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कोलकाता: दीघा जगन्नाथ मंदिर में वीआइपी संस्कृति खत्म, आम भक्तों के हाथ होगी रथ की डोर

कोलकाता: दीघा जगन्नाथ मंदिर में वीआइपी संस्कृति खत्म, आम भक्तों के हाथ होगी रथ की डोर

हल्दिया से रंजन माइति की रिपोर्ट

Jagannath Temple: पश्चिम बंगाल के दीघा जगन्नाथ मंदिर में रथयात्रा को लेकर तैयारियां तेज हो गयी हैं. राज्य में राजनीतिक बदलाव के बाद यह पहली रथयात्रा है, जिसकी जिम्मेदारी भाजपा सरकार के हाथों में है. प्रशासन ने इस बार रथयात्रा को अधिक जनकेंद्रित और भक्तों की भागीदारी वाला बनाने का फैसला किया है. इसी कड़ी में दो जुलाई यानी गुरुवार को रथ की मरम्मत और ट्रायल रन किया गया, ताकि रथ की मजबूती, संतुलन और सुरक्षा व्यवस्था का परीक्षण किया जा सके.

वीआइपी संस्कृति को पूरी तरह समाप्त

इस वर्ष की रथयात्रा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वीआइपी संस्कृति को पूरी तरह समाप्त करने का निर्णय लिया गया है. अब न कोई मंत्री, न कोई विशेष अतिथि और न ही कोई सेलिब्रिटी रथ की रस्सी खींचने में प्राथमिकता पायेगा. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि भगवान जगन्नाथ, देव बलराम और देवी सुभद्रा की रथयात्रा में आम भक्त ही रस्सी खींचेंगे और उन्हीं के हाथों भगवान अपनी मौसी घर की यात्रा पर निकलेंगे.

मंदिर परिसर से ‘धाम’ शब्द हटाय गया

29 जून को भव्य तरीके से स्नान यात्रा संपन्न होने के बाद अब रथयात्रा की तैयारियों पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है. दीघा जगन्नाथ मंदिर में इस बार बड़े पैमाने पर रथयात्रा आयोजित होगी. नयी सरकार के कार्यकाल में यह पहला बड़ा धार्मिक आयोजन है. मौजूदा प्रशासन ने मंदिर परिसर से ‘धाम’ शब्द के उपयोग को भी हटा दिया है. पिछली सरकार के समय इस मंदिर को लेकर कई विवाद सामने आये थे. ऐसे में इस बार का आयोजन प्रशासन के लिए विशेष महत्व रखता है. रथयात्रा को लेकर प्रशासन की ओर से कई समीक्षा बैठकें की गयी हैं.

“जनताई जनार्दन” यानी जनता ही भगवान

सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, ट्रैफिक प्रबंधन, आपातकालीन चिकित्सा सेवा और किसी भी अप्रिय घटना से निबटने के लिए विस्तृत योजना बनायी गयी है. दीघा में रथयात्रा के दौरान भारी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं. इसी कारण जिला प्रशासन और पुलिस इस आयोजन को लेकर पूरी तरह सतर्क है. रथयात्रा बंगाल की सांस्कृतिक और धार्मिक भावना से गहराई से जुड़ा पर्व है. 12 महीनों में तेरह पर्व की परंपरा में रथयात्रा का विशेष स्थान है. इस बार दीघा में यह उत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जनभागीदारी का प्रतीक बनने जा रहा है. “जनताई जनार्दन” यानी जनता ही भगवान है, इस भावना को केंद्र में रखकर आयोजन की रूपरेखा तैयार की गयी है.

सभी को सामान अवसर

पूर्व मेदिनीपुर के जिलाधिकारी निरंजन कुमार ने कहा कि दीघा जगन्नाथ मंदिर की रथयात्रा को शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं. श्रद्धालुओं को रथयात्रा में भाग लेने में किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए हर स्तर पर व्यवस्था की गयी है.
वहीं रामनगर के विधायक चंद्रशेखर मंडल ने कहा कि पहले जो लोग जिम्मेदारी संभाल रहे थे, वे आम भक्तों की तुलना में खुद पर अधिक ध्यान देते थे. भक्तों को रथ के करीब तक नहीं आने दिया जाता था. अब उस संस्कृति को बदलने का समय आ गया है. हमारी कोशिश है कि हर श्रद्धालु रथ की रस्सी को छू सके और भगवान के इस महोत्सव का हिस्सा बन सके.

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लोगों के बीच गया सकारात्मक संदेश

नयी व्यवस्था को लेकर आम लोगों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है. श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का असली स्वरूप तभी पूरा होता है जब हर वर्ग का व्यक्ति उसमें शामिल हो सके. वीआइपी और आम लोगों के बीच दूरी इस पर्व की भावना के विपरीत है. इसलिए सरकार का यह फैसला लोगों के बीच सकारात्मक संदेश दे रहा है. कुल मिलाकर दीघा की इस बार की रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रशासनिक और सामाजिक दृष्टि से भी एक बड़ी परीक्षा होगी. सुरक्षा, अनुशासन और जनसहभागिता के संतुलन के साथ सरकार इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाना चाहती है.

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