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'बेमौसम वर्षा से गेहूं के दानों का आकार छोटा':उच्च स्तरीय टीम ने गांवों का निरीक्षण किया, कहा- जलवायु अनुकूल खेती करें


शिवहर में संचालित जलवायु अनुकूल खेती कार्यक्रम के अंतर्गत मंगलवार को एक उच्च स्तरीय टीम ने विभिन्न गांवों का निरीक्षण किया। इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में मदद करना था। निरीक्षण दल में संयुक्त निदेशक (रसायन) सतीश कुमार, सहायक निदेशक (सस्य, बीज विश्लेषण) हिमांशु शेखर, कृषि विज्ञान केंद्र शिवहर की वैज्ञानिक डॉ. संचिता घोष और कृषि अभियंत्रण वैज्ञानिक डॉ. सौरभ पटेल शामिल थे। इनके साथ प्रखंड कृषि पदाधिकारी नवीन कुमार और सहायक कृषि पदाधिकारी अरुण कुमार भी मौजूद रहे। टीम ने सुगिया कटसरी, मिनापुर बलहा, नयागांव, दोस्तिया और बिसंभरपुर जैसे गांवों का भ्रमण किया। प्रत्येक गांव में लगभग 10 किसानों से संवाद कर रबी फसलों गेहूं, मसूर, सरसों और आलू की स्थिति, उत्पादन और उपयोग की जा रही प्रजातियों की जानकारी ली गई। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि किसानों द्वारा उन्नत बीजों का प्रयोग किया गया है, जिससे गेहूं की फसल में अच्छा विकास देखा गया। हालांकि, बेमौसम वर्षा के कारण गेहूं के दानों का आकार अपेक्षाकृत छोटा रह गया। प्रमुख प्रजातियों में गेहूं की DBW 187 और HD 2967 तथा आलू की कुफरी सिंदूरी शामिल थीं। टीम ने कृषि विज्ञान केंद्र, शिवहर द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रहा है और इसे आगे भी जारी रखा जाना चाहिए। साथ ही गरमा मौसम के लिए मूंग, ढैंचा, मक्का, उड़द और मड़ुआ के बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, सब्जी फसलों के अंतर्गत भिंडी, खीरा, बैंगन, कद्दू, करेला और प्याज के बीज भी किसानों को वितरित किए गए हैं। इस पहल से फसल विविधीकरण के साथ किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित हो सकेगी, जो क्षेत्र में जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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