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चुनाव आयोग को हाईकोर्ट ने लगायी फटकार, सहायक प्रोफेसर को पीठासीन अधिकारी बनाने का आदेश रद्द

चुनाव आयोग को हाईकोर्ट ने लगायी फटकार, सहायक प्रोफेसर को पीठासीन अधिकारी बनाने का आदेश रद्द

खास बातें

Calcutta High Court Verdict: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने इलेक्शन कमीशन के एक बड़े फैसले को पलट दिया है. कोर्ट ने चुनाव आयोग द्वारा सहायक प्रोफेसरों को पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) नियुक्त करने के आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है.

सरकारी कॉलेज शिक्षक संघ की याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला

जस्टिस कृष्ण राव की पीठ ने यह फैसला पश्चिम बंगाल सरकारी कॉलेज शिक्षक संघ की याचिका पर सुनाया है. इस फैसले के बाद अब 23 और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए चुनाव आयोग को नये सिरे से अधिकारियों की व्यवस्था करनी होगी. उनको ट्रेनिंग भी देनी होगी.

क्या था पूरा मामला?

पश्चिम बंगाल के सरकारी कॉलेजों के सहायक प्रोफेसरों ने खुद को चुनाव कार्य में लगाये जाने के फैसले को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था. याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि वे ‘ग्रुप-ए’ स्तर के राजपत्रित अधिकारी और सहायक प्रोफेसर हैं. इसके बावजूद चुनाव आयोग ने उनके वेतन स्तर और पद की गरिमा को दरकिनार कर उन्हें मतदान केंद्रों पर पीठासीन अधिकारी की जिम्मेदारी सौंप दी.

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याचिका में निर्वाचन आयोग के ही 16 फरवरी 2010 के एक परिपत्र (Circular) का हवाला दिया गया. इस नियम के मुताबिक, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के वरिष्ठ शिक्षण कर्मचारियों को मतदान केंद्रों की ड्यूटी पर तब तक नहीं लगाया जा सकता, जब तक कि जिला निर्वाचन अधिकारी लिखित में कोई विशेष और अपरिहार्य कारण न बतायें.

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Calcutta High Court Verdict: अदालत की सख्त टिप्पणी- दस्तावेज कहां हैं?

सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्ण राव ने चुनाव आयोग के अधिकारियों से कड़ी पूछताछ की. कोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिकारी ऐसा कोई भी दस्तावेज पेश करने में नाकाम रहे, जिससे यह साबित हो सके कि किन विशेष परिस्थितियों में इन सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति अनिवार्य हो गयी थी. हाईकोर्ट ने कहा कि सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति चुनाव आयोग के अपने पुराने दिशा-निर्देशों का सीधा उल्लंघन है.

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चुनाव आयोग की दलील- 90 हजार बूथों पर वरिष्ठता देखना मुश्किल

निर्वाचन आयोग के वकील ने अदालत में अपनी विवशता जाहिर करते हुए कहा कि राज्य में 23 और 29 अप्रैल को होने वाले चुनाव के लिए लगभग 90,000 मतदान केंद्र बनाये गये हैं. इतने बड़े पैमाने पर चुनाव कराने के लिए अधिकारियों की विस्तृत वरिष्ठता सूची तैयार करना और श्रेणियों में टकराव को रोकना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं हो पा रहा है. हालांकि, अदालत ने इस तर्क को पर्याप्त नहीं माना और प्रोफेसरों को राहत दे दी.

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चुनाव प्रक्रिया पर क्या होगा असर?

अब जब मतदान में कुछ ही दिन बचे हैं, चुनाव आयोग के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गयी हैं.

  • नयी नियुक्तियां : आयोग को अब उन सहायक प्रोफेसरों की जगह दूसरे अधिकारियों को तैनात करना होगा, जिन्हें पीठासीन अधिकारी बनाया गया था.
  • ट्रेनिंग का मुद्दा : नये नियुक्त होने वाले अधिकारियों को कम समय में चुनावी प्रक्रिया की ट्रेनिंग देना भी एक बड़ी चुनौती होगी.

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