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गिरिडीह जिले में हाल ही में हुई तेज बारिश, आंधी और ओलावृष्टि से किसानों की सब्जी की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। जमुआ और बगोदर प्रखंड इस प्राकृतिक आपदा से सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं, जहां ओलावृष्टि ने खेतों में लगी सब्जियों को पूरी तरह नष्ट कर दिया। इस नुकसान के कारण आने वाले दिनों में सब्जियों के दाम बढ़ने की आशंका है। विशेष रूप से, जेठूवा सब्जी फसल को भारी क्षति हुई है। इसमें भिंडी, कद्दू, प्याज, टमाटर, झींगा, करेला, बैगन और तरबूज जैसी फसलें शामिल हैं। किसानों ने बताया कि कई खेतों में तैयार फसलें ओलों की मार से बर्बाद हो गईं, जबकि जिन किसानों ने हाल ही में बीज बोए थे, वे भी जमीन के अंदर ही सड़ गए। सबसे अधिक नुकसान भिंडी, प्याज और तरबूज को
प्रभावित किसानों, शिव शंकर राम और निमिया देवी ने बताया कि उन्होंने कर्ज और उधार लेकर खेती की थी। अचानक आई इस आपदा ने उनकी पूरी पूंजी नष्ट कर दी है। उनकी गेहूं, टमाटर, कद्दू, प्याज, भिंडी और झींगा सहित कई फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। सबसे अधिक नुकसान भिंडी, प्याज और तरबूज की फसल में हुआ है। बाजार में सब्जियों की आपूर्ति सकती है
स्थानीय सब्जी विक्रेता सोनू के अनुसार, फिलहाल बाजार में सब्जियों के दाम सामान्य हैं। हालांकि, उन्होंने आशंका जताई कि आने वाले दिनों में कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। सोनू ने बताया कि जो फसलें बर्बाद हुई हैं, वे जेठूवा फसलें थीं, जो कुछ ही दिनों में बाजार में आने वाली थीं। इसके अलावा, हाल ही में बोए गए बीज भी नष्ट हो गए हैं, जिससे बाजार में सब्जियों की आपूर्ति घटेगी और कीमतों पर सीधा असर पड़ेगा। वर्तमान में बाजार में सब्जियों के दाम इस प्रकार हैं
टमाटर 20 रुपए प्रति किलो, भिंडी 40 से 50 रुपए प्रति किलो, कद्दू 30 रुपए प्रति किलो, करेला 50 से 60 रुपए प्रति किलो, बैंगन 60 रुपए प्रति किलो, प्याज 20 रुपए प्रति किलो और झींगा 40 से 50 रुपए प्रति किलो। तरबूज 20 से 30 रुपए प्रति किलो बिक रहा है।
बगोदर के अटका पश्चिमी पंचायत के उमेश मंडल पहली बार एक एकड़ जमीन पर तरबूज की खेती की है। तरबूज फलना भी शुरू हो गया था। इस बीच हुई बेमौसम बारिश के साथ बर्फबारी ने पौधों के साथ तरबूज को भी नष्ट कर दिया है। भुक्तभोगी उमेश मंडल ने बताया कि वे पहली बार तरबूज की खेती की थी, जिसमें लगभग तीन लाख रुपए लागत लग चुके हैं। इसी तरह से अटका पश्चिमी पंचायत के दिलीप प्रसाद डेढ़ एकड़ में पहली बार तरबूज की खेती की है। हजारों की संख्या में तरबूज फला था जो तैयार होने की स्थिति में था। इसी बीच ओले गिरने के कारण तरबूज व पौधे नष्ट हो गए। बताया कि हजारीबाग से तरबूज के पौधे मंगाए थे। तरबूज के अलावा खीरा, टमाटर, लौकी, शिमला मिर्च आदि के पौधे एवं तैयार फसलें भी नष्ट हो गए। उन्होंने बताया कि तीन लाख रुपए से अधिक खर्च हुए थे। प्रभावित क्षेत्रों का जल्द सर्वे कराने की मांग
किसानों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों का जल्द सर्वे कराया जाए और फसल क्षति के आधार पर उचित मुआवजा दिया जाए। किसानों का कहना है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो उनके सामने परिवार चलाने के साथ-साथ अगली फसल की बुवाई करना भी मुश्किल हो जाएगा। मौसम की इस मार से जिले के किसानों के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।


