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Success Story : पटना के विवेक ने छोड़ी होटल मैनेजमेंट की नौकरी, 15 एकड़ में मछली पालन कर ऐसे बदल दी 20 लोगों की किस्मत

पटना से सविता कुमारी की रिपोर्ट

पटना जिले के बेलछी के विवेक कुमार ने होटल मैनेजमेंट का कोर्स करने के बाद नौकरी के बजाय मछली पालन को चुना. आज मेहनत और नई तकनीक के दम पर बेलछी प्रखंड के मुर्तजापुर गांव निवासी विवेक कुमार ने मत्स्य पालन को अपनी पहचान बना लिया है. वह 15 एकड़ तालाब में तिलापिया, कतला, ग्रास और नैनी जैसी मछलियों का उत्पादन कर रहे हैं.

20 से अधिक लोगों को दे रहे रोजगार

सबसे खास बात यह है कि इससे 20 से अधिक लोगों को रोजगार दे रहे हैं. वह बताते हैं कि 45 मीट्रिक टन तक एक बार में मछली का उत्पादन करते हैं और सारी मछलियां लोकल मार्केट में ही खपत हो जाती है. वह साल 2018-19 में विभागीय योजना से करीब 5 एकड़ जलक्षेत्र विकसित कर नर्सरी, रियरिंग और संचय तालाब बनाया. अब 15 एकड़ में मछली उत्पादन के साथ स्थानीय बाजारों में ताजा मछली की बिक्री कर रहे हैं.

पड़ोसी से प्रेरणा लेकर शुरू किया मत्स्य पालन

विवेक कुमार ने अपने पड़ोसी अश्विनी कुमार से प्रेरणा लेकर मत्स्य पालन शुरू किया. फार्म के संचालन के लिए कृषि कनेक्शन लिया, जिससे मोटर पंप चलाने का खर्च कम हुआ. विभागीय प्रशिक्षण के तहत कोलकाता के बैरकपुर स्थित सिफरी संस्थान में मत्स्य पालन की तकनीक सीखी. प्रशिक्षण के दौरान नैहटी के संजय चटर्जी से संपर्क हुआ, जिनसे फार्म संचालन में सहयोग मिला.

पंगेशियस के साथ उन्नत प्रजातियों का पालन

विवेक ने करीब दो एकड़ में कम समय में अधिक वृद्धि वाली पंगेशियस मछली का पालन शुरू किया. इसके अलावा जयंती रोहू, इम्प्रूव्ड कतला और ऑमूर के इयरलिंग का संचय कर उत्पादन बढ़ाने का प्रयास किया. स्थानीय मांग का आकलन कर सकसोहरा, बेलछी, बाढ़ और हरनौत के बाजारों में दोपहिया व तीनपहिया वाहनों से ताजी मछली उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने लगे। इससे स्थानीय युवाओं को भी रोजगार मिला.

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स्वनिर्मित आहार से घटाई लागत

ब्रांडेड मत्स्य आहार महंगा होने के कारण राइस ब्रान, मक्का, मछली का चूर्ण, सरसों खल्ली और सोयाबीन से स्वनिर्मित आहार तैयार करते हैँ. इससे लागत कम करने में मदद मिलती है. तालाबों में नियमित चूना, पोटेशियम परमैग्नेट और सीफेक्स का प्रयोग कर मछलियों को रोगमुक्त रखने का प्रयास करते हैं. विभागीय इनपुट योजना का भी लाभ प्राप्त किया है. विवेक के फार्म बिहार के मत्स्य पालकों के लिए मॉडल है. मत्स्य पालकों को प्रशिक्षण के लिए यही लाया जाता है.

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