
पटना. कैमूर वन्यजीव अभयारण्य में बाघों समेत सभी प्रमुख वन्यजीवों की मौजूदगी और उनकी संख्या का पता लगाने के लिए जनवरी 2026 से 90 दिनों की गणना की गयी थी. साथ ही बिहार सरकार की ओर से संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी देने के बाद आगे प्रक्रिया के लिए यह प्रस्ताव राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) को भेजा जा चुका है. एनसीटीए से पहले ही इसे सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है.
नये साल मंजूरी मिलने की संभावना
कैमूर वन्यजीव अभयारण्य में 11 जनवरी 2026 से शुरू हुई गणना करीब 90 दिनों तक चलने के लिए निर्धारित की गयी थी. 19 साल बाद करायी जा रही इस व्यापक गणना में शाकाहारी और मांसाहारी, दोनों श्रेणियों के वन्यजीवों को शामिल किया गया था. इसके लिए ऑल इंडिया टाइगर एस्टिमेशन कार्यक्रम के निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत साइन सर्वे, ट्रांजिट वॉक और कैमरा ट्रैप जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया. भारतीय वन्यजीव संस्थान और एनटीसीए के विशेषज्ञ भी इस प्रक्रिया से जुड़े थे. गणना के निष्कर्ष वन्यजीवों की स्थिति और संरक्षण की जरूरतों का आकलन करने में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.
संशोधित प्रस्ताव को राज्य सरकार से मिल चुकी है मंजूरी
इससे पहले दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में राज्य सरकार ने कैमूर वन्यजीव अभयारण्य को टाइगर रिजर्व बनाने के संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. उस समय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री ने बताया था कि प्रस्ताव को केंद्र सरकार के पास अंतिम स्वीकृति के लिए भेजा गया है. पहले प्रस्ताव में तकनीकी कमियां बतायी गयी थीं, जिन्हें संशोधित प्रस्ताव में दूर करने की बात कही गयी.
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1500 वर्ग किलोमीटर में फैला है वन्यजीव अभयारण्य
कैमूर और रोहतास जिलों में फैला यह अभयारण्य बिहार के सबसे बड़े संरक्षित वन क्षेत्रों में शामिल है. करीब 1500 वर्ग किलोमीटर के इस वन क्षेत्र में तेंदुआ, भालू, सांभर, चीतल और कई अन्य वन्यजीव पाए जाते हैं. यहां बाघों के अनुकूल प्राकृतिक आवास और वन्यजीव गलियारों की मौजूदगी को भी महत्वपूर्ण माना जाता है. टाइगर रिजर्व बनने से बाघों के संरक्षण, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा और नियंत्रित ईको-टूरिज्म को बढ़ावा मिल सकता है.
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