अररिया के सदर प्रखंड में झमटा और बटुरबाड़ी पंचायत के बीच भलुआ नदी के नव्वा पाखर घाट पर पुल न होने से स्थानीय ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लंबे समय से पुल निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन प्रशासन की अनदेखी के कारण हजारों लोग प्रभावित हैं। स्थानीय निवासियों मोहम्मद मंजर आलम, मोहम्मद अतहर आलम और वजीर आलम सहित दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के मौसम में नदी में पानी बढ़ने पर आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है। झमटा से बटुरबाड़ी जाने के लिए मात्र आधा किलोमीटर की दूरी तय करने के बजाय लोगों को नौ किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। किसानों के लिए सामान ढोना कठीन इस स्थिति के कारण छात्रों की पढ़ाई, मरीजों का इलाज और किसानों के लिए सामान ढोना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों ओर सड़कें बन चुकी हैं, लेकिन पुल के अभाव में पूरी व्यवस्था अधर में लटकी हुई है। उनके अनुसार, इस पुल के निर्माण से लगभग 15 पंचायतों के एक लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। फैसल जावेद यासीन ने कहा कि यह केवल पुल बनाने का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास और जनता के मौलिक अधिकारों का सवाल है। वर्षों से लंबित इस मांग को लेकर ग्रामीणों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। पुल नहीं बनने पर करेंगे आंदोलन ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पुल निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो वे व्यापक आंदोलन करने को मजबूर होंगे। स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर कई बार ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीण अब जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से तुरंत हस्तक्षेप की अपील कर रहे हैं ताकि इस समस्या का समाधान हो सके।
अररिया में भलुआ नदी पर पुल का इंतजार:हजारों ग्रामीणों को 9 किमी का चक्कर, आंदोलन की दी चेतावनी
अररिया के सदर प्रखंड में झमटा और बटुरबाड़ी पंचायत के बीच भलुआ नदी के नव्वा पाखर घाट पर पुल न होने से स्थानीय ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लंबे समय से पुल निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन प्रशासन की अनदेखी के कारण हजारों लोग प्रभावित हैं। स्थानीय निवासियों मोहम्मद मंजर आलम, मोहम्मद अतहर आलम और वजीर आलम सहित दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के मौसम में नदी में पानी बढ़ने पर आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है। झमटा से बटुरबाड़ी जाने के लिए मात्र आधा किलोमीटर की दूरी तय करने के बजाय लोगों को नौ किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। किसानों के लिए सामान ढोना कठीन इस स्थिति के कारण छात्रों की पढ़ाई, मरीजों का इलाज और किसानों के लिए सामान ढोना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों ओर सड़कें बन चुकी हैं, लेकिन पुल के अभाव में पूरी व्यवस्था अधर में लटकी हुई है। उनके अनुसार, इस पुल के निर्माण से लगभग 15 पंचायतों के एक लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। फैसल जावेद यासीन ने कहा कि यह केवल पुल बनाने का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास और जनता के मौलिक अधिकारों का सवाल है। वर्षों से लंबित इस मांग को लेकर ग्रामीणों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। पुल नहीं बनने पर करेंगे आंदोलन ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पुल निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो वे व्यापक आंदोलन करने को मजबूर होंगे। स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर कई बार ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीण अब जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से तुरंत हस्तक्षेप की अपील कर रहे हैं ताकि इस समस्या का समाधान हो सके।


