अररिया में बिहार केंद्रीय चयन पर्षद द्वारा आयोजित सिपाही भर्ती लिखित परीक्षा में शामिल होने पहुंचे हजारों अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले ही गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। दूर-दराज के जिलों से आए इन परीक्षार्थियों को ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ और रेलवे स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझना पड़ा। जिले के 19 परीक्षा केंद्रों पर होने वाली इस परीक्षा के लिए पहुंचे अभ्यर्थियों ने यात्रा के दौरान भारी भीड़, ट्रेनों में सीटों की कमी और स्टेशनों पर अव्यवस्था की शिकायत की। इससे भर्ती परीक्षा की व्यवस्थाओं और परीक्षा केंद्रों के आवंटन को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। 3 बार बदलनी पड़ी ट्रेन मधुबनी जिले से परीक्षा देने पहुंचे अभ्यर्थी मनीष कुमार सिंह ने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि अररिया पहुंचने के लिए उन्हें तीन बार ट्रेन बदलनी पड़ी। मधुबनी से सकरी और फिर अन्य ट्रेनों के माध्यम से वे किसी तरह फारबिसगंज पहुंचे, लेकिन वहां से अररिया आने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। मनीष ने बताया कि एक पैसेंजर ट्रेन में इतनी भीड़ थी कि वे उसमें चढ़ नहीं सके। इसके बाद सीमांचल एक्सप्रेस आई, लेकिन उसके जनरल कोच में भी पैर रखने तक की जगह नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मजबूरी में वे फर्स्ट एसी कोच में जाकर बैठ गए, जहां टिकट जांच के दौरान टीटीई ने उन्हें धक्का देकर बाहर निकाल दिया। आखिरकार, उन्हें कोच के गेट के पास बैठकर यात्रा करने को मजबूर होना पड़ा और वे किसी तरह अररिया पहुंचे। छात्रों के साथ अच्छा व्यवहार होना चाहिए मनीष कुमार सिंह ने कहा कि सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के साथ संवेदनशील व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने जोर दिया, “आज हम परीक्षा देने जा रहे हैं, कल हम भी किसी पद पर होंगे। छात्रों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए।” वहीं, समस्तीपुर से आए मोहम्मद अरबाज ने भी अपनी यात्रा को बेहद कठिन बताया। उन्होंने कहा कि ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ थी और विशेष ट्रेनों की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं दिखी। अरबाज के अनुसार, “अगर परीक्षा केंद्र आवंटन में गृह जिले या आसपास के जिलों को प्राथमिकता दी जाए तो अभ्यर्थियों को इतनी परेशानी नहीं होगी। सैकड़ों किलोमीटर दूर परीक्षा केंद्र देने से उम्मीदवारों पर अतिरिक्त आर्थिक और मानसिक दबाव पड़ता है।” मंगलवार देर रात करीब 9:30 बजे सीमांचल एक्सप्रेस के अररिया कोर्ट रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद स्टेशन परिसर अभ्यर्थियों से भर गया। बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने वेटिंग हॉल, प्लेटफॉर्म संख्या एक और दो तथा मुख्य प्रवेश द्वार के आसपास रात गुजारी। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर RPF तैनात स्टेशन परिसर में अभ्यर्थियों की भारी भीड़ के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आरपीएफ के जवान लगातार तैनात रहे और समय-समय पर आवश्यक दिशा-निर्देश देते नजर आए। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था संतोषजनक दिखी, लेकिन यात्रियों और अभ्यर्थियों के लिए उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की कमी साफ दिखाई दी। अमृत भारत परियोजना के तहत विकसित किए जा रहे अररिया कोर्ट रेलवे स्टेशन पर निर्माण कार्य जारी है, लेकिन उमस भरी गर्मी के बीच किसी भी प्लेटफॉर्म पर पंखे की व्यवस्था नहीं दिखी। रातभर स्टेशन पर रुके अभ्यर्थी पसीने से तरबतर नजर आए और उन्हें गर्मी व असुविधा का सामना करना पड़ा। सिपाही भर्ती परीक्षा को लेकर हजारों युवाओं में उत्साह तो दिखा, लेकिन यात्रा से लेकर ठहरने तक की चुनौतियों ने उनकी परीक्षा की शुरुआत को कठिन बना दिया। ऐसे में अभ्यर्थियों का कहना है कि भविष्य में परीक्षा केंद्र आवंटन और परिवहन सुविधाओं को लेकर बेहतर योजना बनाई जानी चाहिए, ताकि नौकरी की उम्मीद लेकर निकलने वाले युवाओं को परीक्षा से पहले ही संघर्ष न करना पड़े।
अभ्यर्थियों को ट्रेन में नहीं मिली जगह:अररिया में हजारों सिपाही भर्ती परीक्षार्थी परेशान, रेलवे स्टेशनों पर सुविधाओं का अभाव
