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पटना के ‘वेस्ट टू वंडर’ थीम पार्क का निर्माण कार्य 90% पूरा हो चुका है। सभी कलाकृतियों को स्क्रैप से बनाया जा रहा है। अब इसके लाइटिंग और लैंडस्कैपिंग का काम शुरू किया जाएगा। सभी मॉन्यूमेंट्स पर उसके थीम के हिसाब से लाइटिंग की जाएगी। इसमें खास तरह की वार्म लाइट का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसे दिल्ली से मंगाया जा रहा है। इस लाइटिंग को प्रयागराज के तर्ज पर लगाया जाएगा। वहीं, महाबोधि मंदिर की आकृति के सभी 11 फ्लोर पर विशेष लाइटिंग की जाएगी, ताकि वह आकर्षक दिखे। अगस्त महीने में इसके उद्घाटन की संभावना है।
इसमें 3 तरह के पार्क का हो रहा निर्माण वहीं, स्ट्रीट लाइट और हाई मास्ट लाइट भी स्थापित की जाएगी। दूसरी ओर लैंडस्कैपिंग के लिए अलग-अलग प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे, जो कि पटना में पहले कभी देखने को नहीं मिले हो। इसके अलावा तीन तरह के पार्क बनाए जाएंगे, जिसमें बच्चों का अलग एरिया, बड़ों का अलग एरिया और यंगस्टर्स के लिए अलग पार्क का एरिया होगा। पार्क में ज्यादातर प्रतिमाएं और कलाकृतियां लगभग तैयार हो चुकी है। सिविल निर्माण कार्य में हो रही देरी के कारण स्थापित नहीं किया जा सका है। निर्माण कार्य पूरे होने के साथ सभी कलाकृतियां और प्रतिमाएं पार्क में स्थापित हो जाएगी। 9 एकड़ में 15 करोड़ की लागत से हो रहा निर्माण पटना में कबाड़ से पार्क का निर्माण किया जा रहा है। बिहार की सभ्यताओं को दर्शाने वाले इस पार्क का शिलान्यास मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अगस्त 2025 में किया था, जिसका काम शुरू हो चुका है। इसका नाम ‘डॉ राजेंद्र प्रसाद बिहार गौरव पार्क’ रखा जाएगा। यह एक ‘वेस्ट टू वंडर’ थीम पार्क है, जिसे बनाने के लिए स्क्रैप को दिल्ली से मंगाया गया है। जेपी गंगा पथ (मरीन ड्राइव) और डॉ. राजेंद्र प्रसाद की समाधि स्थल के बीच 9 एकड़ में 15 करोड़ की लागत से इसका निर्माण किया जा रहा है। 38 तरह की कलाकृतियां बनाई जा रही बुडको द्वारा निर्माण किए जा रहे इस पार्क में बिहार के फेमस स्मारकों को स्क्रैप के माध्यम से तैयार किया जा रहा है। इसमें 38 तरह की कलाकृतियां बनाई जा रही है, जिसमें बिहार के ऐतिहासिक स्मारक, पेंटिंग, मूर्तियां और जानवर शामिल हैं। इस पार्क में टायर, चूड़ियां, टूटे पाइप, इलेक्ट्रिक वेस्ट, बोतलें और धातु के कबाड़ जैसी सामग्रियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। गुजरात के आर्टिस्ट कर रहे हैं कबाड़ से कलाकृति तैयार कबाड़ से कलाकृति बनाने के लिए आर्टिस्ट गुजरात से आए हैं। वहीं मूर्तियों का निर्माण ओड़िशा के कारीगर कर रहे हैं। इस पार्क को चारों ओर और फूड कोर्ट को मधुबनी पेंटिंग, मंजूषा आर्ट, टिकुली कला और सुजनी आर्ट से सजाया जाएगा। इस पार्क को बनाने का मुख्य उद्देश्य कबाड़ से कलाकृतियां बनाकर पर्यावरण जागरूकता फैलाना, ‘स्वच्छ भारत अभियान’ को बढ़ावा देना है। यह शहर को सुंदर बनाने और लोगों को कचरे के सही इस्तेमाल के बारे में भी बताएगा।

