Chapra News: बिहार के छपरा की बेटी दिव्यांशी सिंह ने ऐसा इतिहास रच दिया है जिस पर पूरा राज्य गर्व कर रहा है. साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने भारतीय वायुसेना में अधिकारी बनने का सपना साकार किया है. दिव्यांशी भारतीय वायुसेना की ग्राउंड ड्यूटी (लॉजिस्टिक्स) शाखा में कमीशन प्राप्त करने वाली पहली पूर्व एनडीए महिला कैडेट बनने जा रही हैं. उनकी यह उपलब्धि देशभर की बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है.
पिता की वर्दी देखकर जगा था देशसेवा का सपना
दिव्यांशी सिंह के जीवन की प्रेरणा उनके पिता रहे हैं, जो भारतीय वायुसेना में जूनियर वारंट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं. बचपन से उन्होंने अपने पिता को वर्दी में देश की सेवा करते देखा. घर में सुनाई जाने वाली साहस, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की कहानियों ने उनके मन में भी देशसेवा का जज्बा पैदा किया.
महिलाओं के लिए खुले एनडीए के दरवाजे
जब महिलाओं के लिए नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) के दरवाजे खुले, तब दिव्यांशी ने इसे अपने सपनों को उड़ान देने का अवसर माना. उन्होंने कठिन प्रवेश परीक्षा पास कर देश के सबसे प्रतिष्ठित और चुनौतीपूर्ण सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों में अपनी जगह बनाई.
सुबह की परेड से कठिन प्रशिक्षण तक
एनडीए में प्रशिक्षण का सफर आसान नहीं था. कठोर शारीरिक अभ्यास, अनुशासन, मानसिक मजबूती और नेतृत्व क्षमता की लगातार परीक्षा होती है. लेकिन दिव्यांशी ने हर चुनौती का डटकर सामना किया और अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया. अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन और नेतृत्व कौशल के बल पर दिव्यांशी को कैडेट क्वार्टर मास्टर सार्जेंट (CQMS) जैसी प्रतिष्ठित जिम्मेदारी सौंपी गई. यह पद केवल उन कैडेटों को मिलता है जो संगठनात्मक क्षमता, अनुशासन और नेतृत्व में श्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं.
तीन साल की कठिन तपस्या के बाद मिला सफलता का मुकाम
एनडीए में बिताए गए तीन वर्षों ने दिव्यांशी को एक मजबूत, आत्मविश्वासी और सक्षम सैन्य अधिकारी के रूप में तैयार किया. यहां उन्होंने न केवल सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया बल्कि टीम भावना, जिम्मेदारी और निस्वार्थ सेवा के मूल्यों को भी आत्मसात किया.

अब भारतीय वायुसेना में निभाएंगी अहम जिम्मेदारी
दिव्यांशी सिंह अब भारतीय वायुसेना की ग्राउंड ड्यूटी (लॉजिस्टिक्स) शाखा में अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं देंगी. यह जिम्मेदारी वायुसेना के संचालन, संसाधन प्रबंधन और विभिन्न लॉजिस्टिक कार्यों में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है.
बिहार की बेटियों के लिए बनीं नई मिसाल
दिव्यांशी की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि बिहार और देश की हजारों बेटियों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है. उन्होंने यह साबित कर दिया कि मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के दम पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है.
छपरा की गलियों से वायुसेना तक
छपरा की बेटी दिव्यांशी सिंह की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि सफलता के लिए बड़े शहर नहीं, बल्कि बड़े सपने और उन्हें पूरा करने का साहस जरूरी होता है. उनकी यह ऐतिहासिक उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए प्रेरित करती रहेगी.
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