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झारखंड में पहले जनगणना, फिर होगा एसआईआर का काम, सीएम की मंजूरी


झारखंड में एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) का काम अटक गया है। पहले जनगणना होगी, फिर एसआईआर का काम शुरू होगा। झारखंड ही नहीं, एसआईआर से बचे हुए अन्य राज्यों में भी ऐसा ही होगा। हालांकि एसआईआर के पहले की सारी तैयारियां पहले की तरह चलती रहेंगी। झारखंड सरकार ने 1 से 15 मई तक के लिए सेल्फ गणना और 16 मई से 14 जून तक हाउस लिस्टिंग का कार्यक्रम तय किया है। मुख्यमंत्री ने इस पर स्वीकृति दे दी है। जल्द ही कार्यक्रम की अधिसूचना जारी होगी।भारत निर्वाचन आयोग ने एसआईआर के दूसरे चरण की घोषणा करते हुए कहा था कि अप्रैल-मई में एसआईआर का तीसरा और अंतिम चरण शुरू होगा। इसके अंतर्गत झारखंड में भी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण होना था। पर, निर्वाचन आयोग और भारत जनगणना महानिदेशालय से मिली जानकारी के अनुसार पहले जनगणना होगी, फिर एसआईआर होगा। दरअसल जनगणना और एसआईआर, दोनों के लिए समान फील्ड वर्करों की जरूरत होती है। दोनों अभियान में बीएलओ, शिक्षक, आंगनबाड़ी सेविका और पंचायत सचिव लगाए जाते हैं। एक ही समय में एक ही कर्मचारी-अधिकारी दोनों काम में नहीं लगाए जा सकते हैं। 72 प्रतिशत वोटरों की वर्ष 2003 की मतदाता सूची से पूरी हो चुकी मैपिंग {2003 की मतदाता सूची से मैपिंग का काम करीब 72 प्रतिशत पूरा हो चुका है। राज्य में कुल 2.65 मतदाता हैं, जिनमें करीब 1.93 करोड़ की मैपिंग हो चुकी है। मैपिंग के लिए पाकुड़ को सर्वश्रेष्ठ जिला घोषित किया गया है। {28% मतदाता या तो 2003 के बाद शिफ्ट हो गए हैं, या उनके माता-पिता का नाम अभी नहीं मिला। इन्हें आवश्यक दस्तावेज देने होंगे। {6.72 लाख मतदाताओं में त्रुटि ली है। 5.44 लाख फोटो खराब है। 1.28 लाख नाम में गलती है। बीएलओ इसे ठीक कर रहे हैं। {मृत, शि​​फ्टेड और डुप्लीकेट मतदाताओं की संख्या करीब 10 लाख होने की संभावना है। एसआईआर का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना है। पूर्व की सूची में दर्ज वैसे मतदाता, जिन की मौत हो चुकी है, उनका नाम वोटर लिस्ट से हटाया जाएगा। जो लोग स्थाई रूप से दूसरी जगह शिफ्ट हो गए हैं, वैसे लोगों की पहचान कर वोटर लिस्ट से उनका नाम हटाया जाएगा। साथ ही सभी पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे।

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