
खास बातें
Supreme Court Blow for Mamata Banerjee: बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले प्रशासनिक फेरबदल को लेकर जारी कानूनी लड़ाई में निर्वाचन आयोग (ECI) की जीत हुई है. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राज्य में 1,000 से अधिक पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया.
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए इसे देश का ‘दुर्भाग्य’ बताया कि अखिल भारतीय सेवाओं के निर्माण का मूल उद्देश्य विफल हो रहा है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव के दौरान राज्य के बाहर से पर्यवेक्षकों की नियुक्ति एक सामान्य प्रक्रिया है.
दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की गहरी खाई
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार और चुनाव आयोग के बीच भरोसे की कमी पर चिंता जतायी. पीठ ने कहा कि आयोग को राज्य के अधिकारियों पर भरोसा नहीं है और राज्य सरकार को आयोग के द्वारा लाये गये अधिकारियों पर यकीन नहीं है.
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चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने याद दिलाया कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान भी अदालत को न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति करनी पड़ी थी, क्योंकि पक्षों के बीच विश्वास की कमी थी.
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हालांकि, कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी, लेकिन भविष्य के लिए यह सवाल खुला रखा कि क्या चुनाव आयोग को तबादलों से पहले राज्य सरकार से परामर्श करना अनिवार्य है.
1100 अधिकारियों का रातोंरात तबादला, क्या था विवाद?
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने दलील दी कि बंगाल के इतिहास में पहली बार मुख्य सचिव, डीजीपी और कई पुलिस अधीक्षकों का इस तरह तबादला किया गया है. आरोप लगाया गया कि चुनाव अधिसूचना जारी होते ही लगभग 1,100 अधिकारियों को रातोंरात बदल दिया गया.
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Supreme Court Blow for Mamata Banerjee: अदालत ने की गंभीर टिप्पणी
कल्याण बनर्जी की दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. न ही सिर्फ बंगाल में हुआ है. सीजेआई ने पूछा कि जब सभी अधिकारी बंगाल कैडर के ही हैं, तो उन्हें ‘ए’ पद पर रखा जाये या ‘बी’ पर, इससे क्या फर्क पड़ता है?
बंगाल चुनाव मुकदमों के लिए सुनहरा अवसर : जस्टिस बागची
पीठ में शामिल जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि चुनावी मुकदमों के लिहाज से पश्चिम बंगाल के चुनाव एक ‘सुनहरा अवसर’ साबित हुए हैं. कोर्ट ने यह भी साफ किया कि निष्पक्ष चुनाव के लिए राज्य के बाहर से पर्यवेक्षक नियुक्त करना हमेशा से एक आदर्श प्रक्रिया रही है.
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कलकत्ता हाईकोर्ट के 31 मार्च के आदेश को बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फिलहाल हस्तक्षेप करने से मना कर दिया है. बंगाल की 294 सीटों के लिए 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है, और इस फैसले ने चुनाव आयोग के हाथ मजबूत कर दिये हैं.
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