जांच व्यवस्था होगी हाईटेक, सेमी ऑटोमेटिक मशीनें हटेंगी स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में फुल ऑटोमेटिक पैथोलॉजी मशीनें लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि 15 जून तक मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में नई मशीनें लगा दी जाएगीं। बुधवार को अपर मुख्य सचिव के कार्यालय में पैथोलॉजी मशीन बनाने वाली मेरिल कंपनी ने मशीनों का लाइव डेमो दिया। कंपनी के अनुसार, राज्य के अस्पतालों में पहले से लगी सेमी ऑटोमेटिक मशीनों को हटाकर नई फुल ऑटोमेटिक मशीनें लगाई जाएंगी। इन मशीनों की यह विशेषता है कि एक बार में 50 सैंपलों की जांच की जा सकेगी। कंपनी 10 वर्षों तक मशीनों की मेंटेनेंस भी करेगी। जानिए… मरीजों को क्या होगा फायदा : नई मशीनों के लगने से मरीजों को जांच के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यूरिन और ब्लड से जुड़ी लगभग सभी महत्वपूर्ण पैथोलॉजी जांचें कम समय में हो सकेंगी। जांच रिपोर्ट सीधे मरीज के मोबाइल पर व्हाट्सएप के माध्यम से भेजी जाएगी, जिससे अस्पताल के बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी। दूसरे चरण में सीएचसी और पीएचसी तक होगा विस्तार: अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि पहले चरण में सभी मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में मशीनें स्थापित की जाएं। इसके बाद दूसरे चरण में इनका विस्तार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर तक किया जाएगा।
राज्य के अस्पतालों में 15 जून तक ऑटोमेटिक पैथौलॉजी मशीनें लगेंगी
जांच व्यवस्था होगी हाईटेक, सेमी ऑटोमेटिक मशीनें हटेंगी स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में फुल ऑटोमेटिक पैथोलॉजी मशीनें लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि 15 जून तक मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में नई मशीनें लगा दी जाएगीं। बुधवार को अपर मुख्य सचिव के कार्यालय में पैथोलॉजी मशीन बनाने वाली मेरिल कंपनी ने मशीनों का लाइव डेमो दिया। कंपनी के अनुसार, राज्य के अस्पतालों में पहले से लगी सेमी ऑटोमेटिक मशीनों को हटाकर नई फुल ऑटोमेटिक मशीनें लगाई जाएंगी। इन मशीनों की यह विशेषता है कि एक बार में 50 सैंपलों की जांच की जा सकेगी। कंपनी 10 वर्षों तक मशीनों की मेंटेनेंस भी करेगी। जानिए… मरीजों को क्या होगा फायदा : नई मशीनों के लगने से मरीजों को जांच के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यूरिन और ब्लड से जुड़ी लगभग सभी महत्वपूर्ण पैथोलॉजी जांचें कम समय में हो सकेंगी। जांच रिपोर्ट सीधे मरीज के मोबाइल पर व्हाट्सएप के माध्यम से भेजी जाएगी, जिससे अस्पताल के बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी। दूसरे चरण में सीएचसी और पीएचसी तक होगा विस्तार: अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि पहले चरण में सभी मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में मशीनें स्थापित की जाएं। इसके बाद दूसरे चरण में इनका विस्तार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर तक किया जाएगा।


