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Magadh University Cancels PhD Entrance Exam; UGC-NET Score Basis

मगध यूनिवर्सिटी ने शैक्षणिक सत्र 2024 और 2025 के लिए पीएचडी कार्यक्रमों में नामांकन को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा निर्णय लिया है। यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट की ओर से जारी ताजा अधिसूचना के अनुसार, आगामी सत्रों के लिए पूर्व में घोषित पीएचडी प्रवेश परीक

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अब यूनिवर्सिटी स्तर पर कोई अलग से प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। इसके बजाय, अब यूजीसी-नेट (UGC-NET) के स्कोर को ही एडमिशन का मुख्य आधार बनाया जाएगा।

राजभवन और उच्च शिक्षा विभाग के नए निर्देशों के बाद पुराने विज्ञापन को वापस ले लिया गया है।

राजभवन और उच्च शिक्षा विभाग के नए निर्देशों के बाद पुराने विज्ञापन को वापस ले लिया गया है।

यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार की ओर से जारी किया गया आधिकारिक पत्र

यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार की ओर से जारी आधिकारिक पत्र के मुताबिक, ये निर्णय लोक भवन, बिहार के निर्देश (पत्र संख्या: BSU(Directive)43/2023 (Part-2) 1068, दिनांक 02-06-2026) और यूजीसी के पत्र (संख्या: F.4-1 (UGC-NET Review Committee)/2024(NET)/140648, 28-03-2024) के तहत लिया गया है।

इस नए नियम के तहत शैक्षणिक सत्र 2024 और 2025 के छात्रों को सीधे उनके नेट स्कोर के आधार पर शॉर्टलिस्ट किया जाएगा।

​आवेदन प्रक्रिया वापस, फीस होगी रिफंड

इससे पहले यूनिवर्सिटी ने पैट-2024 (PAT-2024) परीक्षा के लिए फॉर्म भरने की अधिसूचना (पत्र संख्या: CEO/713/26, दिनांक 13-04-2026) जारी की थी, जिसके तहत परीक्षा फॉर्म भरने की प्रक्रिया चल रही थी। लेकिन राजभवन और उच्च शिक्षा विभाग के नए निर्देशों के बाद पुराने विज्ञापन को वापस ले लिया गया है और जारी प्रक्रिया को पूरी तरह निरस्त कर दिया गया है।

​इस फैसले से उन सैकड़ों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिलेगी जिन्होंने परीक्षा के लिए आवेदन किया था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन अभ्यर्थियों ने पैट-2024 के लिए परीक्षा शुल्क जमा कर दिया था, उनका पूरा पैसा जल्द से जल्द उनके संबंधित बैंक खातों में रिफंड कर दिया जाएगा।

​कुलपति के आदेश पर जारी हुआ निर्देश

यह आदेश कुलपति के निर्देश पर जारी किया गया है। इसकी प्रतियां बिहार के राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव,मगध विश्वविद्यालय के सभी स्नातकोत्तर विभागों के अध्यक्षों, छात्र कल्याण अध्यक्ष, नोडल अधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी गई हैं। विश्वविद्यालय के इस कदम से अब पीएचडी में पारदर्शिता व राष्ट्रीय मानकों का पालन सुनिश्चित हो सकेगा।

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