अररिया में बिहार केंद्रीय चयन पर्षद द्वारा आयोजित सिपाही भर्ती लिखित परीक्षा में शामिल होने पहुंचे हजारों अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले ही गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। दूर-दराज के जिलों से आए इन परीक्षार्थियों को ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ और रेलवे स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझना पड़ा। जिले के 19 परीक्षा केंद्रों पर होने वाली इस परीक्षा के लिए पहुंचे अभ्यर्थियों ने यात्रा के दौरान भारी भीड़, ट्रेनों में सीटों की कमी और स्टेशनों पर अव्यवस्था की शिकायत की। इससे भर्ती परीक्षा की व्यवस्थाओं और परीक्षा केंद्रों के आवंटन को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। 3 बार बदलनी पड़ी ट्रेन मधुबनी जिले से परीक्षा देने पहुंचे अभ्यर्थी मनीष कुमार सिंह ने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि अररिया पहुंचने के लिए उन्हें तीन बार ट्रेन बदलनी पड़ी। मधुबनी से सकरी और फिर अन्य ट्रेनों के माध्यम से वे किसी तरह फारबिसगंज पहुंचे, लेकिन वहां से अररिया आने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। मनीष ने बताया कि एक पैसेंजर ट्रेन में इतनी भीड़ थी कि वे उसमें चढ़ नहीं सके। इसके बाद सीमांचल एक्सप्रेस आई, लेकिन उसके जनरल कोच में भी पैर रखने तक की जगह नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मजबूरी में वे फर्स्ट एसी कोच में जाकर बैठ गए, जहां टिकट जांच के दौरान टीटीई ने उन्हें धक्का देकर बाहर निकाल दिया। आखिरकार, उन्हें कोच के गेट के पास बैठकर यात्रा करने को मजबूर होना पड़ा और वे किसी तरह अररिया पहुंचे। छात्रों के साथ अच्छा व्यवहार होना चाहिए मनीष कुमार सिंह ने कहा कि सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के साथ संवेदनशील व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने जोर दिया, “आज हम परीक्षा देने जा रहे हैं, कल हम भी किसी पद पर होंगे। छात्रों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए।” वहीं, समस्तीपुर से आए मोहम्मद अरबाज ने भी अपनी यात्रा को बेहद कठिन बताया। उन्होंने कहा कि ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ थी और विशेष ट्रेनों की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं दिखी। अरबाज के अनुसार, “अगर परीक्षा केंद्र आवंटन में गृह जिले या आसपास के जिलों को प्राथमिकता दी जाए तो अभ्यर्थियों को इतनी परेशानी नहीं होगी। सैकड़ों किलोमीटर दूर परीक्षा केंद्र देने से उम्मीदवारों पर अतिरिक्त आर्थिक और मानसिक दबाव पड़ता है।” मंगलवार देर रात करीब 9:30 बजे सीमांचल एक्सप्रेस के अररिया कोर्ट रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद स्टेशन परिसर अभ्यर्थियों से भर गया। बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने वेटिंग हॉल, प्लेटफॉर्म संख्या एक और दो तथा मुख्य प्रवेश द्वार के आसपास रात गुजारी। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर RPF तैनात स्टेशन परिसर में अभ्यर्थियों की भारी भीड़ के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आरपीएफ के जवान लगातार तैनात रहे और समय-समय पर आवश्यक दिशा-निर्देश देते नजर आए। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था संतोषजनक दिखी, लेकिन यात्रियों और अभ्यर्थियों के लिए उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की कमी साफ दिखाई दी। अमृत भारत परियोजना के तहत विकसित किए जा रहे अररिया कोर्ट रेलवे स्टेशन पर निर्माण कार्य जारी है, लेकिन उमस भरी गर्मी के बीच किसी भी प्लेटफॉर्म पर पंखे की व्यवस्था नहीं दिखी। रातभर स्टेशन पर रुके अभ्यर्थी पसीने से तरबतर नजर आए और उन्हें गर्मी व असुविधा का सामना करना पड़ा। सिपाही भर्ती परीक्षा को लेकर हजारों युवाओं में उत्साह तो दिखा, लेकिन यात्रा से लेकर ठहरने तक की चुनौतियों ने उनकी परीक्षा की शुरुआत को कठिन बना दिया। ऐसे में अभ्यर्थियों का कहना है कि भविष्य में परीक्षा केंद्र आवंटन और परिवहन सुविधाओं को लेकर बेहतर योजना बनाई जानी चाहिए, ताकि नौकरी की उम्मीद लेकर निकलने वाले युवाओं को परीक्षा से पहले ही संघर्ष न करना पड़े।


