Wednesday, June 3, 2026

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NEET छात्रा मौत-पप्पू यादव ने दो नेताओं के नाम लिए:पूछा- कौन है संजय, कौन है गुप्ता, जल्द पूरे सबूत सार्वजनिक करूंगा, सुप्रीम कोर्ट जाऊंगा


पूर्णिया सांसद पप्पू ने पटना में NEET छात्रा की मौत के मामले में एक बार फिर गंभीर आरोप लगाए हैं। फेसबुक लाइव के जरिए उन्होंने इस मामले को आत्महत्या नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से हत्या बताया। सांसद ने कहा, “NEET छात्रा की मौत आत्महत्या नहीं है, साजिश के तहत प्रभात मेमोरियल और कुछ प्रशासन के लोगों ने मेरी बेटी को मारा है। मैं यह केस सुप्रीम कोर्ट तक लड़ूंगा।” पप्पू यादव ने बिहार के गृह मंत्री सम्राट चौधरी से CCTV फुटेज की जांच की मांग की। साथ ही कहा कि प्रभात मेमोरियल अस्पताल और कुछ प्रशासनिक लोगों की भूमिका की जांच होनी चाहिए और वे इस केस को सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे। इतना ही नहीं उन्होंने बोरिंग रोड के नागेश्वर कॉलोनी में रहने वाले “संजय” नाम के एक नेता और “गुप्ता” नाम के एक अन्य व्यक्ति का जिक्र किया, लेकिन पूरा नाम नहीं बताया। पप्पू यादव ने कहा- सम्राट चौधरी भाई को कौन भूमिहार का नेता बदनाम करना चाहता था। बोरिंग रोड के नागेश्वर कॉलोनी में कौन से ऐसे नेता हैं जिनका नाम संजय है- अंतिम नाम नहीं बोलूंगा- जिसका घर खगड़िया है। कौन है एक गुप्ता..? जैसे संजय के बाद का नाम नहीं बोला, वैसे ही गुप्ता के पहले का नाम नहीं बोलूंगा। इनके ऑफिस में कौन-कौन जाता था, इन सभी के CCTV फुटेज की जांच करिए। क्या उसमें मनीष रंजन गए थे या नहीं। पप्पू यादव ने कहा कि मनीष रंजन राजनीतिज्ञों के सप्लायर हैं और एपस्टन के नायक हैं। सांसद ने कहा कि वो जल्द ही नीट मामले के सारे सबूत सार्वजनिक करेंगे। पूरे मामले का दस्तावेज के साथ पर्दाफाश करंगे। डॉक्टरों ने छात्रा को नशे में रखने वाली सुई दी पप्पू यादव ने कहा कि यह पूरा मामला पटना में हुए एक बड़े षड्यंत्र की तरफ इशारा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रा को इलाज के दौरान नशे में रखने वाली सुइयां दी गईं। उनका दावा है कि उनके पास इसके सबूत मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि बच्ची को संदिग्ध ओपिओइड पॉइजनिंग का मामला बताया गया, लेकिन समय पर जरूरी टेस्ट और एंटीडोट नहीं दिया गया। सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि बिना परिवार की अनुमति के प्रेग्नेंसी टेस्ट कराया गया। रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद सबूत मिटाने के लिए गलत दवाइयां देने का भी आरोप लगाया। उन्होंने प्रभात मेमोरियल और मेदांता समेत अन्य मेडिकल संस्थानों पर प्रोटोकॉल का पालन न करने का आरोप लगाया। सांसद ने दावा किया, “छात्रा को लगातार सेडेटिव और Kitmex 50mg इंजेक्शन दिए गए, जबकि वह पहले से ही बेहोशी की हालत में थी। एंटीडोट देने के बजाय सेडेटिव देकर हालत बिगाड़ी गई।” बाद में फेंटेनिल इंजेक्शन दिए जाने पर भी उन्होंने सवाल उठाए और ICU में दी गई दवाओं का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की। जांच एजेंसियों पर भी उठाए सवाल उन्होंने कहा कि SIT और CID की जांच कमजोर नहीं थी, बल्कि सिस्टम ने उसे कमजोर बनाया। जब मामला CBI को सौंपा गया तो कुछ लोगों में बेचैनी क्यों दिखी, इसकी भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने Bihar Police, CID और SIT की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की। जेल में साजिश और प्रताड़ना का आरोप पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि जेल में उनके खिलाफ साजिश रची गई। उन्होंने कहा कि 28 घंटे तक उन्हें ऐसी जगह रखा गया जहां सांप और चूहे थे। 6 से 13 तारीख के बीच उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। उन्होंने जेल सुपरिटेंडेंट के फोन रिकॉर्ड और CCTV फुटेज की जांच की मांग की। उन्होंने दावा किया कि 7 दिनों तक वे डर के कारण ठीक से सो नहीं सके और प्रशासन उन पर झूठा आरोप लगाने की साजिश कर सकता था। उन्होंने कोर्ट में वीडियोग्राफी की मांग पहले ही कर दी थी। अंत में पप्पू यादव ने कहा कि यह सिर्फ मेडिकल लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक साजिश भी हो सकती है। उन्होंने हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ने की बात कही और दोषियों के नाम सार्वजनिक कर सख्त कार्रवाई की मांग की। CBI का SIT से सवाल- परिवार आपकी जांच से संतुष्ट क्यों नहीं है NEET छात्रा मौत मामले में CBI की जांच का आज चौथा दिन है। सबसे पहले CBI ने SIT से पूरी रिपोर्ट ली है। SIT से ये सवाल किए गए कि परिवार आपकी जांच से संतुष्ट क्यों नहीं है? जांच के बड़े लूप होल्स क्या है? सबसे पहले बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट के पुलिस टीम ने रेप न होने की बात किस आधार पर कह दी? यही नहीं CBI ने यह भी पूछा कि अभी तक मनीष रंजन की रिमांड लेकर उससे पूछताछ क्यों नहीं की गई? इसके बाद सोमवार को चित्रगुप्त नगर थाना में पोस्टेड महिला सब इंस्पेक्टर रीना कुमारी को बुलाया गया। करीब दो घंटे तक उनसे इस केस के बारे में सवाल-जवाब किए गए। वो इस केस को लेकर क्या जानती हैं? क्या जांच टीम में वो शामिल थीं? अगर शामिल थीं तो वो कौन-कौन से जगह पर जांच करने गईं? उस दरम्यान उनके सामने कौन से तथ्य आए थे? पुलिस जांच में लापरवाही बरतने और आरोपियों को बचाने के लगाए गए परिवार के आरोप कितने सही हैं? ऐसे कई सवाल थे, जिनका जवाब CBI की टीम जानना चाहती है। यह सिलसिला अभी चलता रहेगा। CBI एक–एक करके थाने अन्य पुलिस अधिकारयों से अलग–अलग पूछताछ करेगी।

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