Thursday, June 18, 2026

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JDU विधायक पप्पू पांडेय की बेल पिटीशन पर सुनवाई:वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा-FIR की डेट-टाइम के साथ 'हेरफेर', पुलिस कार्रवाई पर सवाल


गोपालगंज के व्यवहार कोर्ट में जदयू विधायक अमरेंद्र कुमार पाण्डेय उर्फ पप्पू पांडेय, उनके भाई सतीश पांडेय और सीए राहुल तिवारी से जुड़े मामले ने कानूनी मोड़ ले लिया है। एडीजे-3 की अदालत में बुधवार को हुई जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने पुलिसिया कार्रवाई और प्राथमिकी (FIR) की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए। वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने एडीजे-3 की अदालत में पैरवी की मामले की गंभीरता को देखते हुए, बचाव पक्ष सीए राहुल तिवारी की ओर से पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश दीक्षित और गोपालगंज सिविल कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश कुमार पाठक ने एडीजे-3 की अदालत में पैरवी की। अधिवक्ताओं ने दलील दी कि यह पूरा मामला राजनीति से प्रेरित है और विरोधियों को फंसाने की सुनियोजित साजिश के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। बचाव पक्ष ने पुलिस की कागजी कार्रवाई को बनाया आधार बचाव पक्ष ने पुलिस की कागजी कार्रवाई में मौजूद विसंगतियों को मुख्य आधार बनाया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि गिरफ्तारी मेमो, जब्ती सूची और प्राथमिकी दर्ज करने के समय में काफी अंतर है, जो पुलिस की कहानी में विरोधाभास दर्शाता है। पुलिस ने जो रिकॉर्ड तैयार किया, अब खुद उसे झुठला रहा पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश दीक्षित ने अदालत के बाहर मीडिया से बात की। उन्होंने बताया कि अदालत को विस्तार से समझाया गया है कि कैसे प्राथमिकी की तारीख और समय के साथ ‘हेरफेर’ किया गया है। दीक्षित ने कहा, “गिरफ्तारी मेमो में दिखाई गई तारीख और समय, जब्ती सूची के समय से मेल नहीं खाते। पुलिस ने जो रिकॉर्ड तैयार किया है, वह खुद अपनी ही कहानी को झुठला रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि यह स्पष्ट करता है कि ऐसी कोई घटना वास्तव में हुई ही नहीं थी, बल्कि इसे केवल कागजों पर ‘तैयार’ किया गया है। बचाव पक्ष ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन पर राजनीतिक दबाव के कारण प्रक्रियात्मक खामियां छोड़ी गई हैं, जिससे यह मामला कमजोर होता है। इस मामले में अब अगली सुनवाई 28 अप्रैल को निर्धारित की गई है। एडीजे-3 की अदालत ने मामले को ‘ऑर्डर’ पर रख दिया दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एडीजे-3 की अदालत ने फिलहाल इस मामले को ‘ऑर्डर’ पर रख दिया है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी। गैर-जमानती वारंट निर्गत होने के बाद से ही यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। चूंकि इसमें सत्ताधारी दल के विधायक और उनके करीबियों का नाम शामिल है, इसलिए स्थानीय प्रशासन और कानून व्यवस्था के लिहाज से भी यह फैसला अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब 28 तारीख को होने वाली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि कोर्ट इन दलीलों को किस आधार पर स्वीकार करती है और आरोपियों को राहत मिलती है या कानूनी प्रक्रिया और सख्त होती है।

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