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Aaj Ka Panchang: आज 10 अक्टूबर 2026 शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या है. आज पितृ पक्ष का अंतिम श्राद्ध किया जाएगा. अमावस्या रात 9:19 बजे तक रहेगी, लेकिन श्राद्ध का समय रात तक नहीं है. इसके लिए कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल का महत्व है. जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि मालूम नहीं है, उनका श्राद्ध भी आज किया जा सकता है.
शनिवार को अमावस्या होने से आज शनिश्चरी अमावस्या भी है. दिन की योजना बनाते समय सुबह के राहुकाल और दोपहर के श्राद्ध समय को अलग समझें. रात में प्रतिपदा शुरू होगी, लेकिन केवल तिथि बदलते ही नवरात्रि की घटस्थापना करने का निर्णय न लें.
आज का पंचांग एक नजर में
वार- शनिवार
पूर्णिमांत मास- आश्विन
अमांत मास- भाद्रपद
पक्ष- कृष्ण पक्ष
तिथि- अमावस्या, रात 9:19 बजे तक; फिर शुक्ल प्रतिपदा
नक्षत्र- हस्त, रात 9:42 बजे तक; फिर चित्रा
योग- इंद्र, रात लगभग 10:02 बजे तक; फिर वैधृति
सूर्य और चंद्र राशि- कन्या
सूर्योदय- सुबह 6:18 बजे
सूर्यास्त- शाम 5:57 बजे
राहुकाल- सुबह 9:13 से 10:40 बजे
अमावस्या रात तक है, तो श्राद्ध कब करें?
आज की सबसे जरूरी बात यही है. तिथि समाप्त होने का समय और श्राद्ध करने का समय एक नहीं हैं. रात 9:19 बजे तक अमावस्या रहने का अर्थ यह नहीं कि श्राद्ध रात में करना चाहिए.
श्राद्ध का काल समय
- कुतुप मुहूर्त सुबह 11:44 से दोपहर 12:31 बजे
- रौहिण मुहूर्त दोपहर 12:31 से 1:17 बजे
- अपराह्न काल दोपहर 1:17 से 3:37 बजे
इन समयों का आधार दिल्ली-NCR के दिनमान का विभाजन है. दूसरी गणनाओं में लगभग एक मिनट का अंतर है. अनुष्ठान का क्रम और समय परिवार की परंपरा के अनुसार पुरोहित से तय करें.
मृत्यु तिथि नहीं मालूम, तो आज किसका श्राद्ध करें?
सर्वपितृ अमावस्या उन परिवारों के लिए भी महत्वपूर्ण है जिन्हें पूर्वज की मृत्यु तिथि याद नहीं है. पितृ पक्ष में निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं कर पाए हों, तो भी आज श्राद्ध का विधान बताया गया है.
ध्यान रखें कि यहां मृत्यु तिथि से आशय चंद्र पंचांग की तिथि है. अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख को सीधे श्राद्ध तिथि न मानें. पुराने मृत्यु विवरण उपलब्ध हों तो उनसे तिथि निकलवाई जा सकती है. जानकारी अधूरी हो तो अनुमान लगाने के बजाय उपलब्ध विवरण पुरोहित को बताएं.
शनिश्चरी और सर्वपितृ अमावस्या में क्या अंतर है?
आज अमावस्या शनिवार को पड़ रही है, इसलिए इसे शनिश्चरी अमावस्या कहा जाएगा. वहीं, आश्विन कृष्ण अमावस्या पितृ पक्ष का समापन करती है, इसलिए यह सर्वपितृ अमावस्या है. दोनों नाम एक ही दिन के अलग संदर्भ बताते हैं.
शनि पूजा और पितरों के निमित्त श्राद्ध अलग धार्मिक कर्म हैं. शनि पूजा करने को श्राद्ध का विकल्प न समझें. इसी तरह इस संयोग के आधार पर अपने आप धन लाभ या किसी राशि की किस्मत बदलने का दावा करना उचित नहीं होगा.
आज रात कब बदलेगा पंचांग?
– रात 9:19 बजे: अमावस्या समाप्त होगी और शुक्ल प्रतिपदा शुरू होगी.
– रात 9:42 बजे: हस्त नक्षत्र के बाद चित्रा लगेगा.
– रात लगभग 10:02 बजे: इंद्र योग के बाद वैधृति शुरू होगा.
सुबह चतुष्पाद करण करीब 9:24 बजे तक रहेगा. इसके बाद नाग करण और अमावस्या समाप्त होने पर किंस्तुघ्न करण शुरू होगा. चंद्रमा कन्या राशि में रहेगा.
आज का राहुकाल और शुभ समय
दिल्ली-NCR में राहुकाल सुबह 9:13 से 10:40 बजे, गुलिक काल सुबह 6:18 से 7:46 बजे और यमगण्ड दोपहर 1:35 से 3:02 बजे तक है. अभिजीत मुहूर्त स्थानीय गणनाओं में करीब 11:44 से 12:31 बजे मिलता है.
अपराह्न श्राद्ध काल का कुछ हिस्सा यमगण्ड से मिल रहा है. केवल सामान्य शुभ-अशुभ समय की तालिका देखकर निर्धारित श्राद्ध काल को रद्द न मानें. श्राद्ध का निर्णय उसके अपने धार्मिक नियमों से करें. विवाह या गृह प्रवेश के लिए भी सिर्फ अभिजीत मुहूर्त पर्याप्त नहीं है.
आज की 3 जरूरी बातें
1. सर्वपितृ श्राद्ध के लिए दोपहर के निर्धारित समय की योजना बनाएं.
2. मृत्यु तिथि अज्ञात हो या श्राद्ध छूट गया हो, तो आज के विधान के अनुसार निर्णय लें.
3. रात में प्रतिपदा शुरू होना अपने आप घटस्थापना का मुहूर्त नहीं है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

