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भास्कर एक्सक्लूिसव नई शिक्षा नीति के तहत एनसीईआरटी की ओर से कक्षा 9 से 12 के पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया है। लेकिन गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसी नई किताबें अभी प्रकाशित होकर बाजार में नहीं पहुंची हैं। इससे शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों तीनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक बदलाव कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में किए गए हैं। हालांकि, इन बदलावों का क्रियान्वयन समय पर नहीं हो पाया। स्कूलों को मजबूरी में एनसीईआरटी की ओर से जारी पीडीएफ (पोर्टेबल डॉक्यूमेंट फॉर्मेट) सामग्री के आधार पर पढ़ाई शुरू करनी पड़ी है। कई जगह शिक्षक स्वयं नोट्स तैयार कर छात्रों को पढ़ा रहे हैं। हाथ में किताबें नहीं होने से विद्यार्थियों को पढ़ाए गए पाठ भी समझ में नहीं आ रहे हैं। बता दें कि एनसीआरटी ने इस बार साइंस, सोशल साइंस, इंग्लिश और मैथ्स जैसे प्रमुख विषयों में कई बदलाव किए हैं। कुछ चैप्टर बढ़ाए गए हैं, कुछ घटाए गए हैं, जबकि कई टॉपिक्स को नए तरीके से शामिल किया गया है। ऐसे में छात्रों को पुरानी पुस्तकों की जगह नई छपी हुई किताबों से ही पढ़ाई करनी है। नई किताबों की अनुपलब्धता के बीच निजी प्रकाशकों ने मौके का फायदा उठाना शुरू कर दिया है। बाजार में कुछ जगह ऐसे प्रकाशकों की किताबें धड़ल्ले से बिक रही हैं, जिन्हें एनसीईआरटी आधारित या सीधे एनसीईआरटी के नाम से प्रचारित किया जा रहा है, जबकि वे आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हैं। कई दुकानों पर नए सिलेबस के नाम पर निजी पब्लिकेशन की किताबें ऊंचे दामों पर बेची जा रही है। जबकि एनसीआरटी की किताबें निजी प्रकाशकों की किताबों की तुलना में काफी सस्ती होती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत बदलाव कई विषयों में अध्यायों का पुनर्गठन, कुछ टॉपिक्स हटाना और नए कॉन्सेप्ट जोड़ने जैसे बदलाव शामिल हैं। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप किए गए हैं, जिनका उद्देश्य रटने की बजाय समझ आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को किताबों के अभाव में पढ़ाई समझने में कठिनाई हो रही है। डिजिटल सामग्री हर छात्र के लिए समान रूप से उपलब्ध नहीं है, जिससे ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के छात्रों पर इसका ज्यादा असर पड़ रहा है। 9वीं की कोई पुस्तक नहीं है उपलब्ध, विद्यार्थी परेशान नया सत्र शुरू होने के बावजूद बाजार में अभी तक 9वीं कक्षा की कोई भी नई एनसीईआरटी पुस्तक उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि बच्चे इस बात को लेकर परेशान हैं कि बिना किताब के पढ़ाई कैसे शुरू होगी। वहीं अभिभावकों को भी डर सता रहा है कि अगर किताबें देर से आईं तो परीक्षा के समय बच्चों पर सिलेबस पूरा करने का अतिरिक्त दबाव बढ़ जाएगा। इससे बच्चों में मानसिक तनाव बढ़ेगी। फिलहाल विद्यार्थी जैसे-तैसे पढ़ाई कर रहे हैं। निजी प्रकाशक उठा रहे हैं फायदा, छात्र-अभिभावक परेशान जल्द किताबें उपलब्ध होने से बच्चों की परेशानी दूर होगी

