![]()
खगड़िया में जिलाधिकारी विक्रम विरकर ने भूमि विवादों के त्वरित और निष्पक्ष निपटारे तथा अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर एक समीक्षा बैठक की। गुरुवार को समाहरणालय सभाकक्ष में हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक मुस्लिम परित्यक्ता एवं तलाकशुदा महिला सहायता योजना की प्रगति पर भी चर्चा की गई। बैठक में अपर समाहर्ता, सभी अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ), अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ), सभी अंचलाधिकारी (सीओ) और सभी थाना प्रभारी उपस्थित थे। इस दौरान जिले के विभिन्न अंचलों और थानों में लंबित तथा नए भूमि विवाद संबंधी मामलों की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली गई। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को भूमि विवाद से जुड़े मामलों का त्वरित, निष्पक्ष और विधिसम्मत निष्पादन सुनिश्चित करने का स्पष्ट निर्देश दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि समय पर कार्रवाई न होने से विवाद बढ़ते हैं और कानून-व्यवस्था प्रभावित होती है। उन्होंने राजस्व और पुलिस विभाग को आपसी समन्वय के साथ प्रत्येक मामले की नियमित समीक्षा करने तथा संवेदनशील मामलों पर विशेष निगरानी रखने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि शिकायतों का समयबद्ध, पारदर्शी और निष्पक्ष निपटारा हो, ताकि आम नागरिकों को शीघ्र न्याय मिल सके और जिले में शांति बनी रहे। भूमि विवादों की समीक्षा के बाद, जिलाधिकारी ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने विशेष रूप से मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक मुस्लिम परित्यक्ता एवं तलाकशुदा महिला सहायता योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया और निर्देश दिया कि अधिक से अधिक पात्र महिलाओं तक इस योजना का लाभ पहुंचाया जाए। जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी चंदन कुमार ने बताया कि बिहार सरकार की इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर अल्पसंख्यक मुस्लिम परित्यक्ता एवं तलाकशुदा महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है। योजना के तहत पात्र लाभार्थी महिलाओं को ₹25,000 की एकमुश्त अनुदान राशि सीधे उनके आधार से लिंक बैंक खाते में भेजी जाती है।
उन्होंने बताया कि योजना का लाभ 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की ऐसी अल्पसंख्यक मुस्लिम महिलाओं को मिलेगा, जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय ₹4 लाख से कम हो। परित्यक्ता महिला की श्रेणी में ऐसी महिला शामिल होगी, जिसका विवाह हो चुका हो, लेकिन पति द्वारा उसे दो वर्ष या उससे अधिक समय से छोड़ दिया गया हो तथा उसके भरण-पोषण की कोई व्यवस्था नहीं की जा रही हो। इसके अलावा यदि पति पूर्ण मानसिक दिव्यांगता के कारण परिवार के पालन-पोषण में असमर्थ है, तो ऐसी महिला भी योजना की पात्र होगी।
इसी प्रकार तलाकशुदा महिला की श्रेणी में ऐसी महिला शामिल होगी, जिसे उसके पति द्वारा तलाक दिया गया हो तथा उसके जीवन-यापन की समुचित व्यवस्था उपलब्ध नहीं हो। ऐसी महिलाएं भी योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन कर सकती हैं।
ये दस्तावेज होंगे आवश्यक
योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदन के साथ सक्षम प्राधिकार द्वारा निर्गत परित्यक्ता अथवा तलाकशुदा होने का अनुशंसा प्रमाण-पत्र, आयु प्रमाण-पत्र, आय प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड, आधार से लिंक बैंक खाते की पासबुक की स्व-अभिप्रमाणित छायाप्रति तथा स्वघोषणा-पत्र संलग्न करना अनिवार्य है। स्वघोषणा-पत्र पर दो ऐसे गवाहों के हस्ताक्षर एवं मोबाइल नंबर दर्ज होने चाहिए, जो महिला के निकट संबंधी न हों।
डीडीसी की अध्यक्षता में होगा लाभुकों का चयन
बैठक में बताया गया कि पात्र लाभार्थियों के चयन एवं योजना की निगरानी के लिए उप विकास आयुक्त (डीडीसी) की अध्यक्षता में जिला स्तरीय चयन समिति गठित है। समिति द्वारा चयनित लाभुकों की सूची के आधार पर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के निदेशालय द्वारा अनुदान राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाती है।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी विक्रम विरकर ने जिले की सभी पात्र अल्पसंख्यक मुस्लिम परित्यक्ता एवं तलाकशुदा महिलाओं से अपील की कि वे आवश्यक दस्तावेजों के साथ समय पर आवेदन करें और बिहार सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत मिलने वाली ₹25,000 की एकमुश्त आर्थिक सहायता का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाएं।

