Monday, September 21, 2026

Breaking
News

🕒

Latest
Updates

🔔

Stay
Informed

Top 5 This Week

Related Posts

UP किसानों को सहरसा में सिखाई मखाना की वैज्ञानिक खेती:बुआई से कटाई, बीमारी प्रबंधन से निर्यात तक की दी जानकारी; अयोध्या, बहराइच, कुशीनगर से कृषि अधिकारी पहुंचे


मखाना की वैज्ञानिक खेती को बिहार से दूसरे राज्यों तक पहुंचाने और किसानों को उत्पादन से लेकर विपणन व निर्यात तक की जानकारी देने के उद्देश्य से सहरसा के क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान, अगवानपुर में सोमवार से तीन दिवसीय एक्सपोजर विजिट सह प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति डॉ. डीआर सिंह के संरक्षण और निदेशक अनुसंधान डॉ. ए.के. सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के प्रगतिशील किसानों के साथ पांच कृषि अधिकारी भी शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति डॉ. डीआर सिंह ने किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मखाना की खेती को देश के अन्य हिस्सों में बढ़ावा देने के लिए सिर्फ किसानों को खेती की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण बीज, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं की जानकारी भी किसानों तक पहुंचाना जरूरी है। ‘वैज्ञानिक तकनीक से बढ़ेगा मखाना का दायरा’ कुलपति डॉ. डीआर सिंह ने कहा कि बिहार मखाना उत्पादन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यहां विकसित खेती की तकनीक और किसानों के अनुभव को दूसरे राज्यों के किसानों तक पहुंचाने से मखाना की खेती का दायरा बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसानों को उत्पादन के साथ-साथ बेहतर गुणवत्ता, प्रसंस्करण, विपणन और निर्यात की जानकारी मिलना भी जरूरी है। इससे किसान सिर्फ फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि बाजार की मांग को समझकर अपनी आय बढ़ाने की दिशा में भी काम कर सकेंगे। अंतरराज्यीय प्रशिक्षण से किसानों को मिलेगा नया अनुभव निदेशक अनुसंधान डॉ. ए.के. सिंह ने कहा कि इस तरह के अंतरराज्यीय प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों के बीच ज्ञान और अनुभव के आदान-प्रदान का माध्यम बनते हैं। अलग-अलग राज्यों के किसान जब एक-दूसरे की खेती की तकनीक और अनुभव को समझते हैं, तो कृषि के क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित होती हैं। उन्होंने कहा कि मखाना की खेती को लेकर वैज्ञानिक संस्थानों में विकसित तकनीक को किसानों तक पहुंचाना इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। बुआई से कटाई तक की तकनीक समझाई कार्यक्रम की अध्यक्षता क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान, अगवानपुर के सह निदेशक अनुसंधान डॉ. दिलीप कुमार महतो ने की। उन्होंने मखाना की खेती और उत्पादन तकनीक के बारे में विस्तार से जानकारी दी। डॉ. महतो ने किसानों को बुआई से लेकर फसल की कटाई तक की पूरी सस्य क्रिया सरल भाषा में समझाई। इसमें खेत और पानी के प्रबंधन, पौधों की देखभाल, फसल की स्थिति के अनुसार आवश्यक कृषि कार्य और उत्पादन बढ़ाने की तकनीक पर जानकारी दी गई। डॉ. देवान कुमार चौधरी ने भी मखाना की खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण तकनीकों और व्यावहारिक पहलुओं के बारे में किसानों को जानकारी दी। मौसम और जलवायु के अनुसार खेती पर जोर कृषि मौसम वैज्ञानिक रामानंद पटेल ने किसानों को जलवायु अनुकूल खेती की वैज्ञानिक विधि के बारे में बताया। उन्होंने मौसम के बदलाव और उसके खेती पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए कृषि कार्य करने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खेती में मौसम की जानकारी का इस्तेमाल करने से किसान कई जोखिमों को कम कर सकते हैं। सही समय पर कृषि गतिविधियां करने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को बेहतर किया जा सकता है। रोग-व्याधि से बचाव और निर्यात की भी जानकारी प्रशिक्षण के तकनीकी सत्र में मखाना में होने वाले रोग एवं व्याधि प्रबंधन पर भी विस्तार से चर्चा हुई। डॉ. राशिद ने किसानों को फसल में बीमारी की पहचान, उसके प्रबंधन और बचाव के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी। वहीं ज्योति ने मखाना के निर्यात और क्वारंटाइन से संबंधित प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी। किसानों को बताया गया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उत्पाद भेजने के लिए गुणवत्ता मानकों और जरूरी प्रक्रियाओं की जानकारी होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इस दौरान उत्पादन के साथ-साथ मखाना के बाजार, विपणन और निर्यात की संभावनाओं को लेकर भी किसानों को जानकारी दी गई। यूपी के चार जिलों के उद्यान अधिकारी भी शामिल कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए कृषि और उद्यान विभाग के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। विशिष्ट अतिथि के रूप में अयोध्या के जिला उद्यान पदाधिकारी धर्मेंद्र चंद्र चौधरी, बहराइच के जिला उद्यान अधिकारी दिनेश चौधरी, कुशीनगर के जिला उद्यान अधिकारी कृष्ण कुमार चौधरी और संत कबीर नगर के जिला उद्यान अधिकारी समुद्र गुप्त मल्ल मौजूद रहे। प्रशिक्षण में उत्तर प्रदेश के प्रगतिशील किसान भी शामिल हुए। अलग-अलग तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञ वैज्ञानिक मखाना उत्पादन से जुड़े विभिन्न विषयों पर किसानों को प्रशिक्षण देंगे। तीन दिनों तक चलेगा प्रशिक्षण तीन दिवसीय एक्सपोजर विजिट सह प्रशिक्षण के दौरान किसानों को मखाना की खेती की वैज्ञानिक तकनीक के साथ-साथ उत्पादन, रोग प्रबंधन, मौसम आधारित खेती, विपणन और निर्यात से जुड़े विषयों की जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुनीता पासवान ने किया, जबकि डॉ. मनीष दत्त ओझा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। मौके पर डॉ. राधेश्याम, डॉ. राजकिशोर सहित संस्थान के वैज्ञानिक और कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य बिहार में विकसित मखाना उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों को दूसरे राज्यों के किसानों तक पहुंचाना और उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से खेती की नई संभावनाओं से जोड़ना है।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles