सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के प्राथमिक शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) पास करने के लिए समय-सीमा एक साल बढ़ा दी है। अब ऐसे शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टेट पास करना होगा, वरना उनकी सेवा समाप्त हो जाएगी। झारखंड में ऐसे करीब 40 हजार शिक्षक हैं, जिन्होंने टेट पास नहीं की है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि अब समय-सीमा बढ़ाने की किसी भी अर्जी पर विचार नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने 65 से अधिक पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। साथ ही याचिकाकर्ताओं के उस तर्क को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के संशोधन को उन शिक्षकों पर लागू नहीं किया जा सकता, जिनकी नियुक्ति इस कानून के बनने से पहले हुई है। कोर्ट ने कहा कि शिक्षकों की नौकरी की सुरक्षा बच्चों के भविष्य की कीमत पर नहीं हो सकती। सुनवाई के दौरान राज्य सरकारों ने चिंता जताई थी कि अगर इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों को अयोग्य घोषित कर दिया गया तो शिक्षा व्यवस्था चरमरा जाएगी। राज्यों को आदेश-साल में दो बार हो टेट सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिक्षकों को टेट पास करने के लिए पूरा मौका मिलना चाहिए। इसलिए राज्य सरकारें नियमित रूप से साल में दो बार टेट का आयोजन करें। ताकि शिक्षक से आसानी से पूरा कर सके।
शिक्षकों के टेट पास करने की समय-सीमा 1 साल बढ़ी
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के प्राथमिक शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) पास करने के लिए समय-सीमा एक साल बढ़ा दी है। अब ऐसे शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टेट पास करना होगा, वरना उनकी सेवा समाप्त हो जाएगी। झारखंड में ऐसे करीब 40 हजार शिक्षक हैं, जिन्होंने टेट पास नहीं की है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि अब समय-सीमा बढ़ाने की किसी भी अर्जी पर विचार नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने 65 से अधिक पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। साथ ही याचिकाकर्ताओं के उस तर्क को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के संशोधन को उन शिक्षकों पर लागू नहीं किया जा सकता, जिनकी नियुक्ति इस कानून के बनने से पहले हुई है। कोर्ट ने कहा कि शिक्षकों की नौकरी की सुरक्षा बच्चों के भविष्य की कीमत पर नहीं हो सकती। सुनवाई के दौरान राज्य सरकारों ने चिंता जताई थी कि अगर इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों को अयोग्य घोषित कर दिया गया तो शिक्षा व्यवस्था चरमरा जाएगी। राज्यों को आदेश-साल में दो बार हो टेट सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिक्षकों को टेट पास करने के लिए पूरा मौका मिलना चाहिए। इसलिए राज्य सरकारें नियमित रूप से साल में दो बार टेट का आयोजन करें। ताकि शिक्षक से आसानी से पूरा कर सके।


