Saturday, May 16, 2026

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अररिया में वट सावित्री पूजा, फलों के दाम बढ़े:महिलाओं की खरीदारी से बाजारों में रौनक, पूजा सामग्री भी महंगी हुई


अररिया शहर में वट सावित्री पूजा को लेकर शनिवार सुबह से ही बाजारों और चौक-चौराहों पर भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह-सुबह महिलाएं फूल, फल और पूजा सामग्री खरीदने के लिए बाजार पहुंचीं, जिससे पूरे शहर में चहल-पहल का माहौल बना रहा। वट सावित्री व्रत में महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना के साथ बरगद के वृक्ष की पूजा करती हैं। इस बार त्योहार को लेकर महिलाओं में खास उत्साह देखने को मिला। बाजारों में न केवल खरीदारों की भीड़ उमड़ी, बल्कि मांग बढ़ने के कारण फलों और पूजा सामग्री की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। फलों की कीमतों में आई तेजी स्थानीय बाजारों में पूजा के लिए इस्तेमाल होने वाले फलों के दाम आसमान छूते नजर आए। बाजार में सेब 200 से 220 रुपये प्रति किलो, अनार 200 से 220 रुपये प्रति किलो और संतोला 280 से 300 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। वहीं लिची की कीमत भी काफी बढ़ गई है। एक पीस लिची 4 रुपये में मिल रही है, जबकि 50 पीस की थैली 200 रुपये में बेची जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि वट सावित्री पूजा को लेकर मांग बढ़ने से कीमतों में उछाल आया है। पूजा सामग्री की दुकानों पर भी भीड़ पूजा सामग्री की दुकानों पर भी दिनभर भारी भीड़ लगी रही। पूजा में इस्तेमाल होने वाली छोटी टोकरी 150 रुपये और बड़ी टोकरी 200 रुपये प्रति पीस बिक रही है। इसके अलावा बांस का पारंपरिक पंखा 60 से 80 रुपये तक में बेचा जा रहा है। फूल, माला और गजरे की दुकानों पर महिलाओं की लंबी कतारें देखी गईं। कई दुकानदारों ने बताया कि सुबह से ही ग्राहकों की भीड़ लगातार बनी रही। “श्रद्धा में कोई कमी नहीं” खरीदारी करने पहुंची महिलाओं ने बताया कि वट सावित्री पूजा की सबसे बड़ी खासियत नए-नए फलों को भगवान को चढ़ाने की परंपरा है। इसी वजह से महिलाएं सेब, लिची, अनार और संतोला समेत विभिन्न मौसमी फलों की खरीदारी कर रही हैं। एक महिला ने कहा, “पति की लंबी उम्र के लिए हम हर साल यह व्रत रखती हैं। इस बार पूजा सामग्री और फल महंगे जरूर हुए हैं, लेकिन श्रद्धा में कोई कमी नहीं आने दी।” ग्रामीण इलाकों में भी दिख रहा उत्साह वट सावित्री पूजा को लेकर अररिया के ग्रामीण क्षेत्रों में भी उत्साह का माहौल है। गांवों में महिलाएं पूजा की तैयारियों में जुटी हुई हैं। कई स्थानों पर बरगद के पेड़ों की साफ-सफाई और सजावट भी की जा रही है। हिंदू परंपरा के अनुसार वट सावित्री पूजा ज्येष्ठ अमावस्या के दिन मनाई जाती है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को बरगद के वृक्ष की पूजा-अर्चना कर व्रत खोलती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत से पति की आयु लंबी होती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

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