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Bokaro Student Dies Saving Friend

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बोकारो में रील्स बनाने का शौक एक छात्र की जान ले बैठा, जबकि उसका दोस्त गंभीर रूप से झुलस गया। घटना रेलवे के प्रतिबंधित हंप यार्ड की है, जहां सात दोस्तों का समूह वीडियो और सेल्फी बनाने पहुंचा था। इसी दौरान चास निवासी अभिमन्यु बनर्जी खाली ऑयल टैंकर पर

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रील्स के जुनून में वह यह भूल गया कि उसके ऊपर 25 हजार वोल्ट का हाईटेंशन तार गुजर रहा है। जैसे ही उसने हाथ ऊपर उठाया, वह करंट की चपेट में आ गया और बुरी तरह झुलस गया।

दोस्त को बचाने के चक्कर में बारी-कोऑपरेटिव निवासी कौशिक शर्मा की जान चली गई।

दोस्त को बचाने में गई जान, मौके पर मौत

अभिमन्यु को करंट से छटपटाते देख उसका साथी बारी-कोऑपरेटिव निवासी कौशिक शर्मा (16) उसे बचाने दौड़ा, लेकिन वह भी हाईटेंशन तार की चपेट में आ गया। हादसा इतना भयावह था कि कौशिक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अभिमन्यु गंभीर रूप से घायल होकर पटरियों के बीच जा गिरा।

सूचना मिलते ही आरपीएफ की टीम मौके पर पहुंची। दोनों को तत्काल बोकारो जनरल अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने कौशिक को मृत घोषित कर दिया, जबकि अभिमन्यु का इलाज जारी है।

हादसा इतना भयावह था कि कौशिक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अभिमन्यु गंभीर रूप से घायल होकर पटरियों के बीच जा गिरा।

प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसे थे सभी छात्र

बताया जा रहा है कि सभी सातों छात्र रेलवे के प्रतिबंधित क्षेत्र में रील्स बना रहे थे। रेलवे यार्ड, लोको शेड और ट्रैक के किनारे आम लोगों के लिए पूरी तरह निषिद्ध होते हैं। इसके बावजूद यहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने से छात्र आसानी से अंदर पहुंच गए।

रेलवे एक्ट की धारा 147 के तहत ऐसे क्षेत्रों में अवैध प्रवेश पर 6 महीने तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। इस घटना ने एक बार फिर रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के मुताबिक सात युवाओं की टोली रील्स बनाने गई थी।

आरपीएफ ने शुरू की जांच, दोस्तों से पूछताछ जारी

आरपीएफ की एसआई अरुणा उरांव ने बताया कि सात दोस्त रील्स बनाने के लिए हंप यार्ड पहुंचे थे। इनमें मृतक कौशिक शर्मा के अलावा अभिमन्यु चटर्जी, आदित्य राज, सुयश सिंह, शिवराज सहाय, नफीस आलम और सक्षम कुमार शामिल हैं।

घटना के बाद बाकी पांच छात्रों से पूछताछ की जा रही है। पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। कौशिक के पिता की पहले ही मौत हो चुकी है, वह अपनी विधवा मां का इकलौता सहारा था।

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