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- Jharkhand Will Soon Sign A 1.24 Lakh Crore MoU, And The Government Will Also Seek Input From Companies On Industrial And Textile Policies.
रांची4 घंटे पहले
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झारखंड सरकार राज्य में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने में जुट गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की स्विटजरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच और यूनाइटेड किंगडम की यात्रा के दौरान मिले 1.24 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य सरकार जल्दी ही इन कंपनियों के साथ एमओयू करेगी।
इससे पहले उद्योग विभाग नई दिल्ली में स्टेक होल्डर निवेशकों के साथ राउंड टेबल बैठक करेगा इसमें राज्य की नई औद्योगिक और टेक्सटाइल नीति बनाने पर उनसे राय ली जाएगी। यह बैठक जून के अंतिम सप्ताह में होने की उम्मीद है। वहीं आईटी विभाग भी आईटी सेक्टर में बड़े निवेश को लेकर दिल्ली में कार्यक्रम करेगा। -शेष पेज 11 पर
पिछले साल होना था 15 एमओयू, 1 भी नहीं हुआ
सरकार ने पिछले साल 15 एमओयू की रूपरेखा तैयार की थी। इसमें करीब 31 हजार करोड़ रुपए पूंजी निवेश का प्रस्ताव था। करीब 20 हजार लोगों को रोजगार मिलता। लेकिन एक भी एमओयू नहीं हुआ। एमओयू एसएम स्टील एंड पावर, वोल्टोक्स रेल, एसएम स्टील एंड पावर, एसएम स्टील एंड पावर, इंडियन स्टील एंड वायर, गजानन फेरो, जय सस्पेंसन,अल्ट्राटेक सीमेंट, रामकृष्णा फोर्जिंग, सुप्रीम मेटल्स एक्सपोर्ट, स्कीसीआरपी वेंचर, बीएमडब्ल्यू इंडस्ट्री और रश्मि मेटालिक्स के साथ होना था।
बिहार से अच्छी औद्योगिक नीति बनाने की तैयारी
झारखंड सरकार बिहार से बेहतर औद्योगिक नीति (औद्योगिक व निवेश प्रोत्साहन नीति) बनाने में जुटी है। पिछले साल दिसंबर में विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह ने उद्योग विभाग के साथ समीक्षा बैठक में बिहार से बेहतर नीति बनाने का निर्देश दिया था। अभी बिहार की औद्योगिक नीति को काफी बेहतर माना जा रहा है। बिहार में अगस्त 2025 में औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज लागू हुआ था। उसमें निवेशकों को कई सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है। झारखंड के अधिकारी उसका अध्ययन करने में जुटे हैं।
कब कितने एमओयू…
वर्ष एमओयू
2015 11
2016 05
2017 241
2018 18
2019 14
2020 02
2021 03
2022 03
2023 03
2024 16
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दावोस और यूके यात्रा के दौरान मिले थे निवेश के प्रस्ताव
2015 से 2024 के बीच 316 एमओयू : राज्य में 2015 से 2024 तक कुल 316 एमओयू हुए थे। इनमें 2015 से 2021 के बीच हुए एमओयू में 60 प्रतिशत में कोई काम ही शुरू नहीं हुआ वहीं 2004 से 2014 के बीच 74 एमओयू हुए थे। इनमें सरकार ने 24 कंपनियों का एमओयू रद्द कर दिया था।



