
कोलकाता/नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस के नाम और चिन्ह पर प्रतिबंध मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में हुई सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से पूछा कि तृणमूल कांग्रेस के नाम और चिन्ह किस पार्टी के हैं, इस मुद्दे को अंतिम रूप से सुलझाने में कितना समय लगेगा.
'मामले को लंबा न खींचें'
इसी दिन, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने चुनाव आयोग के वकील डीएस नायडू को समय पता करने का निर्देश दिया. कहा गया, "इससे बात करके पता लगाइए कि इसमें कितना समय लगेगा." मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की, "मामले को लंबा न खींचें."
अगली सुनवाई सोमवार को
इस मामले की अगली सुनवाई सोमवार को है. उस दिन ममता बनर्जी के वकील कपिल सिब्बल ने एक आवेदन दाखिल करते हुए कहा, "हम अभी चुनाव प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं चाहते. लेकिन, अक्टूबर में होने वाले नगर निगम चुनावों से पहले इस मामले का निपटारा हो जाना चाहिए."
आयोग के अंतिम आदेश का इंतजार
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने ममता बनर्जी का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील कपिल सिब्बल के बयान को महत्व नहीं दिया. उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. दोनों पार्टियों ने अपने नामांकन दाखिल कर दिए हैं. उन्हें अलग-अलग चुनाव चिन्ह मिले हैं. हमें आयोग के अंतिम आदेश का इंतजार करना चाहिए. मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले का निपटारा कब होगा, यह तय करने का कानूनी अधिकार आयोग के पास है.
बार-बार मांगा जा रहा है समय
कपिल सिब्बल ने उस दिन दलील दी कि ममता बनर्जी की तृणमूल पार्टी ने सभी दस्तावेज 2 जुलाई को जमा कर दिए थे. लेकिन विपक्षी खेमे ने बार-बार समय मांगा है. उन्होंने कहा, "चुनाव प्रक्रिया के दौरान यह फैसला क्यों लिया गया? आयोग ने पहले फैसला क्यों नहीं लिया? सर्वोच्च न्यायालय को यह तय करने दें कि क्या यह अंतरिम आदेश कानून के अनुसार सही है.
चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग नहीं
हम मौजूदा चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग नहीं कर रहे हैं, लेकिन आयोग को अक्टूबर तक इस विवाद को सुलझाने का निर्देश दिया जाना चाहिए. आयोग को आम चुनाव से पहले इस मामले को सुलझाना चाहिए." इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "आप भी जुलाई-अगस्त में सुप्रीम कोर्ट आ सकते थे."
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विवाद के समाधान में लगता है समय
रीतब्रत तृणमूल का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता मुकुल रोहतोगी ने कहा, "इस विवाद के समाधान में समय लगता है. हमने शिवसेना और एनसीपी के मामलों में देखा है. आयोग को इस तरह समय सीमा नहीं दी जा सकती. इस मामले में समय दिया जाना चाहिए." महत्वपूर्ण बात यह है कि न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची ने टिप्पणी की, "हमने शिवसेना मामले में लंबा समय लेने के परिणाम देखे हैं."
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