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बिहार सरकार राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत और डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए मेडिकल शिक्षा के विस्तार पर लगातार काम कर रही है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा है कि अगले 5-6 वर्षों में स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव दिखेगा। मंत्री जायसवाल ने यह बात बुधवार को आयोजित दैनिक भास्कर हेल्थ कॉन्क्लेव सीजन-2 में कही है। उन्होंने स्वीकार किया कि बिहार में डॉक्टरों की कमी एक बड़ी चुनौती रही है, लेकिन अब सरकार इस समस्या के समाधान के लिए योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है। हाल ही में बिहार को MBBS की नई सीटों की स्वीकृति मिली है, जिससे अधिक छात्रों को डॉक्टर बनने का अवसर मिलेगा। सरकार अब पोस्ट ग्रेजुएट (PG) और सुपर स्पेशलिटी सीटों की संख्या बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दे रही है, ताकि भविष्य में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। मंत्री ने बताया कि किसी भी सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर को तैयार होने में लगभग 9 से 10 वर्ष का समय लगता है। इसलिए वर्तमान में किए जा रहे निवेश और प्रयासों का वास्तविक लाभ आने वाले 5-6 वर्षों में ही देखने को मिलेगा। जिला अस्पताल को आधुनिक सुविधाओं से कर रहे लैस- दिलीप जायसवाल दिलीप जायसवाल ने कहा, ‘राज्य सरकार जिला अस्पतालों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित कर रही है, ताकि मरीजों को सामान्य और मध्यम स्तर के इलाज के लिए पटना या दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े।’ उन्होंने आगे कहा, ‘कई जिला अस्पतालों में ICU और आधुनिक उपकरण उपलब्ध होने के बावजूद उनका पूरी क्षमता से उपयोग नहीं हो पा रहा है। सरकार इस दिशा में भी लगातार सुधार कर रही है।’ निजी निवेश बढ़ने से मरीजों को मिलेगा बेहतर इलाज मंत्री ने कहा कि बिहार में बड़े निजी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों का निवेश लगातार बढ़ रहा है। इससे राज्य के मरीजों को उच्चस्तरीय इलाज अपने ही प्रदेश में उपलब्ध होगा और इलाज के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता धीरे-धीरे कम होगी। उन्होंने कहा कि सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों की भागीदारी से स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाया जा सकता है। चिकित्सा शिक्षा और रिसर्च को मजबूत करना समय की जरूरत IGIMS के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल ने कहा, ‘किसी भी राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था केवल अस्पतालों और डॉक्टरों की संख्या से मजबूत नहीं होती। चिकित्सा शिक्षा, मेडिकल रिसर्च और आधुनिक तकनीक का विकास भी उतना ही आवश्यक है।’ डॉ. मनीष मंडल ने कहा, ‘मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्पतालों की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा। सरकारी संस्थानों को आधुनिक उपकरण, प्रशिक्षित मानव संसाधन और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराकर ही आम लोगों को सस्ता और बेहतर इलाज दिया जा सकता है।’ डॉक्टरों की संख्या के साथ गुणवत्ता भी जरूरी- डॉ. संजीव AIIMS पटना के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. संजीव ने कहा, स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य केवल अधिक मरीजों का इलाज करना नहीं, बल्कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण, सम्मानजनक और मानवीय उपचार उपलब्ध कराना भी है।’ उन्होंने कहा, ‘मेडिकल कॉलेजों और डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना जरूरी है, लेकिन चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करना चाहिए। मरीज लंबी दूरी तय कर बड़े अस्पतालों में उम्मीद लेकर आते हैं। इसलिए डॉक्टरों का व्यवहार संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण होना चाहिए।’ डॉ. संजीव ने कहा, ‘आयुष्मान भारत योजना ने गरीब मरीजों के लिए महंगे इलाज को काफी हद तक आसान बनाया है। अब आवश्यकता इस बात की है कि जिला स्तर पर भी सुपर स्पेशलिटी सेवाओं का विस्तार हो। ताकि लोगों को छोटे-छोटे इलाज के लिए बड़े शहरों में न जाना पड़े। गुणवत्तापूर्ण इलाज, रिसर्च और मेडिकल शिक्षा भविष्य की मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था की आधारशिला है।’ इलाज के साथ रोकथाम पर भी देना होगा जोर- डॉ. वी. पी. सिंह सवेरा कैंसर एंड मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के कैंसर विशेषज्ञ डॉ. वी. पी. सिंह ने कहा, ‘स्वास्थ्य क्षेत्र में सबसे बड़ा निवेश बीमारी की रोकथाम है। “प्रिवेंशन इज बेटर दैन क्योर” केवल एक नारा नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य का सबसे प्रभावी सिद्धांत है। यदि लोग नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं, तंबाकू और नशे से दूर रहें, संतुलित आहार लें, नियमित व्यायाम करें तो कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।’ उन्होंने कहा, ‘एक डॉक्टर सीमित मरीजों का इलाज कर सकता है, लेकिन जागरूकता अभियान के माध्यम से लाखों लोगों को बीमारियों से बचाया जा सकता है। इसलिए सरकार, डॉक्टर, मीडिया और समाज को मिलकर स्वास्थ्य शिक्षा और जन-जागरूकता अभियान चलाने चाहिए।’ हर जिले में बेहतर इलाज मिलेगा तो मरीजों का पलायन रुकेगा रूबन मेमोरियल हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉ. सत्यजीत कुमार सिंह ने कहा, ‘बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है, लेकिन अब सबसे बड़ी चुनौती इन सुविधाओं को जिला स्तर तक पहुंचाना है।’ उन्होंने कहा, ‘यदि प्रत्येक जिले में आधुनिक जांच सुविधाएं, विशेषज्ञ डॉक्टर और सुपर स्पेशलिटी सेवाएं उपलब्ध होंगी तो मरीजों को इलाज के लिए पटना, दिल्ली या अन्य राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। इससे मरीजों का आर्थिक बोझ कम होगा और समय पर बेहतर इलाज मिल सकेगा।’ उन्होंने आगे कहा, ‘सरकार और निजी क्षेत्र को प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि साझेदार की भूमिका निभानी चाहिए। दोनों के सहयोग से ही आम लोगों तक गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीक, प्रशिक्षण और विशेषज्ञता का विस्तार ही बिहार को बेहतर चिकित्सा सेवाओं वाले अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करेगा।’

