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केरसई प्रखंड की टैंसेर पूर्वी पंचायत के परहाटोली, बॉन्डोंबारी, बढ़नीजोर, लुकलटोली, पोखराटोली, घुटबहार, धवईटोली, टीनाटोली सहित आसपास के कई गांवों के लिए पोटया नदी आज भी बड़ी बाधा बनी हुई है। नदी पर पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने अपनी सुविधा के लिए बिजली के सीमेंट पोल रखकर अस्थायी पुल तैयार कर लिया है। इसी जुगाड़ पुल के सहारे सैकड़ों ग्रामीण प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं। बरसात के मौसम में यह पुल और भी खतरनाक हो जाता है। मजबूरी ऐसी है कि लोगों के पास इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। ग्रामीण बताते हैं कि पोटया नदी पर वर्षों से स्थायी पुल निर्माण की मांग की जा रही है। कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को आवेदन देकर समस्या से अवगत कराया गया। आज तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। मजबूर होकर ग्रामीणों ने बिजली के पोल रखकर अस्थायी पुल बनाया, ताकि गांवों का मुख्य सड़क से संपर्क बना रहे। इस पुल से सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को होती है। प्रतिदिन दर्जनों छात्र-छात्राएं इसी संकरे और अस्थायी पुल से होकर विद्यालय जाते हैं। बरसात में पुल फिसलन भरा हो जाता है। नदी का तेज बहाव हमेशा दुर्घटना का खतरा पैदा करता है। अभिभावक रोज बच्चों की सुरक्षित वापसी को लेकर चिंतित रहते हैं। महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों की परेशानी भी कम नहीं है। गांव में किसी की तबीयत अचानक बिगड़ जाए तो उसे अस्पताल ले जाना किसी चुनौती से कम नहीं होता। गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचाने में भी भारी कठिनाई होती है। कई बार लोगों को मरीजों को सहारा देकर या चारपाई पर लादकर नदी पार करानी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर कई घंटों तक आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है। मजदूर काम पर नहीं जा पाते। किसान बाजार नहीं पहुंच पाते। बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। यदि किसी को तत्काल चिकित्सा की जरूरत पड़ जाए तो स्थिति और गंभीर हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी यदि ग्रामीणों को बिजली के पोल से पुल बनाकर नदी पार करनी पड़े, तो यह विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। उनका आरोप है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि पुल निर्माण का आश्वासन देते हैं। चुनाव खत्म होते ही यह मुद्दा भुला दिया जाता है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और राज्य सरकार से पोटया नदी पर जल्द स्थायी पुल निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पुल बनने से आठ गांवों के हजारों लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी।

