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लोहरदगा, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी जी राम जी व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से देशभर में लागू हो गई है। इसके साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह नया कानून प्रभावी हो गया है। नए कानून के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की वैधानिक गारंटी दी गई है। लोहरदगा जैसे ग्रामीण बहुल जिले में इस नई व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जिले के बड़ी संख्या में लगभग 10 हजार ग्रामीण परिवार खेती के साथ-साथ मजदूरी और सरकारी रोजगार योजनाओं पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में रोजगार के दिनों में बढ़ोतरी से ग्रामीण परिवारों की आय और आजीविका सुरक्षा को मजबूती मिलने की उम्मीद है। नया मिशन के तहत केवल मजदूरी उपलब्ध कराने पर ही जोर नहीं दिया गया है, बल्कि गांवों में टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी काम करने का प्रावधान है। इसके अंतर्गत जल संरक्षण, ग्रामीण आधारभूत संरचना, आजीविका से जुड़ी परिसंपत्तियां व मौसम और आपदा से निपटने वाले कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। लोहरदगा के ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण से जुड़े तालाब, बागवानी, डोभा, चेकडैम, जल पुनर्भरण संरचनाएं, सिंचाई से जुड़ी योजनाएं व कृषि आधारित परिसंपत्तियों का निर्माण किसानों के लिए उपयोगी साबित होगा। राज्य सरकार ने मजदूरी में राज्य के हिस्से के 40 प्रतिशत खर्च को स्वयं वहन करने का निर्णय लिया है, ताकि ग्रामीण परिवारों पर इसका वित्तीय बोझ न पड़े। नए प्रावधान में रोजगार की मांग करने वाले ग्रामीण परिवारों को निर्धारित समय में काम उपलब्ध कराने पर जोर है। परंतु दूसरी ओर ग्रामीण रोजगार कार्यों में एनएमएमएस एप के माध्यम से डिजिटल हाजिरी दर्ज करने की व्यवस्था मजदूरों और रोजगार सेवकों के लिए परेशानी का कारण बनने लगी थी। जिसे तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया। परंतु इसकी जानकारी सभी को नहीं हो पाने के कारण मजदूरों की संख्या कम हो गई है। लोहरदगा के कई ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क कमजोर रहने के कारण कार्यस्थल से समय पर ऑनलाइन हाजिरी दर्ज नहीं हो पाती थी। इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं रहने या एप में तकनीकी समस्या आने पर मजदूरों की उपस्थिति अपलोड करने में दिक्कत आ रही थी। जिसे फिलहाल पुरानी व्यवस्था के तहत रजिस्टर के आधार पर एंट्री कराई जा रही है। मजदूरों का कहना है कि वे निर्धारित समय पर काम पर पहुंचकर अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं, लेकिन तकनीकी समस्या के कारण हाजिरी दर्ज नहीं होने की स्थिति में उनकी मजदूरी प्रभावित होने की चिंता रहती थी। डीडीसी राज महेश्वरम ने बताया कि वीबीजीरामजी में डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से काम की निगरानी, सार्वजनिक जानकारी, जैविक पहचान, कार्यस्थल की निगरानी और वास्तविक समय के प्रबंधन सूचना तंत्र पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और फर्जीवाड़े की संभावनाओं को कम करना है। अब लोहरदगा में इस नई व्यवस्था की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ग्रामसभा में जरूरत के अनुरूप योजनाओं का चयन कितना प्रभावी ढंग से होता है, मजदूरों को समय पर रोजगार और मजदूरी मिलती है या नहीं तथा तैयार परिसंपत्तियों का लाभ ग्रामीणों को कितना मिलता है।
एनएमएमएस से हाजिरी बनाने में परेशानी, स्कैनिंग सिस्टम हटाया
