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किसी ने AI से बना दी फर्जी फोटो या वीडियो तो क्या करें? कंगना रनौत मामले में हाईकोर्ट के फैसले से समझें अपने अधिकार

इंटरनेट पर किसी की भी तस्वीर उठाकर अश्लील वीडियो बना देना या किसी की आवाज क्लोन (नकल) करके फर्जी बयान जारी कर देना – आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में यह खेल बेहद खतरनाक मोड़ ले चुका है.

एक्ट्रेस और सांसद कंगना रनौत के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का ताजा फैसला इसी खतरे पर एक बड़ी लकीर खींचता है. कोर्ट ने मेटा (फेसबुक-इंस्टाग्राम) और केंद्र सरकार को 72 घंटे के भीतर कंगना के सभी फर्जी डीपफेक वीडियो, अश्लील तस्वीरें और छेड़छाड़ किए गए ऑडियो हटाने और संबंधित वेबसाइट्स को ब्लॉक करने का सख्त आदेश दिया है.

कंगना ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर उनकी पहचान का इस्तेमाल करके फर्जी और आपत्तिजनक कंटेंट प्रसारित किया जा रहा है. इसमें AI से तैयार की गई अश्लील तस्वीरें, एडिटेड वीडियो, गलत बयान और ऐसे कंटेंट शामिल हैं जिनसे ऐसा लग सकता है कि कंगना ने कोई बात कही या कोई काम किया है, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं हुआ.

लेकिन सवाल सिर्फ एक सांसद या सेलिब्रिटी का नहीं है. अगर कल को किसी आम इंसान की तस्वीर या आवाज के साथ ऐसा खिलवाड़ हो जाए, तो कानून में क्या रास्ते हैं? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं.

कंगना रनौत - फोटो इंस्टाग्राम
कंगना रनौत – फोटो इंस्टाग्राम

क्या है पर्सनैलिटी राइट्स (Personality Rights)?

सीधे शब्दों में कहें तो यह आपके नाम, चेहरे, आवाज और पहचान पर आपका अपना कानूनी मालिकाना हक है. कोई भी व्यक्ति या कंपनी आपकी इजाजत के बिना आपके चेहरे या आवाज का इस्तेमाल न तो पैसे कमाने के लिए कर सकती है और न ही आपकी छवि बिगाड़ने के लिए.

उदाहरण के लिए-

  • कोई कंपनी बिना अनुमति किसी एक्ट्रेस की तस्वीर लगाकर अपने प्रोडक्ट का विज्ञापन चलाए.
  • कोई व्यक्ति किसी एक्टर की आवाज की नकल करके फर्जी बयान तैयार करे.
  • AI की मदद से किसी सेलिब्रिटी का अश्लील वीडियो बनाया जाए.
  • किसी नेता के नाम से ऐसा भाषण वायरल हो, जो उसने कभी दिया ही नहीं.

इन मामलों में परिस्थितियों के आधार पर पर्सनैलिटी राइट्स, निजता, मानहानि या अन्य कानूनी अधिकारों का सवाल उठ सकता है. हालांकि, हर इस्तेमाल अपने आप गैरकानूनी नहीं होता. मामले की प्रकृति, अनुमति, संदर्भ और लागू कानून महत्वपूर्ण होते हैं.

कोर्ट ने साफ माना है कि किसी नेता या एक्टर के नाम पर फर्जी बयान या आपत्तिजनक वीडियो फैलाने से जो नुकसान होता है, उसकी भरपाई केवल पैसों से नहीं की जा सकती.

तो क्या अब मीमर्स की भी खैर नहीं?

पर्सनैलिटी राइट्स की बात आते ही पहला सवाल ये आता है कि क्या अब सोशल मीडिया पर मीम्स, पैरोडी या राजनीतिक व्यंग्य भी बंद हो जाएंगे? ऐसा बिल्कुल नहीं है.

कानून अभिव्यक्ति की आजादी (Freedom of Speech) और स्वस्थ मजाक को नहीं रोकता. कंगना रनौत के मामले में भी उनके वकील ने कोर्ट में साफ किया था कि वे मीम्स या राजनीतिक सटायर के खिलाफ राहत नहीं मांग रहे हैं. यह लड़ाई उन अश्लील डीपफेक्स, मनगढ़ंत बयानों और भ्रामक वीडियोज के खिलाफ है, जिनका मकसद किसी की छवि को खराब करना या फर्जी पहचान से पैसा कमाना है. यानी जब तक आप सिर्फ चुटकुला या मीम बना रहे हैं, तब तक बात अलग है; लेकिन जैसे ही बात किसी की गरिमा, फर्जी बयानों या अश्लीलता पर आएगी, कानून की लक्ष्मण रेखा खिंच जाएगी.

सिर्फ सेलिब्रिटीज के लिए या आम लोगों का भी है हक?

पर्सनैलिटी राइट्स का फायदा आमतौर पर मशहूर हस्तियां अपने कमर्शियल नुकसान को रोकने के लिए उठाती हैं, लेकिन निजता (Privacy) और गरिमा (Dignity) का अधिकार देश के हर नागरिक को संविधान देता है. अगर कोई आपकी निजी तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ करता है, तो वह सीधे तौर पर अपराध है.

अगर आपके साथ ऐसा हो, तो तुरंत क्या करें?

  • सबूत सुरक्षित रखें: उस पोस्ट का यूआरएल (लिंक), स्क्रीनशॉट और स्क्रीन रिकॉर्डिंग तुरंत सेव करें, ताकि कानूनी जांच में सबूत मिटाया न जा सके.
  • प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट करें: इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब या एक्स पर 'Report' विकल्प में जाकर 'Impersonation' (फर्जी पहचान) या 'Harassment/Non-consensual content' की शिकायत दर्ज करें. नए आईटी नियमों के मुताबिक प्लेटफॉर्म्स को ऐसी शिकायत पर तय समय में कार्रवाई करनी होती है.
  • साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत: केंद्र सरकार के आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर जाकर या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके सीधे ऑनलाइन एफआईआर दर्ज कराएं.
  • कानूनी धाराएं (BNS और IT Act): भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) कानून की धारा 66E (प्राइवेसी का उल्लंघन) और (आपत्तिजनक सामग्री डालना) के तहत आरोपी को जेल और भारी जुर्माने की सजा हो सकती है.

डीपफेक और एआई क्लोनिंग ने यह तो साबित कर दिया है कि अब इंटरनेट पर जो दिख रहा है, वह सच हो यह जरूरी नहीं. सेलिब्रिटी के पास तो वकीलों की पूरी फौज होती है, लेकिन एक आम नागरिक के लिए सबसे बड़ा हथियार उसकी कानूनी जागरूकता ही है. अगर कभी आपके या आपके किसी जानने वाले के साथ ऐसा खिलवाड़ हो, तो डरकर चुप बैठने के बजाय तुरंत डिजिटल सबूत जुटाएं और कानूनी रास्तों का इस्तेमाल करें.

ये भी पढ़ें: बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (2026) में चुनी गई 9 भारतीय फिल्मों की कहानी, जानें क्या है खास?

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