
कोलकाता से अमर शक्ति प्रसाद की रिपोर्ट
पश्चिम बंगाल में करीब पांच दशक से जारी औद्योगिक ठहराव को समाप्त करने के लिए राज्य की नयी सरकार ने कॉर्पोरेट रणनीति तैयार की है. राज्य में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआइ) आकर्षित करने के लिए सरकार विदेशों में पेशेवर कॉर्पोरेट सलाहकार कंपनियां नियुक्त करेगी. इन कंपनियों का मुख्य दायित्व वैश्विक मंच पर पश्चिम बंगाल की ”बिजनेस फ्रेंडली” छवि को प्रस्तुत करना और विदेशी उद्योगपतियों को राज्य में निवेश तथा फैक्ट्रियां स्थापित करने के लिए आकर्षित करना होगा.
लैंड बैंक के लिए बनेगी त्रिस्तरीय सूची
राज्य सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, नबान्न भवन में उद्योग मामलों से जुड़े मंत्रियों के समूह की पहली उच्चस्तरीय बैठक में यह रणनीतिक फैसला लिया गया. बैठक में निवेश प्रस्तावों के साथ उद्योगों के लिए जमीन की उपलब्धता पर भी गंभीर मंथन हुआ. सूत्रों के मुताबिक, पिछली सरकार के कार्यकाल में जमीन का कोई व्यवस्थित डेटा बैंक तैयार नहीं किया गया था, जिससे प्रशासन को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इसे देखते हुए सरकार ने राज्य में उपलब्ध सभी अव्यवस्थित और खाली पड़ी जमीनों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया है.
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तीन तरह की जमीनों की होगी पहचान
बैठक में तीन श्रेणियों की जमीनों की पहचान करने का प्रस्ताव रखा गया. पहली श्रेणी में वे जमीनें शामिल होंगी, जो उद्योग स्थापित करने के लिए आवंटित की गयी थीं, लेकिन वहां अब तक कोई उद्योग शुरू नहीं हुआ और जमीन खाली पड़ी है. दूसरी श्रेणी में पूरी तरह सरकारी नियंत्रण वाली जमीनें तथा ऐसी जमीनें शामिल होंगी, जिनका रिकॉर्ड किसी सरकारी या निजी संस्था के पास स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है. तीसरी श्रेणी में ऐसी निजी जमीनों का विवरण जुटाया जायेगा, जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर सरकार वापस लेने पर विचार कर सकती है.
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