झारखंड राज्यसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने शनिवार अपने प्रत्याशी की घोषणा कर दी। झामुमो ने पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम को अपना राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। दूसरे प्रत्याशी के नाम की घोषणा फिलहाल नहीं की गई है। बैद्यनाथ राम 8 जून को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उपस्थिति में अपना नामांकन दाखिल करेंगे। झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने शनिवार को उनकी उम्मीदवारी की घोषणा की। बैजनाथ राम अभी झामुमो के केंद्रीय उपाध्यक्ष हैं बैजनाथ राम अभी झामुमो के केंद्रीय उपाध्यक्ष हैं और लातेहार के रहने वाले हैं। इन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा गांव में प्राप्त की। मैट्रिक और इंटर बालक उच्च विद्यालय, लातेहार से किया। शिक्षा पूरी करने के बाद बैद्यनाथ राम लातेहार में टीचर थे। 2000 में वो शिक्षक की नौकरी छोड़कर राजनीति में आ गए। बैद्यनाथ राम झारखंड के खेल, मद्य निषेध और शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। बैद्यनाथ राम का राजनीतिक रिकॉर्ड
2000 में पहली बार जदयू से लातेहार विधायक का चुनाव लड़े और निर्वाचित।
2000–2005 – झारखंड की एनडीए सरकार में मंत्री रहे।
2005 – विधानसभा चुनाव हार गए, प्रकाश राम विजय हुए थे।
2009 – भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े ओर दूसरी बार विधायक निर्वाचित हुए
2010–2013 – अर्जुन मुंडा सरकार में दोबारा मंत्री बने। इस समय शिक्षा, उत्पाद विभाग के मंत्री बनाए गए।
2014 के विधान सभा में भाजपा टिकट नहीं दी तो चुनाव नहीं लड़े
2019 में भाजपा छोड़ कर झामुमो में शामिल हो गए। झामुमो के टिकट से तीसरी बार विधायक निर्वाचित हुए।
2024 में हेमंत सोरेन की सरकार में छह माह के लिए मंत्री बनाए गए।
2024 के विधानसभा चुनाव में पराजित हुए। भाजपा के प्रकाश राम ने महज 434 वोट से पराजित किया। प्रणव झा राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी
इधर, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के राजनीतिक सलाहकार प्रणव झा राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी बनाए गए हैं। महागठबंधन एकजुट रहा तो हो सकती है जीत महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं। राज्यसभा की एक सीट पर जीत के लिए 28 विधायकों की जरूरत है। कांग्रेस के पास 16 और झामुमो के पास 34 विधायक हैं। ऐसे में प्रथम वरीयता के 28 वोट के बाद झामुमो के छह वोट बचेंगे। वहीं, राजद के चार और माले के दो विधायक हैं। यानी कुल मिलाकर 28 वोट होते हैं। अगर सभी एकजुट रहे तो कांग्रेस की जीत भी पक्की हो जाएगी। लेकिन अगर क्रॉस वोटिंग हुई तो मामला फंस सकता है।

