नालंदा के बिहारशरीफ को जाम की समस्या से राहत मिल गई है। भरावपर से सोगरा कॉलेज तक बनाए गए शहर के पहले फ्लाईओवर का उद्घाटन पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से 26 मार्च को किया गया। 84 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बने इस फ्लाईओवर के चालू होने से शहरवासियों को आवागमन में सुविधा तो हो रही है, लेकिन निर्माण काम में बरती गई लापरवाही ने पुल के नीचे से गुजरने वाले राहगीरों के मन में खौफ पैदा कर दिया है। पांच साल का इंतज़ार खत्म, शहर को मिली नई पहचान तमाम बाधाओं और विरोधों को पार करते हुए शहर की यह नई पहचान 26 मार्च 2026 को पूरी तरह से बनकर तैयार हुई है। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत बने इस फ्लाईओवर की कुल लंबाई लगभग 1.6 किलोमीटर और चौड़ाई 8.9 मीटर है। साल 2022 में शुरू हुए इस निर्माण कार्य का मुख्य उद्देश्य शहर के प्रमुख जाम वाले स्थानों—कारगिल चौक, एलआईसी मोड़ और भरावपर पर यातायात का दबाव कम करना था, जिसमें यह काफी हद तक सफल भी रहा है। राहत के बीच हादसे का डर और एजेंसी की लापरवाही फलाईओवर के ऊपर से भले ही गाड़ियां सरपट दौड़ रही हों, लेकिन नीचे से गुजरने वाले लोगों और स्थानीय दुकानदारों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है। निर्माण एजेंसी की लापरवाही का आलम यह है कि पुल के नीचे की शटरिंग प्लेटें, लोहे के खंभे और छड़ें अभी भी उसी तरह लटक रही हैं। इसके साथ ही जल निकासी वाले पाइपों को भी खुला छोड़ दिया गया है। स्थानीय निवासी नवीन कुमार बताते हैं कि ऊपर से लगातार गाड़ियों का आना-जाना हो रहा है और लटकते लोहे के खंभे कब नीचे गिर जाएं, इसका कोई ठिकाना नहीं है। पाइपों के अधूरे काम के कारण दुर्घटना का भय हमेशा बना रहता है। वहीं, एक अन्य स्थानीय दुकानदार अशोक कुमार ने अपना डर जाहिर करते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति नीचे खड़ा हो और ऊपर से कोई भारी वस्तु गिर जाए, तो सीधे तौर पर उसकी जान जा सकती है। उन्होंने बताया कि पानी के पाइप भी आपस में जुड़े नहीं हैं, जिससे पानी सीधा सड़क पर गिरता है और आने वाले बरसात के दिनों में यह एक बड़ी मुसीबत बन जाएगा। स्थानीय निवासी रणजीत कुमार ने भी निर्माण कार्य में बरती गई इसे घोर लापरवाही करार दिया है। उनका कहना है कि पुल के नीचे की मुख्य सड़क पूरी तरह चालू है और भारी भीड़ इसी रास्ते से गुजरती है, ऐसे में जहां-तहां से निकली छड़ें किसी बड़े खतरे से कम नहीं हैं। प्रशासन ने दिया तुरंत कार्रवाई का आश्वासन लोगों की इन गंभीर शिकायतों और भय के माहौल पर संज्ञान लेते हुए नगर आयुक्त कुमार निशान्त विवेक ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इस मामले से संबंधित अधिकारी और निर्माण एजेंसी को तुरंत अवगत करा दिया जाएगा। नगर आयुक्त ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही फ्लाईओवर के नीचे लगी शटरिंग प्लेटों और लटकते लोहे को हटा लिया जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके। अब शहरवासियों को इंतजार है कि प्रशासन और संबंधित एजेंसी जल्द से जल्द इन खामियों को दुरुस्त करें, ताकि करोड़ों की लागत से बना शहर का यह पहला फ्लाईओवर लोगों के लिए सिर्फ सहूलियत का साधन बने।
नालंदा में 84 करोड़ के फ्लाईओवर से जाम से राहत:लटकती शटरिंग-खुले पाइपों से दहशत में लोग, नगर आयुक्त बोले- जल्द कार्रवाई होगी
