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Angarki Sankashti Kab Hai: 29 सितंबर को एक साथ अंगारकी संकष्टी और महाभरणी, क्यों खास है ये दिन?

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Angarki Sankashti 2026: 29 सितंबर 2026 का दिन हिंदू पंचांग के अनुसार खास है. इस दिन एक तरफ भगवान गणेश को समर्पित अंगारकी संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा, तो दूसरी तरफ पितृ पक्ष का विशेष महाभरणी श्राद्ध भी होगा. यानी एक ही दिन गणपति की पूजा और पितरों के निमित्त श्राद्ध-तर्पण का अवसर मिल रहा है. हालांकि दोनों का समय और पूजा-विधि अलग है.

29 सितंबर को क्यों है अंगारकी संकष्टी?

हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है. जब यह चतुर्थी मंगलवार को पड़ती है, तो इसे अंगारकी संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है. 29 सितंबर को मंगलवार है और इस दिन विघ्नराज संकष्टी भी है. इसलिए यह विघ्नराज संकष्टी, अंगारकी संकष्टी के रूप में मनाई जाएगी.

पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि 29 सितंबर को शाम 5:09 बजे शुरू होगी और 30 सितंबर को दोपहर 2:55 बजे समाप्त होगी. दिल्ली में संकष्टी के दिन चंद्रोदय करीब शाम 7:44 बजे होगा. संकष्टी व्रत में चंद्र दर्शन और अर्घ्य के बाद व्रत खोलने की परंपरा है.

इसी दिन महाभरणी श्राद्ध भी

29 सितंबर की दूसरी बड़ी विशेषता महाभरणी है. पितृ पक्ष के दौरान जब भरणी नक्षत्र अपराह्न काल में रहता है, तब भरणी श्राद्ध किया जाता है. इसे ही महाभरणी श्राद्ध कहा जाता है.

2026 में भरणी नक्षत्र 29 सितंबर सुबह 9:03 बजे शुरू होगा और 30 सितंबर सुबह 7:36 बजे तक रहेगा. इसलिए पितृ पक्ष का महाभरणी श्राद्ध 29 सितंबर को किया जाएगा.

भरणी नक्षत्र का संबंध यम देव से माना जाता है. इसी कारण पितृ पक्ष में इस नक्षत्र की मौजूदगी को पितरों के श्राद्ध के लिए विशेष माना गया है. महाभरणी पर तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और जरूरतमंदों को अन्न या वस्त्र दान करने की परंपरा है. श्राद्ध के लिए कुतुप, रौहिण और उसके बाद का अपराह्न काल प्रमुख माना जाता है.

क्या दोनों पूजा एक ही समय करनी चाहिए?

नहीं. एक ही तारीख होने का अर्थ यह नहीं है कि दोनों कर्म एक साथ किए जाएं. महाभरणी श्राद्ध दिन के अपराह्न काल में किया जाता है, जबकि संकष्टी की गणेश पूजा शाम को और चंद्रोदय के समय प्रमुख होती है.

इसलिए 29 सितंबर का क्रम भी साफ है, दिन में पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण किया जा सकता है, जबकि शाम को भगवान गणेश की पूजा कर चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाएगा.

यही बात 29 सितंबर 2026 को खास बनाती है. एक ही दिन पितरों के स्मरण से जुड़ी महाभरणी और विघ्नहर्ता गणेश की अंगारकी संकष्टी पड़ रही है. धार्मिक दृष्टि से दोनों की अपनी अलग परंपरा और महत्व है; इन्हें मिलाकर कोई नई पूजा या संयुक्त अनुष्ठान करने का विधान नहीं है.

FAQ

29 सितंबर 2026 को कौन सी संकष्टी है?
29 सितंबर को विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी है. मंगलवार होने के कारण इसे अंगारकी संकष्टी कहा जाएगा.

महाभरणी श्राद्ध 2026 कब है?
2026 में महाभरणी श्राद्ध 29 सितंबर को किया जाएगा.

अंगारकी संकष्टी का व्रत कब खोला जाता है?
संकष्टी का व्रत रात में चंद्र दर्शन और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद खोला जाता है.

क्या महाभरणी श्राद्ध और गणेश पूजा एक साथ करनी चाहिए?
नहीं. महाभरणी श्राद्ध अपराह्न में होता है, जबकि संकष्टी की मुख्य पूजा और चंद्र अर्घ्य शाम को होता है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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