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जेपीएससी की भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के खुलासे के बीच अब झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की पोस्ट ग्रेजुएट ट्रेंड टीचर कंपीटिटिव एग्जामिनेशन में भी बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। इस मामले में सीआईडी ने सोमवार को जेएसएससी ऑफिस में छापेमारी की। आयोग के सचिव सुधीर गुप्ता से लंबी पूछताछ की। उन्हें मंगलवार को भी पूछताछ के लिए बुलाया है। कई दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए, जिनका सत्यापन किया जा रहा है। यह छापेमारी परीक्षा एजेंसी टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी के बयान पर की गई। अभय तिवारी ने पूछताछ में कबूला है कि 3120 पदों के लिए हुई कंप्यूटर आधारित पीजीटी शिक्षक भर्ती परीक्षा में धांधली हुई थी। सॉफ्टवेयर हैक कर अभ्यर्थियों को पास कराया गया। यह पूरा खेल रांची के बूटी मोड़ के पास एक सेंटर और बोकारो के दो परीक्षा केंद्रों पर हुआ। सेटिंग वाले अभ्यर्थियों को उस विशेष कंप्यूटर सिस्टम पर बैठाया जाता था, जिसका रिमोट एक्सेस दूसरे कमरे में मौजूद सिस्टम पर होता था। ड्रेस कोड व कतार से होती थी सेटिंग वाले अभ्यर्थी की पहचान जांच में सामने आया कि बूटी मोड़ स्थित केंद्र का संचालक सेटिंग वाले अभ्यर्थियों को पहले ही तय ड्रेस कोड में विशेष लाइन में खड़ा होने का निर्देश देता था, ताकि उन्हें चिह्नित सिस्टम पर बैठाया जा सके। अभय तिवारी ने स्वीकार किया कि वह खुद उस संचालक के जरिए अंग्रेजी में सफल होकर देवघर में पदस्थापित हुआ था। वहीं कॉमर्स से एक अन्य अभ्यर्थी सुनील कुमार को नौकरी दिलाई थी। अभ्यर्थियों से पैसे वसूलने में JPSC की पूर्व सदस्य का पीए ब्रज कुमार राम गिरफ्तार जेपीएससी भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी मामले में सीआईडी ने एक और गिरफ्तारी की है। जांच टीम ने जेपीएससी की पूर्व सदस्य अजिता भट्टाचार्य के पीए ब्रज कुमार राम को गिरफ्तार किया है। एजेंसी के अनुसार ब्रज कुमार परीक्षा में सेटिंग करने वाले अभ्यर्थियों से पैसे वसूलता था। इस पूरे मामले का खुलासा पहले से गिरफ्तार टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी ने स्वीकारोक्ति बयान में किया था। अभय से मिले इनपुट के आधार पर ही ब्रज कुमार की गिरफ्तारी हुई। अब सीआईडी उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। ख्यांगते से पूछताछ, बिंसिस से कमीशन लेने पर सवाल सीआईडी ने आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांगते को फिर दो दिन रिमांड पर लेकर पूछताछ की। उनसे टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी, कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार और बिंसिस टेक्नोलॉजी के निदेशक अरुण शर्मा के बयानों से सामने आए तथ्यों पर सवाल पूछे। सीआईडी ने ख्यांगते के सामने वे बयान रखे, जिनमें उन पर दो करोड़ रुपए लेकर टीडीपीएल और बिंसिस टेक्नोलॉजी को परीक्षा से जुड़ा काम सौंपने का आरोप लगाया गया है। सूत्रों के मुताबिक ख्यांगते कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
