Sunday, April 26, 2026

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बाइक-स्कूटी चलाने पर लगा बैन हटा, कलकत्ता हाईकोर्ट ने बदला चुनाव आयोग का फैसला

बाइक-स्कूटी चलाने पर लगा बैन हटा, कलकत्ता हाईकोर्ट ने बदला चुनाव आयोग का फैसला

मुख्य बातें

Bengal Elections: कोलकाता. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण की वोटिंग से ठीक पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग के एक अहम फैसले को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने आयोग की तरफ से लगाए गए 48 घंटे के बाइक-स्कूटी बैन को पूरी तरह खारिज कर दिया और कहा कि इस तरह का पूर्ण प्रतिबंध उचित नहीं है. मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस कृष्णा राव ने साफ कहा कि स्वंतत्र और निष्पक्ष चुनाव के नाम पर आम लोगों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकती.

प्रतिबंध लगाना तर्कसंगत नहीं

कोर्ट ने माना कि चुनाव आयोग के पास चुनाव कराने के व्यापक अधिकार हैं, लेकिन उन अधिकारों का इस्तेमाल कानून के दायरे में ही होना चाहिए. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि चुनाव के दौरान सुरक्षा बनाए रखने के लिए पहले से ही बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बल और स्थानीय पुलिस तैनात हैं. ऐसे में सभी नागरिकों पर व्यापक प्रतिबंध लगाना तर्कसंगत नहीं है.

पिलियन राइडिंग में भी दी छूट

कोर्ट ने अपने आदेश में यह जरूर कहा कि चुनाव के दिन यानी 29 अप्रैल को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक पिलियन राइडिंग (दोपहिया पर पीछे बैठने) पर 12 घंटे की पाबंदी रहेगी. हालांकि, इसमें कुछ जरूरी छूट भी दी गई है. परिवार के सदस्य केवल वोट डालने, मेडिकल इमरजेंसी या पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए ही पीछे बैठ सकेंगे.

बाइक रैलियों पर रहेगा प्रतिबंध

अदालत ने यह भी साफ किया कि चुनाव आयोग की तरफ से 48 घंटे के लिए बाइक रैलियों पर लगाया गया प्रतिबंध जारी रहेगा. कोर्ट ने माना कि चुनाव से पहले रैलियों पर रोक लगाने से हिंसा की आशंका कम की जा सकती है, इसलिए इस फैसले में दखल देने की जरूरत नहीं है.

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चुनाव आयोग का क्या था आदेश?

चुनाव आयोग ने 20 अप्रैल को एक अधिसूचना जारी कर 48 घंटे तक बाइक रैलियों पर रोक लगाने के साथ-साथ दोपहिया वाहनों के इस्तेमाल और पिलियन राइडिंग पर भी प्रतिबंध लगा दिया था. हालांकि, भारी आलोचना के बाद इसमें संशोधन करते हुए ओला, उबर, जोमाटो और स्विगी जैसी सेवाओं को छूट दी गई थी. साथ ही पहचान पत्र रखने वाले दफ्तर जाने वाले लोगों को भी राहत दी गई थी.

आत लोगों को राहत

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ ही बंगाल में चुनाव से पहले राजनीतिक और प्रशासनिक माहौल में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. कोर्ट के इस आदेश ने जहां आम लोगों को राहत दी है, वहीं चुनाव आयोग के अधिकारों और उनकी सीमाओं को लेकर भी एक स्पष्ट संदेश दिया है.

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