। अब किसी भी कर्मचारी के वेतन भुगतान से पहले उसकी सेवा पुस्तिका, पद, जन्मतिथि और बैंक खाते का अनिवार्य सत्यापन किया जाएगा। इसके अलावा प्रत्येक बिल पर निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी के हस्ताक्षर और प्रमाणन भी जरूरी कर दिया गया है। प्रशासन ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वे पिछले 10 वर्षों के वेतन और बकाया मदों की निकासी की विस्तृत जांच करें। इस घोटाले के कारण कई कर्मियों का वेतन भुगतान भी प्रभावित हुआ है।

