बक्सर में सम्राट चौधरी के दौरे के दौरान किला मैदान में उनके हेलीकॉप्टर का धूल और मिट्टी के कारण लैंड न कर पाना अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। इस घटना के बाद सांसद सुधाकर सिंह ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन पर निशाना साधा है। सांसद सुधाकर सिंह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक लंबी पोस्ट साझा की। उन्होंने कहा कि जिस किला मैदान की धूल ने मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर को उतरने नहीं दिया, उसी धूल को बक्सर की जनता वर्षों से अपने फेफड़ों में भरने को मजबूर है। उन्होंने आगे कहा कि शायद पहली बार सत्ता की नजर उस बदहाल व्यवस्था पर पड़ी होगी, जिसे आम लोग रोज झेलते हैं। किला मैदान को बताया सांस्कृतिक धड़कन अपनी पोस्ट में सुधाकर सिंह ने किला मैदान को बक्सर शहर की सामाजिक और सांस्कृतिक धड़कन बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मैदान केवल खेलकूद का स्थल नहीं है, बल्कि हजारों लोगों की दिनचर्या और शहर की पहचान से जुड़ा हुआ है। प्रतिदिन सुबह यहां बुजुर्ग, युवा, महिलाएं और बच्चे वॉकिंग, दौड़ और व्यायाम करने आते हैं। खिलाड़ी भी इसी मैदान में अपने सपनों को साकार करते हैं। इसके अतिरिक्त, दशहरा के समय ऐतिहासिक रामलीला का आयोजन भी इसी मैदान में होता है। सरकार की प्राथमिकताओं में कभी शामिल नहीं रहा मैदान सांसद ने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकताओं में किला मैदान कभी शामिल नहीं रहा। उन्होंने यह भी बताया कि चुनाव के समय भी उन्होंने किला मैदान के सुनियोजित विकास और सौंदर्यीकरण की बात उठाई थी, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। सुधाकर सिंह ने मांग की कि किला मैदान को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि मैदान में बेहतर रनिंग ट्रैक, खिलाड़ियों के लिए आवश्यक सुविधाएं, हरियाली, बैठने की समुचित व्यवस्था और नियमित रखरखाव होना चाहिए। इससे आम लोग सम्मानपूर्वक सुबह-शाम वहां समय बिता सकेंगे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार की संवेदनशीलता शायद तभी जागती है जब असुविधा सीधे सत्ता तक पहुंचती है। उन्होंने लिखा कि आज हेलीकॉप्टर नहीं उतर पाया तो पहली बार एहसास हुआ होगा कि बक्सर की जनता किन परिस्थितियों में जीवन जी रही है। इस घटना के बाद शहर में किला मैदान की बदहाल स्थिति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि वर्षों से मैदान में धूल, असमान जमीन और रखरखाव की कमी की समस्या बनी हुई है।
किला मैदान की धूल पर सियासत तेज:हेलीकॉप्टर नहीं उतरने के बाद सांसद सुधाकर सिंह ने सोशल मीडिया पर किया पोस्ट
बक्सर में सम्राट चौधरी के दौरे के दौरान किला मैदान में उनके हेलीकॉप्टर का धूल और मिट्टी के कारण लैंड न कर पाना अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। इस घटना के बाद सांसद सुधाकर सिंह ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन पर निशाना साधा है। सांसद सुधाकर सिंह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक लंबी पोस्ट साझा की। उन्होंने कहा कि जिस किला मैदान की धूल ने मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर को उतरने नहीं दिया, उसी धूल को बक्सर की जनता वर्षों से अपने फेफड़ों में भरने को मजबूर है। उन्होंने आगे कहा कि शायद पहली बार सत्ता की नजर उस बदहाल व्यवस्था पर पड़ी होगी, जिसे आम लोग रोज झेलते हैं। किला मैदान को बताया सांस्कृतिक धड़कन अपनी पोस्ट में सुधाकर सिंह ने किला मैदान को बक्सर शहर की सामाजिक और सांस्कृतिक धड़कन बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मैदान केवल खेलकूद का स्थल नहीं है, बल्कि हजारों लोगों की दिनचर्या और शहर की पहचान से जुड़ा हुआ है। प्रतिदिन सुबह यहां बुजुर्ग, युवा, महिलाएं और बच्चे वॉकिंग, दौड़ और व्यायाम करने आते हैं। खिलाड़ी भी इसी मैदान में अपने सपनों को साकार करते हैं। इसके अतिरिक्त, दशहरा के समय ऐतिहासिक रामलीला का आयोजन भी इसी मैदान में होता है। सरकार की प्राथमिकताओं में कभी शामिल नहीं रहा मैदान सांसद ने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकताओं में किला मैदान कभी शामिल नहीं रहा। उन्होंने यह भी बताया कि चुनाव के समय भी उन्होंने किला मैदान के सुनियोजित विकास और सौंदर्यीकरण की बात उठाई थी, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। सुधाकर सिंह ने मांग की कि किला मैदान को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि मैदान में बेहतर रनिंग ट्रैक, खिलाड़ियों के लिए आवश्यक सुविधाएं, हरियाली, बैठने की समुचित व्यवस्था और नियमित रखरखाव होना चाहिए। इससे आम लोग सम्मानपूर्वक सुबह-शाम वहां समय बिता सकेंगे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार की संवेदनशीलता शायद तभी जागती है जब असुविधा सीधे सत्ता तक पहुंचती है। उन्होंने लिखा कि आज हेलीकॉप्टर नहीं उतर पाया तो पहली बार एहसास हुआ होगा कि बक्सर की जनता किन परिस्थितियों में जीवन जी रही है। इस घटना के बाद शहर में किला मैदान की बदहाल स्थिति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि वर्षों से मैदान में धूल, असमान जमीन और रखरखाव की कमी की समस्या बनी हुई है।

