जहानाबाद में सफाई कर्मियों और रसोइयों ने डीईओ कार्यालय के समक्ष एकदिवसीय धरना दिया। यह धरना मानदेय बढ़ाने और ठेकेदारी प्रथा समाप्त करने की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। भाकपा माले नेता रामाधार शर्मा ने बताया कि सफाई कर्मियों को मात्र 500 रुपये मानदेय दिया जाता है। उन्होंने कहा कि इस महंगाई के दौर में इतने कम पैसे में किसी व्यक्ति के लिए जीवन यापन करना असंभव है। ठेकेदारों द्वारा किया जा रहा शोषण शर्मा ने आगे कहा कि सफाई कर्मी विद्यालयों और शौचालयों की साफ-सफाई का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं, लेकिन उन्हें न तो उचित मानदेय मिलता है और न ही सम्मान। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदारी प्रथा के तहत रखे गए इन कर्मियों का ठेकेदारों और विद्यालय के शिक्षकों द्वारा लगातार शोषण किया जा रहा है। रसोइयों की स्थिति भी समान है; उन्हें भी उचित मानदेय नहीं मिल रहा है, जिससे उनके परिवार का भरण-पोषण नहीं हो पा रहा है। वे विद्यालय खुलने से लेकर शाम तक काम करती हैं, लेकिन उन्हें बहुत कम भुगतान किया जाता है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की है कि सफाई कर्मियों के लिए ठेकेदारी प्रथा को समाप्त किया जाए और उन्हें उचित मानदेय व सम्मान दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे सड़क से लेकर संसद तक आंदोलन करेंगे और सरकार को अपनी मांगें मानने के लिए बाध्य करेंगे।
जहानाबाद में सफाई कर्मियों का धरना:मानदेय बढ़ाने और ठेकेदारी प्रथा खत्म करने की मांग,कहा-उचित सम्मान दिया जाए
जहानाबाद में सफाई कर्मियों और रसोइयों ने डीईओ कार्यालय के समक्ष एकदिवसीय धरना दिया। यह धरना मानदेय बढ़ाने और ठेकेदारी प्रथा समाप्त करने की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। भाकपा माले नेता रामाधार शर्मा ने बताया कि सफाई कर्मियों को मात्र 500 रुपये मानदेय दिया जाता है। उन्होंने कहा कि इस महंगाई के दौर में इतने कम पैसे में किसी व्यक्ति के लिए जीवन यापन करना असंभव है। ठेकेदारों द्वारा किया जा रहा शोषण शर्मा ने आगे कहा कि सफाई कर्मी विद्यालयों और शौचालयों की साफ-सफाई का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं, लेकिन उन्हें न तो उचित मानदेय मिलता है और न ही सम्मान। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदारी प्रथा के तहत रखे गए इन कर्मियों का ठेकेदारों और विद्यालय के शिक्षकों द्वारा लगातार शोषण किया जा रहा है। रसोइयों की स्थिति भी समान है; उन्हें भी उचित मानदेय नहीं मिल रहा है, जिससे उनके परिवार का भरण-पोषण नहीं हो पा रहा है। वे विद्यालय खुलने से लेकर शाम तक काम करती हैं, लेकिन उन्हें बहुत कम भुगतान किया जाता है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की है कि सफाई कर्मियों के लिए ठेकेदारी प्रथा को समाप्त किया जाए और उन्हें उचित मानदेय व सम्मान दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे सड़क से लेकर संसद तक आंदोलन करेंगे और सरकार को अपनी मांगें मानने के लिए बाध्य करेंगे।

