Sunday, May 24, 2026

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'कर्जदार टॉर्चर करते थे, इसलिए ट्रेन के आगे कूदा':शराबबंदी, कोरोना में ठप हुआ कारोबार; बिजनेसमैन की पत्नी बोली-पार्टनर की धमकियों से टेंशन में थे


‘’मुझ पर काफी ज्यादा कर्ज हो गया था। इसके बाद इनकम टैक्स का एक करोड़ 80 लाख रुपए का नोटिस आ गया। 5 लाख देने वाले कर्जदार टॉर्चर करते थे, जिसके कारण मैं काफी परेशान था। मुर्गी फार्म, अंडा फार्म के लिए कर्ज लिया था। मेरी पत्नी को कर्ज देने वालों और टॉर्चर करने वालों के बारे में सब कुछ पता है।” आरा-दानापुर रेलवे ट्रैक के आरा जंक्शन पर शुक्रवार की शाम 54 साल के कारोबारी विजय कुमार गुप्ता ने ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या की कोशिश की थी। विजय का फिलहाल पटना के एक निजी अस्पताल में इलाज जारी है। डॉक्टरों ने उनकी हालत बेहद नाजुक बताया है। डॉक्टरों के मुताबिक, विजय के राइट साइड की किडनी फट गई है, पेट में भारी मात्रा में खून भर गया है। शरीर के दोनों हिस्सों में ब्लड जम गया है। इसके अलावा, कमर और स्पाइनल में भी चोटें आई हैं। विजय कुमार गुप्ता ने आखिर सुसाइड की कोशिश क्यों की? एक करोड़ 80 लाख रुपए के इनकम टैक्स के नोटिस का क्या मामला है, कारोबारी विजय की पत्नी का घटना को लेकर क्या कहना है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। आरा स्टेशन पर कारोबारी के सुसाइड की 2 तस्वीरें देखिए… अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए सुसाइड की कोशिश की पूरी कहानी इनकम टैक्स का 1.80 करोड़ का नोटिस, ऊपर से कर्जदारों का टॉर्चर कारोबारी विजय कुमार गुप्ता भोजपुर जिले के पीरो थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। विजय लंबे समय से आर्थिक तंगी और कर्ज के बोझ से दबे हुए हैं। करीब 10 साल पहले शराबबंदी लागू होने के बाद विजय गुप्ता का कारोबार पूरी तरह ठप हो गया था। विजय गुप्ता का शराब का पुश्तैनी कारोबार था। शराबबंदी के दौरान ही इनकम टैक्स का नोटिस आया, जो धीरे-धीरे बढ़कर एक करोड़ 80 लाख रुपए तक पहुंच गया। हालात तब और बिगड़ गए जब विजय ने अपने पार्टनर से लिए गए कर्ज को समय पर नहीं चुका सके और पार्टनर की ओर से उन्हें धमकी मिलने लगी। धमकियों से परेशान विजय ने ट्रेन के आगे कूदकर सुसाइड की कोशिश की।
पत्नी बोली- कर्जदार फोन कर पति को धमकाते थे विजय की पत्नी सुप्रिया गुप्ता ने बताया, ‘शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे मेरे पति खाना खाकर आराम कर रहे थे। तभी किसी कर्जदार का फोन आया और धमकी देना शुरू कर दिया। इसी डर से किसी को कुछ भी बताए बिना विजय घर से निकल गए। देर शाम मेरे बड़े बेटे का फोन आया कि पापा ट्रेन के आगे कूद गए हैं। उनकी स्थिति काफी नाजुक है।’ फैमिली बिजनेस था, टैक्स भरने से भाइयों ने मना किया सुप्रिया गुप्ता ने बताया, ‘जब मेरी शादी हुई, इससे पहले से पति अपने चार भाइयों के साथ देशी-विदेशी शराब की दुकान चलाते थे। जब कारोबार ठीक चल रहा था, तब पति सभी भाइयों के लिए अच्छे थे। घर में बड़े होने के नाते सभी जिम्मेदारियों को वे खुद संभालते थे। अपने किसी भाई को किसी चीज की कोई कमी नहीं होने दी। साल 2001 के पहले से पीरो में शराब की दुकान थी। लेकिन शराबबंदी के बाद सारा कारोबार ठप हो गया।’ ‘इसी बीच इनकम टैक्स का नोटिस आया, जब मेरे पति ने अपने भाइयों से कहा कि नोटिस आया है। हमलोग मिल जुलकर टैक्स जमा कर देंगे। तभी सभी भाइयों ने साथ देने से इनकार कर दिया और कहा कि ये बिजनेस आपका था, आप टैक्स जमा कीजिए। हमलोग कुछ मदद नहीं कर सकते।’ शराबबंदी के बाद पॉल्ट्री फॉर्म खोला, वो भी ठप सुप्रिया ने बताया कि हम दोनों के तीन बेटे अर्पित, अनुज और लड्डू है। अपने बच्चों के भविष्य के लिए विजय ने बिहार छोड़कर झारखंड के डाल्टेनगंज में शराब भट्ठी चलाने लगे। इसी दौरान उन्होंने पार्टनरों से कुछ कर्ज लेकर मुर्गी फार्म खोला, लेकिन कोरोना में मुर्गी फार्म भी ठप हो गया। सुप्रिया ने बताया कि आज हालात ऐसे हैं कि तीनों बच्चों को डर की वजह से अलग-अलग रिश्तेदारों के घर पर रखा है। दोबारा कर्ज लेकर पति का इलाज करा रही हूं। इनकम टैक्स नोटिस के बाद बढ़ी परेशानी घायल के साले विद्या भूषण कुमार ने बताया, ‘करीब एक महीने पहले इनकम टैक्स विभाग की ओर से 1 करोड़ 80 लाख रुपए का नोटिस मिला था। इसके बाद से ही मेरे बहनोई काफी तनाव में रहने लगे थे। शराबबंदी के बाद विजय कुमार गुप्ता डाल्टेनगंज में अन्य लोगों के साथ पार्टनरशिप में काम करने लगे थे। इसी दौरान एक व्यक्ति से मुर्गी फार्म खोलने के लिए 5 लाख रुपए का कर्ज लिया था, लेकिन काम सफल नहीं हुआ और कुछ महीनों में ही बंद करना पड़ा। कर्ज देने वाला लगातार पैसे के लिए दबाव बना रहा था। इसके बाद विजय ने अपने पार्टनर से 5 लाख रुपए उधार लेकर पहले कर्जदार को चुका दिया।’ विद्या भूषण के मुताबिक, ‘कर्ज चुकाने के बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती चली गई। आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण वे फिर कर्ज में डूबते चले गए। उन्हें लगातार धमकियां भी मिल रही थीं।’

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