Monday, July 27, 2026

Breaking
News

🕒

Latest
Updates

🔔

Stay
Informed

Top 5 This Week

Related Posts

Relief from line loss and long power cuts

रांची19 घंटे पहलेलेखक: कौशल आनंद

  • कॉपी लिंक

जेबीवीएनएल ने ट्रांसमिशन निगम को भेजा प्रस्ताव; ग्रिड से सबस्टेशन की दूरी 35 किमी से घटकर 12 किमी होगी रांची में निर्बाध 24×7 बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) ने बड़ा कदम उठाया है। निगम ने शहर में छह नए 132/33 केवी जीआईएस ग्रिड बनाने का प्रस्ताव ट्रांसमिशन निगम को भेजा है।

मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। नए ग्रिड बनने से ग्रिड और पावर सब-स्टेशनों के बीच की दूरी कम होगी, जिससे लाइन लॉस, वोल्टेज ड्रॉप, ब्रेकडाउन और लंबे समय तक पावर कट की समस्याओं में कमी आएगी।

वर्तमान में नामकुम, हटिया, कांके और स्मार्ट सिटी जीआईएस ग्रिड से जुड़े कई 33/11 केवी पावर सब-स्टेशन 30 से 35 किलोमीटर दूर हैं, जबकि तकनीकी मानकों के अनुसार यह दूरी लगभग 12 किमी. होनी चाहिए। रांची में हर वर्ष मार्च से मई के दौरान आंधी-तूफान के कारण 33 केवी फीडरों में सबसे अधिक खराबी आती है। वायर टूटने या पेड़ गिरने के बाद फॉल्ट खोजने और मरम्मत में कई घंटे लग जाते हैं, जिससे बिजली आपूर्ति प्रभावित होती है। बिजली अधिकारियों के अनुसार इसकी मुख्य वजह ग्रिड और पावर सब-स्टेशनों के बीच अत्यधिक दूरी होना है।

इन 6 स्थानों पर बनेंगे नए ग्रिड, प्रत्येक की क्षमता 200 एमवीए जेबीवीएनएल ने कुसई, रिम्स डॉक्टर कॉलोनी/ बूटी पानी टंकी पहाड़, नामकुम के सरवल, हटिया के दसमाइल, इटकी और कांके के नावा सोसो क्षेत्र में नए जीआईएस ग्रिड बनाने का प्रस्ताव दिया है। इन ग्रिडों से आसपास के सब-स्टेशनों को निकटतम स्रोत से बिजली मिलेगी और लंबी 33 केवी लाइनों पर निर्भरता कम होगी। वहीं ग्रिड से सब स्टेशन की दूरी अधिक होने से लाइन लॉस बढ़ता है, वोल्टेज ड्रॉप होता है और खराब मौसम में फॉल्ट की आशंका भी बढ़ जाती है। इसी समस्या को दूर करने के लिए छह नए जीआईएस ग्रिड प्रस्तावित किए गए हैं। प्रत्येक ग्रिड 200 एमवीए क्षमता का होगा, जिसमें 50-50 एमवीए के चार पावर ट्रांसफॉर्मर लगाए जाएंगे।

50 साल में शहर बढ़ा, ग्रिड नहीं चार पुराने ग्रिड पर ही पूरा लोड फिलहाल रांची की बिजली आपूर्ति चार ग्रिडों हटिया, नामकुम, कांके और स्मार्ट सिटी जीआईएस ग्रिड पर निर्भर है। हटिया ग्रिड 1973-74 और नामकुम ग्रिड 1987-88 में स्थापित हुए थे। बढ़ते लोड को देखते हुए 2013 में कांके ग्रिड और बाद में स्मार्ट सिटी जीआईएस ग्रिड शुरू किया गया। जब हटिया ग्रिड बना था, तब शहर में केवल 4-5 पावर सब-स्टेशन थे, जबकि आज इनकी संख्या 60 से अधिक हो चुकी है। इसके बावजूद ग्रिडों की संख्या लगभग नहीं बढ़ी, जिससे दबाव लगातार बढ़ता गया।

ग्रिड से सब स्टेशन की दूरी अधिक होना बिजली आपूर्ति में बड़ी बाधा ग्रिड से पावर सब-स्टेशनों की दूरी निर्बाध बिजली आपूर्ति में सबसे बड़ी तकनीकी बाधाओं में से एक है। इसी दूरी को कम करने के लिए रांची में छह नए जीआईएस ग्रिड का प्रस्ताव ट्रांसमिशन निगम को भेजा गया है। स्थान भी चिह्नित कर लिए गए हैं। मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। इनके बन जाने से लाइन लॉस में भी बहुत कमी आएगी। -मनमोहन कुमार, महाप्रबंधक, रांची, जेबीवीएनएल

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles