धर्म महासम्मेलन में शामिल विश्व भर से पहुंचे अनुयायी। सिटी रिपोर्टर | बोकारो आनंद मार्ग प्रचारक संघ की ओर से आनंद नगर पुंदाग में आयोजित आनंद मार्ग धर्म महासम्मेलन का शुभारंभ प्रभात संगीत, कीर्तन और सामूहिक ध्यान के साथ हुआ। सम्मेलन में देश-विदेश से आए हजारों मार्गियों और आध्यात्मिक साधकों ने भाग लिया। यह आयोजन आनंद मार्ग के संस्थापक श्री आनंदमूर्ति के आध्यात्मिक एवं सामाजिक दर्शन को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। मुख्य वक्ता आचार्य विकासानंद अवधूत ने कहा कि ईश्वर की प्राप्ति केवल कठोर साधना या विद्वता से नहीं, बल्कि सच्चे भाव, प्रेम और समर्पण से होती है। जैसे माता-पिता अपनी सभी संतानों को समान दृष्टि से देखते हैं, वैसे ही ईश्वर भी सभी जीव को बिना किसी भेदभाव के समान प्रेम करते हैं। उन्होंने बताया कि ज्ञान महत्वपूर्ण है, लेकिन अहंकार से जुड़ा ज्ञान व्यक्ति को उलझा सकता है, जबकि सरल हृदय और निष्कपट आस्था ईश्वर के निकट ले जाती है। सम्मेलन में आध्यात्मिक प्रवचनों के साथ मानव कल्याण, सामाजिक सेवा, नैतिक शिक्षा और वैश्विक भाईचारे जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। आयोजन ने वसुधैव कुटुंबकम् की भावना को सशक्त करते हुए विभिन्न देशों और संस्कृतियों से आए लोगों को एक मंच पर जोड़ा। इस अवसर पर आनंद मार्ग की सांस्कृतिक शाखा रेनशा के प्रभात संगीत पर आधारित सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया, जिसने आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक जीवंत बना दिया। सम्मेलन के आगामी सत्रों में भी विश्वभर से आए मार्गियों की सहभागिता जारी रहेगी।
आस्था .विश्वस्तरीय धर्म महासम्मेलन में पहुंचे देश-विदेश से अनुयायी:ईश्वर की प्राप्ति सच्चे प्रेम व समर्पण से ही संभव: आचार्य
धर्म महासम्मेलन में शामिल विश्व भर से पहुंचे अनुयायी। सिटी रिपोर्टर | बोकारो आनंद मार्ग प्रचारक संघ की ओर से आनंद नगर पुंदाग में आयोजित आनंद मार्ग धर्म महासम्मेलन का शुभारंभ प्रभात संगीत, कीर्तन और सामूहिक ध्यान के साथ हुआ। सम्मेलन में देश-विदेश से आए हजारों मार्गियों और आध्यात्मिक साधकों ने भाग लिया। यह आयोजन आनंद मार्ग के संस्थापक श्री आनंदमूर्ति के आध्यात्मिक एवं सामाजिक दर्शन को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। मुख्य वक्ता आचार्य विकासानंद अवधूत ने कहा कि ईश्वर की प्राप्ति केवल कठोर साधना या विद्वता से नहीं, बल्कि सच्चे भाव, प्रेम और समर्पण से होती है। जैसे माता-पिता अपनी सभी संतानों को समान दृष्टि से देखते हैं, वैसे ही ईश्वर भी सभी जीव को बिना किसी भेदभाव के समान प्रेम करते हैं। उन्होंने बताया कि ज्ञान महत्वपूर्ण है, लेकिन अहंकार से जुड़ा ज्ञान व्यक्ति को उलझा सकता है, जबकि सरल हृदय और निष्कपट आस्था ईश्वर के निकट ले जाती है। सम्मेलन में आध्यात्मिक प्रवचनों के साथ मानव कल्याण, सामाजिक सेवा, नैतिक शिक्षा और वैश्विक भाईचारे जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। आयोजन ने वसुधैव कुटुंबकम् की भावना को सशक्त करते हुए विभिन्न देशों और संस्कृतियों से आए लोगों को एक मंच पर जोड़ा। इस अवसर पर आनंद मार्ग की सांस्कृतिक शाखा रेनशा के प्रभात संगीत पर आधारित सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया, जिसने आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक जीवंत बना दिया। सम्मेलन के आगामी सत्रों में भी विश्वभर से आए मार्गियों की सहभागिता जारी रहेगी।


