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गयाजी में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और बेहतर बनाने के साथ ही पितृपक्ष मेले की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस मेले में पहुंचते हैं। बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने जिला अतिथि गृह सभागार में शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ जिले की शैक्षणिक व्यवस्था की समीक्षा की। जिला प्रशासन ने पितृपक्ष मेले के लिए 44 आवास स्थलों पर करीब 12,070 श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था की है। शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने सरकारी स्कूलों, छात्रों के दाखिले, शिक्षकों की संख्या और आधुनिक सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि गयाजी जिले में 24 प्रखंड हैं और साक्षरता दर 63.67 प्रतिशत है। जिले में 332 पंचायत और 2,889 राजस्व ग्राम हैं। गयाजी में कुल 3,449 सरकारी स्कूल चल रहे हैं, जिनमें करीब 6.61 लाख छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। इन स्कूलों में 24,386 शिक्षक हैं और छात्र-शिक्षक अनुपात 27:1 है। उन्होंने कहा कि बेहतर शिक्षा के लिए शिक्षकों की संख्या बढ़ाने पर लगातार काम हो रहा है। स्कूलों में पढ़ाई का स्तर सुधरेगा डॉ. प्रेम कुमार ने बताया कि BPSC TRE 1, 2 और 3 के जरिए करीब 10,211 शिक्षकों की भर्ती हुई है। उन्होंने कहा कि पर्याप्त शिक्षक होने से स्कूलों में पढ़ाई का स्तर सुधरेगा और छात्रों को विषय के हिसाब से पढ़ाई कराने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, टेक्नोलॉजी आधारित और बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। गयाजी में 33 पीएम श्री स्कूल चुने गए हैं, जिनमें 31 हाई स्कूल और 2 मिडिल स्कूल शामिल हैं। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी सुविधाओं और छात्रों के पूरे विकास पर ध्यान दिया जा रहा है।
29 आदर्श विद्यालयों में स्मार्ट क्लास से प्रतियोगी परीक्षा तक तैयारी
गयाजी जिले में 29 सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालय) भी संचालित हैं। इन विद्यालयों के माध्यम से सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को निजी विद्यालयों जैसी आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। आदर्श विद्यालयों में आईआईटी-जेईई और नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष लाइव कक्षाएं, 24×7 विद्या साथी लाइव क्लास और डाउट सॉल्विंग की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। स्मार्ट क्लासरूम, स्मार्ट टीवी, हाई-स्पीड इंटरनेट, डिजिटल उपकरण, विज्ञान की आधुनिक प्रयोगशालाएं और डिजिटल पुस्तकालय जैसी सुविधाओं को भी विकसित किया जा रहा है।
डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए खेल, शारीरिक गतिविधियों, संगीत और रचनात्मक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्थिति, विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति, स्वच्छता और आधारभूत सुविधाओं की लगातार निगरानी का निर्देश दिया।
पितृपक्ष में 44 आवासन स्थल, 12,070 श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था
पितृपक्ष मेला में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। जिले में कुल 44 आवासन स्थल चिह्नित किए गए हैं, जहां करीब 12,070 तीर्थयात्रियों के ठहरने की क्षमता विकसित की गई है। आवासन स्थलों पर पेयजल, चेंजिंग रूम, शौचालय, स्नानागार, पर्याप्त रोशनी, पंखे और जरूरी दूरभाष नंबरों की जानकारी वाले साइनेज लगाए गए हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को देखते हुए मेडिकल टीमों की तैनाती की गई है। किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए फायर सेफ्टी की व्यवस्था भी की गई है। प्रशासन ने आवासन स्थलों पर 24 घंटे सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की है। सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और पुलिस बल और दंडाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई है।
निगमा मोनास्ट्री में सबसे अधिक 2,400 श्रद्धालुओं की क्षमता
प्रमुख आवासन स्थलों में निगमा मोनास्ट्री में 2,400, मगध विश्वविद्यालय परीक्षा भवन में 1,200 और मानवीकी भवन गयाजी कॉलेज में 800 श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था है। इसके अलावा राम रुचि बालिका इंटर विद्यालय में 520, महावीर इंटर विद्यालय में 500, टी मॉडल इंटर विद्यालय और हरिदास सेमिनरी विद्यालय में 400-400 श्रद्धालुओं के आवासन की व्यवस्था की गई है।
प्रशासन का लक्ष्य है कि पितृपक्ष के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधाजनक वातावरण मिले।