नालंदा के बिहारशरीफ को जाम की समस्या से राहत मिल गई है। भरावपर से सोगरा कॉलेज तक बनाए गए शहर के पहले फ्लाईओवर का उद्घाटन पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से 26 मार्च को किया गया। 84 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बने इस फ्लाईओवर के चालू होने से शहरवासियों को आवागमन में सुविधा तो हो रही है, लेकिन निर्माण काम में बरती गई लापरवाही ने पुल के नीचे से गुजरने वाले राहगीरों के मन में खौफ पैदा कर दिया है। पांच साल का इंतज़ार खत्म, शहर को मिली नई पहचान तमाम बाधाओं और विरोधों को पार करते हुए शहर की यह नई पहचान 26 मार्च 2026 को पूरी तरह से बनकर तैयार हुई है। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत बने इस फ्लाईओवर की कुल लंबाई लगभग 1.6 किलोमीटर और चौड़ाई 8.9 मीटर है। साल 2022 में शुरू हुए इस निर्माण कार्य का मुख्य उद्देश्य शहर के प्रमुख जाम वाले स्थानों—कारगिल चौक, एलआईसी मोड़ और भरावपर पर यातायात का दबाव कम करना था, जिसमें यह काफी हद तक सफल भी रहा है। राहत के बीच हादसे का डर और एजेंसी की लापरवाही फलाईओवर के ऊपर से भले ही गाड़ियां सरपट दौड़ रही हों, लेकिन नीचे से गुजरने वाले लोगों और स्थानीय दुकानदारों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है। निर्माण एजेंसी की लापरवाही का आलम यह है कि पुल के नीचे की शटरिंग प्लेटें, लोहे के खंभे और छड़ें अभी भी उसी तरह लटक रही हैं। इसके साथ ही जल निकासी वाले पाइपों को भी खुला छोड़ दिया गया है। स्थानीय निवासी नवीन कुमार बताते हैं कि ऊपर से लगातार गाड़ियों का आना-जाना हो रहा है और लटकते लोहे के खंभे कब नीचे गिर जाएं, इसका कोई ठिकाना नहीं है। पाइपों के अधूरे काम के कारण दुर्घटना का भय हमेशा बना रहता है। वहीं, एक अन्य स्थानीय दुकानदार अशोक कुमार ने अपना डर जाहिर करते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति नीचे खड़ा हो और ऊपर से कोई भारी वस्तु गिर जाए, तो सीधे तौर पर उसकी जान जा सकती है। उन्होंने बताया कि पानी के पाइप भी आपस में जुड़े नहीं हैं, जिससे पानी सीधा सड़क पर गिरता है और आने वाले बरसात के दिनों में यह एक बड़ी मुसीबत बन जाएगा। स्थानीय निवासी रणजीत कुमार ने भी निर्माण कार्य में बरती गई इसे घोर लापरवाही करार दिया है। उनका कहना है कि पुल के नीचे की मुख्य सड़क पूरी तरह चालू है और भारी भीड़ इसी रास्ते से गुजरती है, ऐसे में जहां-तहां से निकली छड़ें किसी बड़े खतरे से कम नहीं हैं। प्रशासन ने दिया तुरंत कार्रवाई का आश्वासन लोगों की इन गंभीर शिकायतों और भय के माहौल पर संज्ञान लेते हुए नगर आयुक्त कुमार निशान्त विवेक ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इस मामले से संबंधित अधिकारी और निर्माण एजेंसी को तुरंत अवगत करा दिया जाएगा। नगर आयुक्त ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही फ्लाईओवर के नीचे लगी शटरिंग प्लेटों और लटकते लोहे को हटा लिया जाएगा, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके। अब शहरवासियों को इंतजार है कि प्रशासन और संबंधित एजेंसी जल्द से जल्द इन खामियों को दुरुस्त करें, ताकि करोड़ों की लागत से बना शहर का यह पहला फ्लाईओवर लोगों के लिए सिर्फ सहूलियत का साधन बने।

