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बिहारशरीफ नगर निगम क्षेत्र में गुरुवार से शुरू हुई सफाईकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के तीसरे दिन शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई है। बिहार लोकल बॉडीज इम्पलाइज फेडरेशन और बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ संयुक्त संघर्ष मोर्चा के राज्यव्यापी आह्वान पर लगभग 1300 सफाईकर्मी निगम के मुख्य द्वार पर विशाल धरना दे रहे हैं। शहर में सफाई व्यवस्था ठप होने से पूरे शहर में जगह-जगह कूड़े का अंबार लग गया है, जिससे आम जनजीवन बेहाल है और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। रोजाना शहर से 250 टन कचरे का उठाव होना था, लेकिन उसके ठप हो जाने से परेशानी बढ़ती जा रही है। सरकार पर फूटा कर्मियों का आक्रोश सफाईकर्मियों ने कड़ा संदेश दिया है कि जब तक उनकी ये बुनियादी मांगें पूरी नहीं होती, वे किसी भी कीमत पर काम पर नहीं लौटेंगे। धरने पर बैठे कर्मचारियों में सरकार और प्रशासन की बेरुखी को लेकर भारी आक्रोश है। यूनियन संघ के उपाध्यक्ष करण कुमार ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हम ऐसे ही भूखे-प्यासे बैठे रहेंगे। हमारे पास खोने के लिए कुछ नहीं है। एक तरफ देश के प्रधानमंत्री सफाईकर्मियों को भगवान बताते हैं, और दूसरी तरफ 300-400 रुपए कमाने वाले मजदूरों को सरकार ने सड़क पर बैठा रखा है। सरकार को जनता के स्वास्थ्य की भी कोई परवाह नहीं है। उग्र आंदोलन की चेतावनी संगठन के प्रतिनिधि मनोज रविदास ने चेतावनी देते हुए कहा कि हमारा आंदोलन अनिश्चितकालीन है, चाहे यह एक महीना ही क्यों न चले। अभी हम शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगें रख रहे हैं। अगर निगम या पुलिस प्रशासन की ओर से हमें प्रताड़ित किया गया, तो हम आंदोलन का तरीका बदलकर उग्र रूप अख्तियार करने को बाध्य होंगे। शहर में लगा कचरे का ढेर हड़ताल का सीधा और भयावह असर शहर की सड़कों पर दिखने लगा है। कूड़ा उठाव बंद होने के कारण लोग अपने घरों का कचरा गलियों और सड़कों पर डंप करने को मजबूर हैं। बीमारी फैलने का खतरा सिपाह निवासी संजय कुशवाहा और साठोपुर निवासी आकाश कुमार काजल ने शहर के हालात बयां करते हुए बताया कि तीन दिनों से सफाईकर्मी नहीं आए हैं। शहर में हर तरफ कूड़ा पसरा हुआ है और भयंकर बदबू आ रही है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि अभी बरसात का मौसम चल रहा है, ऐसे में बजबजाती गंदगी के कारण मोहल्लों में गंभीर बीमारियों और महामारी के फैलने की प्रबल आशंका बन गई है। शहरवासियों की बढ़ी परेशानी फिलहाल, निगम प्रशासन या राज्य स्तर पर इस गतिरोध को तोड़ने के लिए कोई ठोस पहल होती नहीं दिख रही है, जिससे शहरवासियों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।
