रांची21 घंटे पहलेलेखक: रितु लकड़ा
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विदेशों में आकर्षक नौकरी छोड़ रांची लौटे दो उद्यमियों ने बेकरी कारोबार में अपनी अलग पहचान बनाई है। दुबई, मस्कट, सऊदी अरब और लंदन में काम करने के बाद गोडविन लकड़ा और प्रीति साहू ने नौकरी की बजाय अपना व्यवसाय शुरू करने का फैसला लिया। शुरुआती दौर में पूंजी की कमी और बैंक से ऋण नहीं मिलने जैसी चुनौतियां आईं, लेकिन दोनों ने हार नहीं मानी।
आज इनके बेकरी आउटलेट, क्लाउड किचन और उत्पादन इकाइयों में दर्जनों लोगों को रोजगार मिल रहा है। दोनों युवाओं, खासकर महिलाओं को बेकिंग का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार से भी जोड़ रहे हैं। उनका कहना है कि रांची में बेकरी उद्योग की अपार संभावनाएं हैं। बढ़ती मांग के कारण यह क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है। आज दोनों उद्यमी अपने कारोबार से सालाना लाखों रुपए का टर्नओवर हासिल कर रहे हैं।
फाइव स्टार नौकरी के बाद गोडविन ने रांची में तीन बेकरी आउटलेट और एक फैक्ट्री खोली, 100 लोगों को दे चुके हैं बेकिंग का प्रशिक्षण डिबडीह निवासी गोडविन लकड़ा ने विदेशों के फाइव स्टार होटलों की नौकरी छोड़कर रांची में बेकरी कारोबार की शुरुआत की और आज उनका उद्यम कई लोगों को रोजगार दे रहा है। होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई के बाद उन्होंने दुबई, मस्कट और सऊदी अरब में बेकरी शेफ के रूप में काम किया।
वर्ष 2018 में रांची लौटने के बाद उन्होंने 2019 में अपनी बचत से घर से ही बेकरी का काम शुरू किया। शुरुआती दिनों में बैंक से ऋण नहीं मिला और पूंजी की कमी भी रही, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। वर्ष 2023 में व्यवसाय विस्तार के लिए ऋण लिया। आज उनके तीन बेकरी आउटलेट, एक फैक्ट्री और 15 सदस्यीय टीम है। वे बताते हैं कि क्रिसमस, शादी और अन्य आयोजनों में केक की मांग सबसे अधिक रहती है, जिससे इस क्षेत्र में रोजगार की अच्छी संभावनाएं हैं। गोडविन अब तक 80 से 100 लोगों, विशेषकर महिलाओं, को बेकिंग का प्रशिक्षण देकर उन्हें होम बेकिंग और स्वरोजगार से जोड़ चुके हैं।
13 क्लाउड किचन व 3 आउटलेट की संचालिका हैं प्रीति साहू, बेकरी की ऑनलाइन ट्रेनिंग भी देती हैं बोकारो की प्रीति साहू कभी लंदन में माइक्रोबायोलॉजिस्ट के रूप में कार्यरत थीं, लेकिन वीजा एक्सटेंशन नहीं मिलने के कारण वर्ष 2012 में उन्हें पति के साथ भारत लौटना पड़ा। रांची आने के बाद उन्होंने वर्ष 2014 में अपना बेकरी व्यवसाय शुरू किया। वर्ष 2017 में अरगोड़ा में पहला बेकरी आउटलेट खोला।

आज उनके तीन बेकरी शॉप और 13 क्लाउड किचन चल रहे हैं, जहां करीब 25 लोगों की टीम काम कर रही है। कारोबार के विस्तार के लिए उन्होंने बैंक से ऋण भी लिया। प्रीति बताती हैं कि उनका पारिवारिक माहौल व्यवसाय से जुड़ा रहा, इसलिए उन्होंने भी इसी क्षेत्र में आगे बढ़ने का निर्णय लिया। वे क्लाउड किचन से जुड़ी महिलाओं के लिए ऑनलाइन और बेकरी कर्मचारियों के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण भी आयोजित करती हैं। आज उनका बेकरी कारोबार सालाना लाखों रुपये का टर्नओवर हासिल कर रहा है।



