Bihar Rajya Sabha Election | RJD Leader Disappear, MLA Vote Drama

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बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए सोमवार को मतदान हो रहा है। इस बीच NDA ने खेला कर दिया है। महागठबंधन के 4 विधायक गायब हो गए हैं। वे वोट डालने के लिए विधानसभा परिसर नहीं पहुंचे हैं।

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विधायकों के गायब होने से राजद प्रत्याशी अमरेंद्र धारी सिंह की जीत मुश्किल हो गई है। उन्हें जीत तभी मिलेगी जब महागठबंधन के सभी विधायक और AIMIM और बसपा के विधायक पक्ष में वोट करें।

कांग्रेस के 3 और राजद के एक विधायक के गायब होने से काफी समय बाद साथ आए तेजस्वी और ओवैसी का सारा खेल बिगड़ गया है।

मतदान से पहले महागठबंधन के कौन से विधायक गायब हुए? कहां के हैं? क्या प्रोफाइल है? क्यों पाला बदल सकते हैं? पढ़िए रिपोर्ट…।

वोटिंग के बाद विक्ट्री साइन दिखाते डिप्टी सीएम और NDA विधायक।

वोटिंग के बाद विक्ट्री साइन दिखाते डिप्टी सीएम और NDA विधायक।

1- सुरेंद्र प्रसादः पहली बार विधायक बने, NDA से लड़ चुके हैं चुनाव

सुरेंद्र प्रसाद पश्चिम चंपारण जिला के वाल्मीकिनगर से पहली बार विधायक चुने गए हैं। कांग्रेस पार्टी से हैं। 2015 में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी RLSP (अब RLM) से NDA की तरफ से चुनाव लड़ चुके हैं। तब हार गए थे।

कुशवाहा समाज से आते हैं। 2025 विधानसभा चुनाव में सुरेंद्र ने JDU के धीरेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ ​​रिंकू सिंह को 1,675 वोटों से हराया है।

क्यों बदला पाला?

सुरेंद्र प्रसाद को उपेंद्र कुशवाहा के काफी करीबी नेता माने जाते हैं। 2015 में सुरेंद्र को टिकट देने के लिए उपेंद्र ने यह सीट भाजपा से ली थी।

हालांकि, तब भितरघात से सुरेंद्र चुनाव हार गए थे। उसके बाद उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और कांग्रेस में चले आए।

सुरेंद्र प्रसाद का बड़ा कारोबार है। रेलवे का ठेका, लव-कुश बस और पेट्रोल पंप है। जब तक वह विधायक नहीं थे तब तक ज्यादा दिक्कत नहीं थी।

चुनाव में महागठबंधन की बुरी तरह हार हुई है। ऐसे में अगले 5 साल तक इलाके में काम करने के लिए शासन-प्रशासन की मदद की जरूरत होगी। यह तभी संभव है जब वह पाला बदलें।

2- मनोज विश्वासः JDU-RJD से पुराना नाता, चुनाव से पहले कांग्रेस में आए

कांग्रेस के मनोज विश्वास फारबिसगंज से पहली बार विधायक बने हैं। 38 साल के मनोज RJD से कांग्रेस में आए हैं। केवट मतलब EBC समाज से आते हैं। मनोज विश्वास ने भाजपा के विद्या सागर केशरी को 221 वोटों से हराया है।

क्यों बदला पाला? मनोज पहले भी पार्टी बदलते रहे हैं। इनका पॉलिटिकल करियर JDU से शुरू हुआ। 5 साल JDU में रहने के बाद 2018 में RJD में शामिल हुए। 7 साल रहे और चुनाव से ठीक पहले अक्टूबर 2025 में कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस ने सिंबल दिया और चुनाव जीत गए।

फारबिसगंज सीट पर भाजपा का दबदबा रहा है। पिछले 6 में से 5 चुनाव भाजपा जीती है। आगे की राजनीति के लिए NDA के साथ रहना मजबूरी है।

3- मनोहर प्रसाद सिंहः नीतीश के कहने पर कांग्रेस में गए थे

कांग्रेस के मनोहर प्रसाद सिंह मनिहारी से चौथी बार विधायक बने हैं। वह JDU के पुराने नेता हैं। IPS अफसर से रिटायरमेंट के बाद 2005 में JDU से जुड़े। 2010 में JDU के टिकट पर चुनाव जीते थे।

2015 विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार महागठबंधन (RJD+JDU+CONG) के साथ लड़े। तब मनिहारी सीट कांग्रेस के खाते में चली गई।

बताया जाता है कि तब नीतीश कुमार ने मनोहर प्रसाद को कांग्रेस में शामिल होने को कहा और कांग्रेस से सिंबल दिलवाया। तब से मनोहर प्रसाद कांग्रेस से चुनाव लड़े और जीते।

एक्सपर्ट बताते हैं कि नीतीश कुमार के एक इशारे पर मनोहर प्रसाद कांग्रेस छोड़कर JDU में शामिल हो सकते हैं।

4 विधायकों के गायब होने के बीच भास्कर से बातचीत में तेजस्वी ने महागठबंधन की जीत का दावा किया है।

4 विधायकों के गायब होने के बीच भास्कर से बातचीत में तेजस्वी ने महागठबंधन की जीत का दावा किया है।

4- फैसल रहमान: 178 वोटों से जीते थे चुनाव

राजद के फैसल रहमान 2025 के विधानसभा चुनाव में पूर्वी चंपारण जिले के ढाका सीट से जीते थे। उन्हें सिर्फ 178 वोटों से जीत मिली। उनकी जीत को भाजपा प्रत्याशी पवन जायसवाल ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनपर फर्जी वोटों के सहारे चुनाव जीतने का आरोप लगाया है।

क्यों बदला पाला?

10वीं पास फैसल रहमान कोर्ट-कचहरी के चक्कर से परेशान हैं। भाजपा सांसद दुबे ने लोकसभा में SIR पर चर्चा करते हुए 9 दिसंबर को फैसल पर विदेश में बैठे लोगों के फर्जी वोट डलवाने के आरोप लगाए। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि फैसल को अपनी विधायकी जाने का डर है। वह राहत की उम्मीद में पाला बदल सकते हैं।

अब महागठबंधन के 4 विधायकों के वोटिंग से गायब होने का क्या होगा असर?

बिहार में राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए एक उम्मीदवार को कम से कम 41 वोटों की जरूरत थी। महागठबंधन के चार विधायक गायब हो गए। अगर वे शाम चार बजे तक वोट नहीं डालते हैं तो स्थिति बदल जाएगी।

राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत है, ये पहले से ही तय है। वोटों की संख्या के कैलकुलेशन के लिए चुनाव आयोग ड्रॉप कोटा फॉर्मूले को लागू करता है।

ड्रॉप कोटा फॉर्मूला: कोटा (Q) = ⌊ कुल वैध वोट / (सीटें + 1)।

अगर महागठबंधन के 4 विधायक वोट नहीं करते हैं तो 243-4=237 वोट होगा। तब एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए कितने वोट चाहिए, इस फॉर्मूले को समझिए…

Q= 237/ (5=1)= 39.5 मतलब 40

5 सीटें जीतने के लिए कुल वोट चाहिए: 5×40=200

NDA के विधायक: 202 वोट

मतलब NDA को सभी 5 सीटें आसानी से मिल जाएंगी। उसके पास 202 विधायक हैं।

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रास चुनाव से जुड़ीं ये खबरें भी पढ़िए….

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