गुमला जिले के सदर प्रखंड स्थित वृंदा गांव के शिवकुमार यादव ने वैज्ञानिक विधि से टमाटर की खेती कर आत्मनिर्भरता का उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने अपनी मेहनत से लाखों रुपये कमाए हैं और अन्य लोगों को भी रोजगार प्रदान कर रहे हैं। यह उपलब्धि ऐसे क्षेत्र में हासिल हुई है जहां अधिकांश लोग मौसमी खेती के बाद रोजगार की तलाश में पलायन करते हैं। शिवकुमार ने छत्तीसगढ़ में अपने एक रिश्तेदार के यहां लगभग तीन महीने तक रहकर टमाटर की ग्राफ्टेड विधि से खेती का विशेष प्रशिक्षण और जानकारी प्राप्त की। 3 लाख 50 हजार का टमाटर बेच चुके इसके बाद, उन्होंने पूरे परिवार के साथ मिलकर डेढ़ एकड़ जमीन पर ‘साहू’ किस्म के 6000 ग्राफ्टेड टमाटर के पौधे लगाए। उनकी मेहनत अब रंग लाई है। अब तक वे 3 लाख 50 हजार का टमाटर बेच चुके हैं और उन्हें उम्मीद है कि वे अतिरिक्त 2 लाख के टमाटर और बेच लेंगे। शुरुआत में शिवकुमार ने अपने ढाई एकड़ खाली खेत पर गोभी की खेती का प्रयास किया था। एक रिश्तेदार के सुझाव पर शुरू की गई इस खेती में तकनीकी ज्ञान और सिंचाई के अभाव के कारण उन्हें लगभग 2 लाख रुपए का नुकसान हुआ। इस नुकसान के बावजूद, शिवकुमार ने हार नहीं मानी और टमाटर की खेती की। ड्रिप इरिगेशन तकनीक का कर रहे उपयोग शिवकुमार यादव थोक और खुदरा दोनों तरीकों से टमाटर बेचते हैं। कुछ व्यवसायी सीधे खेत से 10 रुपए प्रति किलोग्राम के हिसाब से टमाटर खरीदते हैं, जबकि स्थानीय बाजार में खुदरा बिक्री 20 रुपए प्रति किलोग्राम तक होती है। अपनी खेती के साथ-साथ, शिवकुमार गांव के 5-7 लोगों को समय-समय पर रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं। पहले सिंचाई की काफी कमी थी, लेकिन अब वे ड्रिप इरिगेशन तकनीक का उपयोग कर रहे हैं, जो बेहद कारगर साबित हो रही है
गुमला के किसान ने टमाटर उगाकर कमाए लाखों रुपए:वैज्ञानिक तरीके से खेती कर बने आत्मनिर्भर, अब दे रहे दूसरों को रोजगार
गुमला जिले के सदर प्रखंड स्थित वृंदा गांव के शिवकुमार यादव ने वैज्ञानिक विधि से टमाटर की खेती कर आत्मनिर्भरता का उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने अपनी मेहनत से लाखों रुपये कमाए हैं और अन्य लोगों को भी रोजगार प्रदान कर रहे हैं। यह उपलब्धि ऐसे क्षेत्र में हासिल हुई है जहां अधिकांश लोग मौसमी खेती के बाद रोजगार की तलाश में पलायन करते हैं। शिवकुमार ने छत्तीसगढ़ में अपने एक रिश्तेदार के यहां लगभग तीन महीने तक रहकर टमाटर की ग्राफ्टेड विधि से खेती का विशेष प्रशिक्षण और जानकारी प्राप्त की। 3 लाख 50 हजार का टमाटर बेच चुके इसके बाद, उन्होंने पूरे परिवार के साथ मिलकर डेढ़ एकड़ जमीन पर ‘साहू’ किस्म के 6000 ग्राफ्टेड टमाटर के पौधे लगाए। उनकी मेहनत अब रंग लाई है। अब तक वे 3 लाख 50 हजार का टमाटर बेच चुके हैं और उन्हें उम्मीद है कि वे अतिरिक्त 2 लाख के टमाटर और बेच लेंगे। शुरुआत में शिवकुमार ने अपने ढाई एकड़ खाली खेत पर गोभी की खेती का प्रयास किया था। एक रिश्तेदार के सुझाव पर शुरू की गई इस खेती में तकनीकी ज्ञान और सिंचाई के अभाव के कारण उन्हें लगभग 2 लाख रुपए का नुकसान हुआ। इस नुकसान के बावजूद, शिवकुमार ने हार नहीं मानी और टमाटर की खेती की। ड्रिप इरिगेशन तकनीक का कर रहे उपयोग शिवकुमार यादव थोक और खुदरा दोनों तरीकों से टमाटर बेचते हैं। कुछ व्यवसायी सीधे खेत से 10 रुपए प्रति किलोग्राम के हिसाब से टमाटर खरीदते हैं, जबकि स्थानीय बाजार में खुदरा बिक्री 20 रुपए प्रति किलोग्राम तक होती है। अपनी खेती के साथ-साथ, शिवकुमार गांव के 5-7 लोगों को समय-समय पर रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं। पहले सिंचाई की काफी कमी थी, लेकिन अब वे ड्रिप इरिगेशन तकनीक का उपयोग कर रहे हैं, जो बेहद कारगर साबित हो रही है

