भारत में आबादी के हिसाब से महिलाओं की राजनीति में भागीदारी उतनी नहीं है, जितनी होनी चाहिए। महिलाओं को धार्मिक मान्यताओं में प्रथम स्थान दिया गया है। जहां सरस्वती ज्ञान की प्रतीक हैं, लक्ष्मी धन की…
भारत में आबादी के हिसाब से महिलाओं की राजनीति में भागीदारी उतनी नहीं है, जितनी होनी चाहिए। महिलाओं को धार्मिक मान्यताओं में प्रथम स्थान दिया गया है। जहां सरस्वती ज्ञान की प्रतीक हैं, लक्ष्मी धन की जबकि दुर्गा और काली शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं। लेकिन मौजूदा परिदृश्य में यह कल्पना तभी पूरी होगी जब महिलाओं को समानता का समुचित अधिकार मिलेगा। राजनीति में अगर महिलाओं को प्रतिनिधित्व का मौका मिले तो विकास की गति दो गुनी हो जाएगी। वंशवाद की राजनीति स्वच्छ लोकतंत्र का निर्माण नहीं कर सकती।
ये विचार शुक्रवार को महेशपुर लहरतारा स्थित सिल्वर ग्रोव स्कूल में आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान के ‘आओ राजनीति करें’ अभियान के तहत ‘चाय चौपाल’ कार्यक्रम में महिलाओं से साझा किए।
महिलाओं ने कहा कि दहेज प्रथा, समान शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा जैसे विषयों पर गंभीरता से सोचना होगा। आरक्षण के कारण आज भले ही महिलाएं ग्राम पंचायत से लेकर संसद तक के पदों पर आसीन हों, लेकिन वह सिर्फ कठपुतली बनी हुई हैं।
नेता वही जो महिला सुरक्षा, विकास और रोजगार की बात करे
देश की बागडोर ऐसे नेता के हाथों में नहीं जाए जो खुद का विकास करे। नेता वही जो देश का विकास करे। विदेशी मामलों का जानकार हो। महिलाओं के हित में कानून बनाए। योजनाओं को धरातल पर लाए। महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के प्रतिबद्ध हो। राष्ट्र व समाज के विकास में महिलाओं की भी राय लेने वाला हो।
योजना किसी भी सरकार की हो उसे निचले तबके तक पहुंचाना होगा। शिक्षित महिलाओं को योजनाओं के बारे में पता होता है लेकिन जो अशिक्षित हैं उन्हें भी बताना चाहिए।
– स्वाति मिश्रा
पार्टियों को शराब बंदी जैसे मुद्दों पर गंभीरता से सोचना होगा। केवल योजना बनाने से देश का विकास नहीं होगा उसे जनता तक पहुंचाना होगा।
– रंजना गुप्ता
महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी देना जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्रों में खास कर काम करना होगा ताकि लोगों को योजनाओं का लाभ मिल सके।
– रचना झा
आज हर क्षेत्र में महिलाएं पुरुषों के कंधे से कंधा मिला कर उनके साथ खड़ी हैं। बात जब राजनीति की आती है तो भेदभाव शुरू हो जाता है।
-सीमाजू ओझा
समानता की बात तो सभी पार्टियां करती हैं लेकिन उसका पालन नही होता। समानता के अभाव में महिला सशक्तीकरण की बात सार्थक नही होगी।
-प्रियंका सिंह
रोजगार और शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं के लिए सरकार ठोस योजना बनाए। आरक्षण नहीं बल्कि समानता के आधार पर लाभ दिया जाए।
-श्वेता सिंह
अब बेटियां किसी पर बोझ नहीं रहीं। उन्हें बेहतर देखभाल, शिक्षा व स्वास्थ्य मुहैया कराएं। बेटियां अपने पैरों पर खड़े होने का साहस रखती हैं।
– अनामिका
दहेज प्रथा और महिला उत्पीड़न के लिए सख्त कानून बने। जागरूकता अभियान मात्र से महिला उत्पीड़न कम नहीं हो सकता। शिक्षित महिलाओं को आगे आना होगा।
– श्रद्धा सिंह
महिलाओं के प्रति लोगों की सोच बदली है। हालांकि महिला सुरक्षा को लेकर अभी डर समाप्त नहीं हुआ है। इसे दूर करने के लिए सरकार पहल करे।
– मंजू द्विवेदी
वंशवाद की राजनीति करने वाली पार्टियां देश का विकास नहीं कर सकती। महिला अपने अधिकारों को तभी जान सकेगी जब वह शिक्षित होगी।
– रचना श्रीवास्तव

